“अगर मैं किसी भी फिल्म में देश के लिए कुछ कर सकता हूं, तो मैं खुद को 'भारत कुमार' ही मानूंगा।” ये कहना है बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता, निर्माता-निर्देशक और राइटर मनोज कुमार का, जिन्हे ‘भारत कुमार’ के नाम से भी जाना जाता है। इस नाम को लेकर भी उनका कहना था कि ‘ये नाम काफी जिम्मेदारियां देता है। इस नाम के साथ आपको रहना भी इस नाम के माफिक ही पड़ता है।’
कभी कैमरे को तोप का गोला समझकर घबरा जाने वाला 19 साल का लड़का बाद में बॉलीवुड का वो एक्टर-निर्देशक और निर्माता बन जाता है, जिसे खुद प्रधानमंत्री फिल्म बनाने की सलाह देते हैं। मनोज कुमार की आज 88वीं जयंती है। इस मौके पर जानते हैं कैसे पाकिस्तान में जन्में हरिकृष्ण गोस्वामी बन गए बॉलीवुड के ‘भारत कुमार’ और उनसे जुड़े कुछ किस्से।
मनोज कुमार
- फोटो : सोशल मीडिया
विभाजन में मनोज कुमार की आंखों के सामने हुई भाई की मौत
बॉलीवुड के भारत कुमार का जन्म पाकिस्तान के एबटाबाद में 1937 में हुआ था। मनोज कुमार के दिल और दिमाग में देश के विभाजन से जुड़ी काफी गहरी यादें जुड़ी हैं। उसकी वजह है उनका 2 महीने का छोटा भाई कुक्कू जिसकी विभाजन में हुए दंगे के दौरान मौत हो जाती है। एक पुराने इंटरव्यू में देश विभाजन और भाई की मौत का झकझोर देने वाला किस्सा सुनाते हुए मनोज कुमार ने बताया था कि जब पार्टिशन हुआ तो मेरी मां ने एक बेटे को जन्म दिया था, जिसका नाम कुक्कू था।
वो बीमार था और मां भी बीमार थी। हम रिफ्यूजी कैंप में थे और मां को तीस हजारी हॉस्पिटल में रखा गया था। उस वक्त दंगे चालू थे। जब सायरन बजता था तो डॉक्टर और नर्स अंडरग्राउंड चले जाते थे। मां और भाई तड़प रहे थे। मां चीख रही थी कि डॉक्टर को बुलाओ। वो सब अंडरग्राउंड हो गये थे। तभी मां ने चीख मारी और मेरा भाई कुक्कू चला गया।
दिलीप कुमार की वजह से बने ‘मनोज कुमार’
मनोज कुमार हरिकृष्ण गिरि गोस्वामी से मनोज कुमार कैसे बने इसके भी पीछे एक मजेदार किस्सा है। दरअसल, स्कूल में पढ़ाई के दौरान मनोज कुमार एक बार दिलीप कुमार की फिल्म 'शबनम' देखने गए। इस फिल्म में दिलीप साहब के किरदार से वो इतना प्रभावित हुए कि उन्होंने अपना नाम ही उस किरदार के नाम पर मनोज कुमार रख लिया।
मनोज कुमार
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19 साल की उम्र में निभाया 90 साल के भिखारी का पहला रोल
मनोज कुमार को उनका पहला रोल सिर्फ 19 साल की उम्र में फिल्म ‘फैशन’ में मिला था। ये किरदार था 90 साल के एक भिखारी का। 19 साल का लड़का जो पहली बार कैमरा फेस कर रहा था, वो 90 साल का भिखारी कैसे बना इसके पीछे की कहानी खुद मनोज कुमार ने एक पुराने इंटरव्यू में बताई थी। मनोज कुमार बताते हैं कि पहली बार कैमरा फेस करने पर वो काफी डरे हुए थे। कैमरा देखकर लगता था मानो तोप का कोई गोला चलेगा। टांगें कांपती थी। फिर कैसे भी करके उन्होंने 90 साल के भिखारी के किरदार को निभाया।
11 रुपए में अशोक कुमार के लिए लिखा एक सीन
मनोज कुमार शानदार अभिनेता के साथ-साथ स्क्रिप्ट राइटर भी थे। एक बार जब मनोज कुमार एक्टर बनने के लिए संघर्ष कर रहे थे, तब उन्होंने अशोक कुमार की फिल्म ‘जमीन और आसमान’ का एक सीन लिखा था और इसके लिए उन्हें 11 रुपए भी मिले थे। दरअसल, एक दिन फिल्म के निर्माता प्रोड्यूसर रोशन लाल मल्होत्रा काफी परेशान थे। उन्हें ऐसी हालत में देखकर मनोज कुमार ने उनसे पूछा कि क्या हुआ मल्होत्रा साहब?
इस पर रोशन लाल ने बताया कि फिल्म के हीरो अशोक कुमार की डेट्स बड़ी मुश्किल से मिली हैं, लेकिन अब उन्हें फिल्म का एक सीन पसंद नहीं आ रहा है। इस पर मनोज कुमार ने कहा कि लाइए मैं इस सीन को दोबारा लिख देता हूं। इसके बाद मनोज कुमार ने जो सीन लिखा वो अशोक कुमार को बहुत पसंद आया। तब रोशन लाल मल्होत्रा ने इसके लिए उन्हें 11 रुपये दिए। इसके बाद कई प्रोड्यूसर्स मनोज कुमार से अपनी फिल्मों के सीन लिखवाने लगे।
फिल्म 'शहीद' में मनोज कुमार
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फिल्म ‘शहीद’ के लिए भगत सिंह की मां से मिलने पहुंच गए थे मनोज कुमार
1965 में मनोज कुमार भगत सिंह के जीवन पर बनी फिल्म ‘शहीद’ लेकर आए थे। ऐसा कहा जाता है कि फिल्म में भगत सिंह की भूमिका निभाने के लिए मनोज कुमार भगत सिंह की मां से मिलने पहुंच गए थे। फिल्म में मनोज कुमार की मेहनत साफ दिखी और फिल्म रिलीज होते ही ब्लॉकबस्टर बन गई। मनोज कुमार के अभिनय की भी काफी तारीफ हुई थी।
मनोज कुमार और अमिताभ बच्चन
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जब मुंबई छोड़कर जा रहे अमिताभ को दिया अपनी फिल्म में काम
बॉलीवुड के ‘शहंशाह’ अमिताभ बच्चन भी महानायक नहीं बन पाते अगर मनोज कुमार न होते। वो मनोज कुमार ही हैं जिन्होंने मुश्किल वक्त में अमिताभ बच्चन का साथ दिया और उन्हें मुंबई से वापस जाने से रोका। दरअसल, जब लगातार फ्लॉप फिल्मों से निराश होकर अमिताभ बच्चन ने मुंबई छोड़ने का मन बना लिया था तो मनोज कुमार ने ही उनको जाने से रोका था। इसके बाद साल 1974 में मनोज कुमार ने अमिताभ को अपनी फिल्म ‘रोटी, कपड़ा और मकान’ में मौका भी दिया और ये फिल्म हिट साबित हुई। इसके बाद अमिताभ बच्चन की गाड़ी चल निकली।
मनोज कुमार
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ऐसे बने मनोज कुमार से ‘भारत कुमार’
जब लोग किसी एक्टर को रोमांटिक छवि में देखना पसंद कर रहे थे, उस वक्त मनोज कुमार ने देशभक्ति की फिल्मों की ओर रुख किया। उन्होंने अपने करियर में एक से बढ़कर एक देशभक्ति की फिल्में दीं। इनमें पूरब और पश्चिम, शहीद, उपकार, क्रांति और जय हिंद जैसी फिल्में शामिल हैं। ज्यादातर फिल्मों में उनके किरदार का नाम ‘भारत कुमार’ होता था। इसी वजह से लोग मनोज कुमार को 'भारत कुमार' भी कहने लगे।
जब एक लड़की ने ऐसा करने पर मनोज कुमार को लगाई लताड़
मनोज कुमार ने इस कदर देशभक्ति की फिल्में कीं कि लोग उन्हें सच में फिल्मों के किरदार ‘भारत कुमार’ की तरह ही आदर्शवादी समझते थे। एक बार जब मनोज कुमार अपने परिवार के साथ बाहर कहीं खाना खाने गए। तो वो वहां सिगरेट पी रहे थे। तभी एक नौजवान लड़की आती है और मनोज कुमार को डांटते हुए कहती है ‘आप भारत होकर सिगरेट पी रहे हो, आपको शर्म नहीं आती।’ इसके बाद मनोज कुमार जब भी सिगरेट पीते थे, छिपकर पीते थे कहीं कोई देख न ले। साथ ही इसके बाद वो अपनी फिल्मों में हिरोइन को भी ज्यादा टच नहीं करते थे और रोमांस नहीं करते थे। क्योंकि गंभीर फिल्मों में ये अच्छा नहीं लगेगा। वो कहते थे कि ‘भारत कुमार’ नाम का एक बोझ रहता था, इस नाम के साथ बड़ी जिम्मेदारियां आती थीं।
अभिनेता मनोज कुमार
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जब मनोज कुमार ने किया सरकार का विरोध, फिल्म पर लगा बैन
अपनी फिल्मों में ही नहीं बल्कि असल जिंदगी में भी मनोज कुमार काफी निडर थे। उन्होंने 1975 में देश में लगी इमरजेंसी के दौर में सरकार का खुलकर विरोध किया था। उस वक्त जब मनोज कुमार से इमरजेंसी के समर्थन में डॉक्यूमेंट्री बनाने के लिए कहा गया तो उन्होंने साफ इनकार कर दिया था। इसके बाद उनकी फिल्म ‘दस नंबरी’ पर बैन लगा दिया गया था। हालांकि, बाद में कोर्ट जाकर उन्होंने अपनी लड़ाई जीती और फिल्म रिलीज हुई।
फिल्म के लिए बेच दिया अपना बंगला और जमीन
मनोज कुमार अपनी फिल्मों को लेकर काफी जुनूनी थे। उन्होंने 1980 के दशक में अपनी एक फिल्म बनाने के लिए अपना सबकुछ दांव पर लगा दिया था और अपना घर व जमीन तक बेंच दी थी। कहा जाता है कि 1981 में आई फिल्म ‘क्रान्ति’ का बजट 3 करोड़ रुपए था, जो उस वक्त की सबसे महंगी फिल्मों में से एक थी। इस फिल्म में मनोज कुमार के अलावा दिलीप कुमार, हेमा मालिनी, शशि कपूर से लेकर प्रेम चोपड़ा, शत्रुघ्न सिन्हा और परवीन बॉबी जैसे कलाकार थे। कहा जाता है कि जब फिल्म की शूटिंग शुरू हुई थी तो प्रोड्यूसर्स और कुछ मेकर्स ने हाथ पीछे खींच लिया। ऐसे में फिल्म का पूरा पैसा मनोज कुमार को ही लगाना पड़ा। इसको बनाने के लिए मनोज कुमार को अपने दिल्ली वाले बंगले और मुंबई में एक जमीन तक को बेचना पड़ गया था। जब फिल्म रिलीज हुई तो ब्लॉकबस्टर साबित हुई और इसने बजट से काफी ज्यादा कमाई की।