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Manna Dey Death Anniversary: मुश्किल गीतों के लिए पहली पसंद रहे मन्ना डे, आज भी मंत्रमुग्ध करते हैं उनके गीत

Thu, 24 Oct 2024 09:29 AM IST
पूनम कंडारी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

आज भी जब 'काबुलीवाला (1961)' फिल्म का गीत 'ऐ मेरे प्यारे वतन' कहीं बजता है तो श्रोताओं की आंखें भीग जाती हैं। यह गीत महज लिरिक्स के कारण ही मन को नहीं छूता बल्कि मन्ना डे की आवाज इस गीत को यादगार बनाती है। ऐसे ही कई बेहतरीन गीत मन्ना डे ने गाए हैं। 
 
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मन्ना डे - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जब भी हिंदी फिल्मों के सदाबहार और बेहतरीन गीतों पर चर्चा होती है तो कई गायकों के नाम सामने आते हैं। इसमें मोहम्मद रफी, किशोर कुमार जैसे नाम पल भर में ही ले लिए जाते हैं। इसी सूची में एक और नाम भी शामिल है, वे नाम है मन्ना डे का। एक बार श्रोता किसी फिल्म का नाम भूल जाएं, उसके कलाकारों को भूल जाएं, लेकिन मन्ना डे की आवाज में गाए गीतों को नहीं भूलते। मन्ना डे की आवाज थी ही इतनी बेहतरीन की उसे कभी भुलाया ही नहीं जा सकता है। आज उनकी पुण्यतिथि (24 अक्टूबर 2013) है। इस मौके पर जानिए, उनकी गायिकी के सफर और जीवन से जुड़ी कुछ खास बातें। 

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हिट था पहला गीत-दूसरे गीत को गांधी जी ने भी सुना
1 मई 1919 को कोलकाता (ब्रिटिश इंडिया) में जन्मे मन्ना डे का असल नाम प्रबोध चंद्र डे था। मन्ना डे को बतौर गायक पहली फिल्म 'तमन्ना (1942)' में मशहूर अभिनेत्री और गायिका सुरैया के साथ गाने का मौका मिला। यह गाना फिल्म रिलीज होते ही हिट हो गया। इसके बाद मन्ना डे को 'राम राज्य (1943)' में एकल गायक के तौर पर गाने का मौका मिला। इस फिल्म में उनके गाए गीत के बोल 'गई तू गई सीता सती' थे। इस गीत को भी बहुत पसंद किया गया। यहां तक की इस गीत को सुनने वालों में महात्मा गांधी भी शामिल थे क्योंकि उन्होंने 'रामराज्य' फिल्म को उस समय पर देखा था। 

मुश्किल गीतों को गाने में कोई नहीं था उनका सानी 
आगे चलकर मन्ना डे ने कई बांग्ला और हिंदी फिल्मों में गीत गाए। कुछ ही समय में उनकी पहचान ऐसे गायक की बन गई जिससे मुश्किल से मुश्किल गीत गवाया जा सकता है। इसलिए जब भी उस समय के संगीतकारों को मुश्किल गीत गवाने होते तो वह मन्ना डे को ही याद करते। इस तरह वह कम समय में ही संगीतकारों के बीच एक उम्दा गायक का दर्जा हासिल करने में कामयाब रहे। 

राजकपूर थे उनकी आवाज के कायल 
मन्ना डे ने राजकपूर को भी कई फिल्मों में आवाज दी। लेकिन एक फिल्म में राजकपूर ने उन्हें गायक मुकेश के स्थान पर चुनने का फैसला लिया। जबकि उस फिल्म के निर्माता इस बात के लिए राजी नहीं थे। राजकपूर की इस फिल्म का नाम 'चोरी चोरी (1956)' था और गीत था 'ये रात भीगी भीगी'। फिल्म के निर्माता का कहना था कि इस गाने को मुकेश ही अच्छे से गा सकते हैं। लेकिन राजकपूर ने उनसे कहा कि एक बार आप मन्ना डे से यह गाना गवाकर देखे लें। निर्माता इस बात के लिए राजी हो गए। जब उन्होंने मन्ना डे का रिकॉर्ड किया गया गीत सुना तो राजकपूर के फैसले को सही पाया। आखिर में यह गाना मन्ना डे और लता मंगेशकर की आवाज में दर्शकों को सुनने को मिला। इस गाने को आज भी सबसे प्रसिद्ध रोमांटिक गीतों में गिना जाता है। 

लता मंगेशकर-मोहम्मद रफी - फोटो : सोशल मीडिया
मोहम्मद रफी-लता मंगेशकर भी रहे प्रशंसक 
राजकपूर ही नहीं मोहम्मद रफी और लता मंगेशकर भी मन्ना डे के कायल थे। एक बार मोहम्मद रफी ने भी कहा था कि दुनिया मेरे गाने सुनती है लेकिन मैं मन्ना डे के गाने सुनना हूं। लता जी ने वैसे तो मन्ना डे के साथ कई गीत गाए और वह उनकी गायिकी की बहुत बड़ी प्रशंसक भी रहीं। लेकिन जब मन्ना डे ने 'उपकार' फिल्म में  'कसमें वादे प्यार वफा' गीत गया तो इस गीत को सुनकर लता जी भाव-विभोर हो गईं। 
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कई भाषाओं में गाए मशहूर गीत
मन्ना डे ने हिंदी और बांग्ला के अलावा 14 भाषाओं में गीत गाए। उनके गीतों की संख्या की बात की जाए तो अपने पांच दशक के करियर में लगभग 3047 गीत गाए हैं। वैसे तो मन्ना डे का गाया हर गीत ही श्रोताओं के लिए खास है। लेकिन कुछ खास हिंदी फिल्मों के गीतों की बात की जाए तो उसमें 'उपकार' फिल्म का 'कसमें वादे प्यार वफा', जंजीर का 'यारी है ईमान मेरा यार मेरी जिंदगी', 'आनंद' फिल्म का गीत 'जिंदगी कैसी ये पहली', फिल्म 'श्री 420 का 'प्यार हुआ इकरार हुआ' शामिल है।  
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