मशहूर सिंगर कुमार सानू अभद्र गानों के खिलाफ हैं। हाल ही में उन्होंने इस मामले पर बात की है। एक नए इंटरव्यू में, उन्होंने उन गानों के बारे में बात की जिन्हें उन्होंने 1990 के दशक में अपने करियर के पीक पर गाने के लिए चुना था। उन्होंने कहा कि वह ऐसे गानों से बचते थे जो अच्छे नहीं बल्कि अभद्र थे। हालांकि, कभी-कभी उन्हें 'मूवी माफिया' के दबाव में आना पड़ता था।
कुमार सानू
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मूवी माफिया के दबाव में आए कुमार सानू
जूम के साथ बातचीत में कुमार सानू ने कहा, 'मेरा एक उसूल था कि मैं अपने गानों में अभद्रता नहीं लाऊंगा। मगर एक-दो बार ऐसा हुआ जब मैं इस पर टिक नहीं पाया। इसकी वजह यह थी कि मुझ पर इतना दबाव था कि मुझे लगा कि मुझे उन्हें गाना ही होगा, नहीं तो चीजें ठीक नहीं होंगी।'
कुमार सानू
- फोटो : इंस्टाग्राम@kumarsanuofficial
क्या उसूलों पर कायम रहे सिंगर?
- कुमार सानू के मुताबिक ‘मूवी माफिया’ के प्रेशर के बावजूद, वह अपने उसूलों पर कायम हैं।
- उनके पास एक-दो गाने, जैसे ‘बज गया तबला तबेले में…’, इस कैटेगरी में आते हैं।
- इसके अलावा, उन्होंने हमेशा एकदम अभद्र गानों से परहेज किया है।
- वह आज तक इसी उसूल पर टिके हुए हैं।
- इससे उनका नुकसान तो बहुत हुआ मगर उन्हें कोई दिक्कत नहीं है।
कुमार सानू
- फोटो : इंस्टाग्राम @kumarsanuofficial
कुमार सानू के मशहूर गाने
कुमार सानू को हिंदी फिल्म म्यूजिक में सबसे मशहूर आवाजों में से एक माना जाता है। 1990 के दशक की उनकी हिट फिल्मों में 'मेरा दिल भी कितना पागल है', 'एक लड़की को देखा', 'दो दिल मिल रहे हैं', 'तुम मिले दिल खिले', 'तुझे देखा तो यह जाना सनम', 'आंखों की गुस्ताखियां', 'चुरा के दिल मेरा', 'बाजीगर ओ बाजीगर', 'यह काली-काली आंखें' और 'धीरे-धीरे से मेरी जिंदगी में आना' शामिल हैं।