'मां और बड़ी बहन लता मंगेशकर ने देखा था सपना'
हृदयनाथ मंगेशकर के मुताबिक, उनकी मां एवं बड़ी बहन लता मंगेशकर ने गरीबों की सेवा के लिए अस्पताल बनाने का सपना देखा था। उन्होंने बताया कि करीब 25 साल पहले परिवार और डॉक्टरों ने इस अस्पताल को बनाने की पूरी कोशिश की, लेकिन उस समय यह पूरा नहीं हो सका। हृदयनाथ ने कहा कि बाद में परिवार ने फैसला लिया था कि लता मंगेशकर के नाम पर इस हॉस्पिटल को बनाया जाएगा और इसकी तैयारियां भी शुरू कर दी गई थीं।
16 अप्रैल को है हॉस्पिटल का उद्घाटन
लता मंगेशकर और आशा भोसले के भाई पंडित हृदयनाथ मंगेशकर ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि उनकी कोशिश है कि यह अस्पताल एशिया का सबसे बड़ा हो। हृदयनाथ मंगेशकर ने कहा, 'करीब 25 साल पहले यह फैसला लिया गया था। दीदी (लता मंगेशकर) के गुजरने के बाद हमें लगा कि उनकी सोच से प्रेरित होकर, यह अस्पताल बनाया जाना चाहिए। यह तय हुआ था कि इसका नाम उन्हीं के नाम पर रखा जाएगा और हम उसी के हिसाब से आगे बढ़ने की योजना बना रहे थे। इसका उद्घाटन (मुहूर्त) 16 तारीख को तय था। लेकिन, अचानक, इसी बीच आशा दीदी भी गुजर गईं। इसलिए अब हमने फैसला किया है कि इस अस्पताल का नाम लता मंगेशकर और आशा मंगेशकर दोनों के नाम पर रखा जाएगा'।