मंच छोड़ गए चले गए रैना
यह सब तब हुआ, जब इला अरुण ने महान नाटककार हेनरिक इब्सन के प्रति अपने प्यार के बारे में बात की और बताया कि कैसे उन्होंने उनके प्रसिद्ध नाटक पीयर गिन्ट को कश्मीर की पृष्ठभूमि पर आधारित अपने नाटक पीर गनी के रूप में रूपांतरित किया। बातचीत के दौरान इला अरुण ने जेएलएफ मंच पर उनके नाटक के एक दृश्य को निभाने का फैसला किया और जब वह ऐसा कर रही थीं तो रैना ने बाहर जाने का फैसला किया।
इला ने रैना की नाराजगी पर कही यह बात
हालांकि, रैना ने अपनी निराशा का कारण नहीं बताया, लेकिन रिपोर्ट्स के अनुसार फिल्म निर्माता को इस विशेष सत्र के दौरान नजरअंदाज किया गया। जब इला अरुण को बाद में एहसास हुआ कि रैना चले गए हैं तो उन्होंने कहा, 'यह सत्र सिर्फ मेरी किताब के बारे में नहीं है, बल्कि यह मेरे जीवन के बारे में है और अगर मैं अभिनय कर रही हूं तो उन्हें नाराज नहीं होना चाहिए। उन्हें यहां बैठना चाहिए।' उन्होंने मजाक में कहा, 'अल्बर्ट पिंटो को गुस्सा क्यों आया?', जिससे दर्शक हंस पड़े और उन्होंने अपना संयम बनाए रखने के लिए उनकी सराहना की।
इला अरुण ने रैना को लेकर की यह अपील
सत्र समाप्त होने पर संचालक असद लालजी ने रैना से औपचारिक माफी मांगते हुए कहा कि न तो उनका और न ही पैनल के सदस्यों का उनका अपमान करने का इरादा था। इला अरुण ने दर्शकों से रैना के संस्मरण को पढ़ने और अपनी प्रतियों पर उनके हस्ताक्षर लेने का भी आग्रह किया।