पंकज त्रिपाठी जैसे कलाकार के साथ पहली बार स्क्रीन साझा करना कैसा रहा?
पंकज त्रिपाठी के साथ ये मेरी पहली फिल्म थी, और कहना होगा- वो जितने अच्छे एक्टर हैं, उतने ही अच्छे इंसान भी हैं। स्क्रिप्ट में जो ह्यूमर था, उसे वो अपने अंदाज से और भी जिंदा कर देते हैं। उनके साथ काम करते हुए कभी कोई बनावटीपन महसूस नहीं होता। ऐसा लगता है जैसे किसी पुराने दोस्त से बात हो रही हो। उनके अभिनय में जो गहराई और सच्चाई है, वो काबिले-तारीफ है।
आपने स्क्रीन पर हमेशा गंभीर और गहराई से भरे किरदार निभाए हैं। क्या कभी टाइपकास्ट महसूस किया?
कई बार लोगों ने कहा कि मैं सीरियस किरदार ही ज्यादा करती हूं और शायद करियर की शुरुआत में ही मैं टाइपकास्ट भी हो गई थी। लेकिन बेटे के जन्म के बाद जैसे किरदार मिले, वो ज्यादा अधूरे और असली थे। अब मैं ऐसी महिलाओं का राेल करना पसंद करती हूं जो गलतियां करती हैं और कमजोर हैं क्योंकि वो असली हैं।