सिद्दीक को मिली जमानत
19 नवंबर को केरल उच्च न्यायालय द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने सिद्दीक को अग्रिम जमानत दे दी थी। अब जमानत पर इनकार उन सबूतों पर आधारित था, जो अपराध में उसकी संलिप्तता की ओर इशारा कर रहे थे तथा हिरासत में लेकर पूछताछ की आवश्यकता बता रहे थे। जमानत पर सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी की अध्यक्षता वाली सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने पीड़िता की देरी से शिकायत दर्ज कराने पर सवाल उठाया, जबकि उसने 2019 में फेसबुक पर घटना के बारे में पोस्ट किया था।
क्या है पूरा मामला
सिद्दीक के खिलाफ मामला इस साल अगस्त का है, जब एक महिला अभिनेत्री ने उन पर 2016 में यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। उनके खिलाफ धारा 376 (बलात्कार) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। पीड़िता ने आरोप लगाया कि सिद्दीक ने उसे एक होटल में बुलाया और उसका यौन उत्पीड़न किया। हालांकि, सिद्दीक ने आरोपों से इनकार किया, लेकिन उन्होंने मलयालम मूवी आर्टिस्ट एसोसिएशन (एएमएमए) के महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया।
पीड़िता की सच्चाई पर सवाल
सुप्रीम कोर्ट में अपनी जमानत याचिका में सिद्दीक ने मुख्य बचाव पीड़िता की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया। उन्होंने पीड़िता के फेसबुक पोस्ट और शिकायत दर्ज कराने में हुई देरी को संदेह का कारण बताया। यह तर्क केरल उच्च न्यायालय में भी प्रस्तुत किया गया, लेकिन इसे अनुचित बताकर खारिज कर दिया गया। महिला की शिकायत हेमा समिति की रिपोर्ट के संपादित संस्करण के जारी होने के तुरंत बाद आई, जिसमें मलयालम सिनेमा में बड़े पैमाने पर यौन उत्पीड़न को उजागर किया गया था।