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आर एन काव बायोपिक: स्पाई मास्टर की कहानी पर्दे पर उतारेंगे करण जौहर; रॉ के पहले प्रमुख पर फिल्म का किया एलान

Mon, 21 Sep 2026 11:56 AM IST
ज्योति राघव एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

Movie On Spymaster RN Kao: करण जौहर भारत की खुफिया एजेंसी रॉ के संस्थापक पर फिल्म बनाने जा रहे हैं। उन्होंने इसका आधिकारिक एलान करते हुए रिलीज डेट का भी खुलासा कर दिया है। 
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महान जासूस आरएन काव पर फिल्म बनाएंगे करण जौहर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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21 सितंबर 1968 को भारत की बाहरी खुफिया एजेंसी, रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) की स्थापना की गई थी। आज 'रॉ' के सफर को 58 वर्ष पूरे हो गए हैं। इस खुफिया एजेंसी की स्थापना महान जासूस रामेश्वर नाथ काव (आर एन काव) ने की थी। उन पर फिल्म का एलान किया गया है। यह फिल्म करण जौहर बनाएंगे।

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रॉ के 58 वर्ष पूरे होने पर फिल्म का एलान
करण जौहर ने आज सोमवार को इंस्टाग्राम अकाउंट से पोस्ट साझा करते हुए भारत की बाहरी खुफिया एजेंसी R&AW के संस्थापक रामेश्वर नाथ काव पर आधारित फिल्म का एलान किया है। यह फिल्म साल 2028 में अगस्त में रिलीज होगी। फिल्म का एलान करते हुए करण जौहर ने लिखा है, 'उन्होंने एक ऐसी संस्था बनाई जो पर्दे के पीछे रहकर काम करती थी, लेकिन इतिहास उनके असर को याद रखता है। आज R&AW के 58 साल पूरे हो रहे हैं। हमें आर एन काव की कहानी पर बनी अपनी फिल्म का एलान करते हुए बहुत खुशी हो रही है'। 

इस किताब पर आधारित होगी फिल्म
करण जौहर ने आगे लिखा है, 'काव ने पर्दे के पीछे रहकर काम किया और उस संस्था को दुनिया के सामने लाए जिसे आज हम R&AW (रॉ) के नाम से जानते हैं'। करण जौहर ने बताया कि उनकी यह फिल्म नितिन गोखले की किताब 'जेंटलमैन स्पाईमास्टर' पर आधारित है। यह फिल्म 11 अगस्त, 2028 को बड़े पर्दे पर आएगी।
 
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आर एन काव - फोटो : सोशल मीडिया
आर एन काव के बारे में
भारत के महान जासूस रामेश्वर नाथ काव का जन्म 10 मई, 1918 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी में हुआ था। भारत के आजाद होने के समय काव ने खुफिया एजेंसी की दुनिया में कदम रखा था। 1947 में उनकी इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) में नियुक्ति हुई थी और उनका प्रशिक्षण लीजेंडरी भोला नाथ मुल्लिक की निगरानी में हुआ था। उन्होंने कुछ बहुत से अहम मामलों पर काम किया। इसमें 1950 के मध्य में कश्मीर प्रिंसेस मामले की जांच और 1971 में बांग्लादेश की मुक्ति में योगदान शामिल है।
  • काव भारत के तीन प्रधानमंत्रियों के करीबी सलाहकार और सुरक्षा प्रमुख थे। वे 1962 में चीन के साथ भारत के संघर्ष के बाद स्थापित हुए सुरक्षा महानिदेशालय (डीजीएस) के संस्थापकों में से एक थे। 
  • बाद में वे एविएशन रिसर्च सेंटर (एआरसी) और रॉ के प्रमुख बने। काव एआरसी के पहले प्रमुख थे।
  • काव के पास केवल जासूसी करने का गुण नहीं था। एक किताब के अनुसार वे एक मूर्तिकार भी थे। 
  • उन्होंने रॉ में दो पीढ़ियों को जासूसी के गुण सिखाए। उनकी टीम को काव ब्वॉयज कहा जाता था। 
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