Mohammad Rafi Death Anniversary: सुरों के सरताज कहे जाने वाले गायक मोहम्मद रफी की आज 46वीं पुण्यतिथि है। आइए इस मौके पर आपको उनके कुछ बेहतरीन गीतों के बारे में बताते हैं और उन्हें याद करते हैं।
31 जुलाई 1980 को भारत ने वो आवाज खो दी, जिसे हर जज्बे को महसूस कराने की काबिलियत थी। मोहम्मद रफी न सिर्फ एक बेहतरीन गायक थे, बल्कि वो एक दौर के जज्बात थे, जो आज भी हर उम्र के लोगों की प्लेलिस्ट में जिंदा हैं। उनकी पुण्यतिथि पर चलिए याद करते हैं उनके कुछ ऐसे सदाबहार नगमें, जिन्होंने संगीत को अमर बना दिया।
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गुलाबी आंखें जो तेरी देखीं
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गुलाबी आंखें जो तेरी देखीं (फिल्म- द ट्रेन)
ये रोमांटिक गाना जितना मस्ती से भरपूर है, उतना ही खूबसूरत भी। इसे लिखा था आनंद बख्शी ने और संगीत दिया था आर. डी. बर्मन ने। साल 1970 में राजेश खन्ना और नंदा पर फिल्माए गए इस गीत को आज भी क्लब्स और पार्टियों में बजाया जाता है। माना जाता है कि ये गाना एक ही टेक में रिकॉर्ड हुआ था, जिसमें रफी साहब को महारत हासिल थी। वो लगभग हर गाने को एक ही बार में रिकॉर्ड कर लिया करते थे।
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बाहों में चले आओ
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'बाहों में चले आओ' (फिल्म- अनामिका)
साल 1973 के इस सुरीले नगमे में मोहम्मद रफी के साथ लता मंगेशकर की जुगलबंदी ने प्रेम की गहराई को छू लिया था। संगीतकार थे राहुल देव बर्मन और गीत लिखे थे मजरूह सुल्तानपुरी ने। यह गाना आज भी कपल्स के फेवरिट रोमांटिक सॉन्ग्स में गिना जाता है। ये गाना संजीव कुमार और जया भादुरी पर फिल्माया गया था।
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क्या हुआ तेरा वादा
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'क्या हुआ तेरा वादा' (फिल्म- हम किसी से कम नहीं)
साल 1977 के इस गीत के लिए रफी साहब को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला था। इसे लिखा था मजरूह सुल्तानपुरी ने और संगीत दिया था आर. डी. बर्मन ने। इस गीत को अभिनेता तारिक पर फिल्माया गया था, जिसे रफी की आवाज ने और भी प्रभावशाली बना दिया।
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अभी न जाओ छोड़ कर
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'अभी न जाओ छोड़ कर' (फिल्म- हम दोनों)
साल 1961 में देव आनंद और साधना पर फिल्माया गया ये गाना हिंदी सिनेमा के सबसे मधुर प्रेम गीतों में गिना जाता है। जयदेव के संगीत और साहिर लुधियानवी की कलम से निकला ये गीत मोहब्बत को बेहद खूबसूरती से बयां करता है।
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लिखे जो खत तुझे
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'लिखे जो खत तुझे' (फिल्म- कस्मे वादे)
1967 में शंकर-जयकिशन के संगीत और हसरत जयपुरी की शायरी में रफी साहब ने इस गीत को एक प्रेम पत्र की तरह गाया। ऐसा कहा जाता है कि शशि कपूर और आशा पारेख पर फिल्माए इस गाने को रिकॉर्ड करते हुए हर कोई भावुक हो गया था। इस गीत ने प्रेम में खो जाने का नया तरीका सिखाया।
'तेरा मुझसे है पहले का नाता कोई' (फिल्म- आ गले लग जा)
1963 में ये गीत जितना सूफियाना है, उतना ही आत्मा को छू लेने वाला भी है। इसे लिखा था शैलेन्द्र ने और संगीत था शंकर-जयकिशन का। गीत आज भी कई आयोजनों में गूंजता है और काफी पसंद किया जाता है।