बिहार की राजनीति में इस बार एक ऐसा नाम चमक रहा है, जिसे लोग अब तक सुरों और लोक परंपराओं के लिए जानते थे। लोकगायिका मैथिली ठाकुर ने जब दरभंगा के अलीनगर से सबसे युवा विधायक के रूप में विधानसभा की दहलीज पर कदम रखा, तो यह क्षण न सिर्फ उनके लिए बल्कि उनके समर्थकों के लिए भी ऐतिहासिक बन गया। संगीत से शुरू हुआ सफर अब जनसेवा की राह पर निकल चुका है और इस नई भूमिकाओं से भरे अध्याय की शुरुआत उन्होंने पूरे आत्मविश्वास और गर्व के साथ की।
मैथिली में मैथिली ठाकुर ने ली शपथ
18वीं बिहार विधानसभा के पहले सत्र का पहला दिन उत्साह और परंपराओं के मेल से भरा रहा। नवनिर्वाचित विधायकों के शपथ ग्रहण कार्यक्रम में पांच भाषाओं- हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, उर्दू और मैथिली में शपथ का प्रारूप उपलब्ध कराया गया, जो बिहार की विविध सांस्कृतिक पहचान को दर्शाता है। इसी मंच पर लोकगायिका से विधायक बनीं मैथिली ठाकुर ने मैथिली भाषा में शपथ लेकर अपने क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को और भी मजबूती से सामने रखा।
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सोशल मीडिया पर चर्चाओं में लुक
पीली मधुबनी पेंटिंग वाली साड़ी और मिथिला की पारंपरिक पाग पहने मैथिली का ये रूप सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में रहा। उनकी सादगी और अपनी मिट्टी से जुड़ाव शपथ ग्रहण के उस पल को और भी खास बनाता रहा। शपथ के बाद मैथिली ने मीडिया से बातचीत में इस दिन को अपनी जिंदगी की नई शुरुआत बताया। उन्होंने कहा कि विधानसभा में पहुंचना सिर्फ सम्मान की बात नहीं, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी है, जिसे वह पूरी ईमानदारी से निभाना चाहती हैं।
मैथिली ने वीडियो किया साझा
शपथ ग्रहण का जो वीडियो उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर साझा किया, उस पर लाखों लोगों ने प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें शुभकामनाएं दीं। उन्होंने वीडियो साझा करते हुए कैप्शन में लिखा- 'भारत माता की जय'
राजनीति में रखा कदम
संगीत के क्षेत्र में पहचान बनाने के बाद अब विधायकी का सफर कैसे तय होगा, यह आने वाला समय बताएगा, लेकिन फिलहाल इतना साफ है कि मैथिली ठाकुर ने अपनी नई भूमिका को पूरे समर्पण के साथ अपनाया है। अपने पहनावे से लेकर अपनी भाषा चुनने तक, हर कदम पर उन्होंने मिथिला के गौरव और संस्कृति को सामने रखा। बिहार की राजनीति में उनकी एंट्री नई ऊर्जा और नई उम्मीद का संकेत है।