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‘क्रिएटिविटी की जगह नहीं ले सकता एआई’, जावेद अख्तर बोले- सिर्फ डेटा पर आधारित है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस

Sun, 30 Nov 2025 12:10 AM IST
आराध्य त्रिपाठी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

Javed Akhtar On AI: एआई के लगातार बढ़ते प्रभाव के बीच अब जावेद अख्तर ने इस पर अपनी राय दी है। उन्होंने इसे मानव क्रिएटिविटी के लिए किसी भी तरह के खतरे के होने से इंकार किया है। जानिए एआई को लेकर क्या है जावेद अख्तर की राय…
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जावेद अख्तर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। इसको लेकर कई लोग काफी चिंताएं प्रकट कर रहे हैं। हालांकि, दिग्गज गीतकार और स्क्रिप्ट राइटर जावेद अख्तर का मानना है कि एआई नेचुरल क्रिएटिविटी की जगह कभी भी नहीं ले सकता। उनका मानना है कि एआई की अपनी सीमाएं हैं और यह सिर्फ डेटा पर आधारित है।

एआई में नहीं है अपनी कोई बुद्धि

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एक लिट्रेसी फेस्टिवल में बोलते हुए जावेद अख्तर ने कहा कि मैं यह नहीं कह सकता कि भविष्य में क्या होगा। लेकिन अभी के लिए मुझे यकीन है कि एआई किसी भी तरह से इंसान की क्रिएटिविटी की जगह नहीं ले सकता। एआई में कोई दिमाग नहीं है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप इसका उपयोग कैसे करते हैं। परमाणु ऊर्जा का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि इसका उपयोग अच्छे और बुरे दोनों उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है।

नई खोजों से डरते हैं लोग
गीतकार ने आगे कहा कि एआई में संसाधन बुरे नहीं हैं। अगर आप इतिहास में झांकेंगे, तो लोग सभी खोजों से डरते थे। यहां तक कि भाप के इंजन से भी और इसे शैतान का वाहन बताते थे। वर्तमान में एआई की सीमाएं हैं और यह आंकड़ों पर निर्भर है। भविष्य में क्या होगा, यह अभी नहीं कहा जा सकता। भाषा, संस्कृति, पौराणिक कथाओं, कविता और कला को महान संसाधन बताते हुए उन्होंने कहा कि जब भारत को आजादी मिली थी, तब देश एक सुई भी नहीं बना सकता था, लेकिन आज यह दुनिया के सबसे औद्योगिक देशों में से एक बन गया है।

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ओडिशा के राज्यपाल ने जावेद अख्तर को दिया सम्मान
जावेद अख्तर को ओडिशा के राज्यपाल हरि बाबू कंभमपति द्वारा उद्घाटन किए गए साहित्य महोत्सव में सम्मानित किया गया। उन्हें पहला एसओए साहित्य सम्मान प्रदान किया गया। इस पुरस्कार में एक प्रशस्ति पत्र, एक शॉल, देवी सरस्वती की एक रजत प्रतिमा और 7 लाख रुपये का नकद पुरस्कार शामिल है।

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