मानव और संगीत का रिश्ता बहुत पुराना है, शायद तब से जब से हम सभ्यता में बदले या उससे भी पहले। मानव मन को धुनों ने हमेशा से विशेष रूप से प्रभावित किया है। इसलिए संगीत को आज थेरेपी की तरह भी आज उपयोग किया जाता है। फिल्मों और संगीत का नाता बिल्कुल दिल और धड़कन की तरह है। आज बिना संगीत के फिल्म की कल्पना भी कोई नहीं कर सकता। बॉलीवुड की इस दुनिया के हुस्न लाल और भगत राम पहले म्यूजिक डायरेक्टर थे। आज उन्हीं हुस्नलाल की डेथ एनिवर्सरी है। आइए जानते हैं उनके बारे में कुछ बातें…
हुस्नलाल और भगत राम के बारे में
हुस्नलाल और भगत राम दो भाई थे। हुस्न लाल एक प्रसिद्ध वायलिन वादक, भारतीय शास्त्रीय संगीत के गायक और संगीतकार थे, हालांकि गायक के रूप में उन्हें कम ही पहचाना जाता है। वहीं, भगतराम हारमोनियम वादक माना जाता था। हुस्नलाल का जन्म 8 अप्रैल 1920 को पंजाब के जालंधर में हुआ था। दोनों भाइयो ने शास्त्रीय संगीत की शिक्षा पंडित दिलीप चंद्र वेदी से ली थी।
किस फिल्म से मिला पहला ब्रेक
इस संगीतकार जोड़ी को अपना पहला ब्रेक 1944 में आई फिल्म ‘चांद’ से मिला। इस फिल्म का गीत ‘दो दिलों की ये दुनिया’ काफी मशहूर हुई। इस फिल्म में शशिकला, बेगम पारा और प्रेम अदीब मुख्य भूमिकाओं में थे। हालांकि, यह फिल्म फ्लॉप हो गई थी।
इस फिल्म ने दिलाई शोहरत
पहली फिल्म का गाना हिट होने के बाद भी इस जोड़ी को काम मिलने में दिक्कत हो रही थी। फिर साल 1948 में आई फिल्म ‘प्यार की जीत’ के गाने ‘एक दिल के टुकड़े हजार’ ने खूब वाहवाही लूटी। इस गीत का धुन पंडित हुस्नलाल और भगत राम ने ही बनाया था। हालांकि, इससे पहले भी उन्होंने 1947 में आई फिल्म ‘मिर्जा साहिबान’, 1948 में आई ‘आज की रात’ में काम किया।
महात्मा गांधी के गीत के लिए रचा था संगीत
इस जोड़ी ने महात्मा गांधी के लिए मो. रफी के गाए हुए ऐतिहासिक गीत 'सुनो सुनो ऐ दुनिया वालों बापू की यह अमर कहानी' को मिलकर रचा था।