'चुपचाप किया अपनी बारी का इंतजार'
हुमा ने आगे लिखा है, 'बनारस के एक छोटे से शहर का लड़का, वह मुंबई उसी सपने को लेकर आया था, जो हर साल हजारों लोगों को यहां खींच लाता है। फर्क बस इतना था कि जब सफलता रातों-रात नहीं मिली, तो उसने हार नहीं मानी। वह डटा रहा। उसने मेहनत की। उसने सीखा। उसने खुद को बेहतर बनाया। एक दशक से ज्यादा समय से, उसने दूसरे एक्टर्स को उनकी असलियत खोजने में मदद की है। उसने ऐसे कलाकारों को कोचिंग, मेंटरिंग और ट्रेनिंग दी, जो आगे चलकर स्टार बने। वह कैमरे के पीछे, रिहर्सल रूम में और वर्कशॉप में दूसरों को चमकने में मदद करता रहा, जबकि चुपचाप अपने समय का इंतजार करता रहा और यही बात मुझे उसकी सबसे अच्छी लगती है'।
बोलीं- 'यह स्टेज तुम्हारा है सिद्धू'
हुमा कुरैशी ने आगे लिखा है, 'उसने कभी यह विश्वास नहीं छोड़ा कि उसकी बारी भी आएगी। कोई शॉर्टकट नहीं। कोई हक जताने वाली सोच नहीं। बस कड़ी मेहनत, निरंतरता और अपने काम में अटूट विश्वास और अब लाइमलाइट उस पर है। यह रातों-रात मिली सफलता की कहानी नहीं है। यह उन वर्षों की मेहनत का नतीजा है, जब कोई उसे देख भी नहीं रहा था। तो स्वागत है... रचित। तुमने मुश्किल काम तो पहले ही कर लिया है। अब... यह स्टेज तुम्हारा है, सिद्धू।
रचित बोले- 'शुक्रिया हुमी'
रचित सिंह ने हुमा के पोस्ट पर रिएक्शन देते हुए लिखा है, 'हुमी, मुझे सबके सामने लाने के लिए तुम्हारा शुक्रिया। इसे पढ़कर मुझे एहसास हुआ कि, वाह, मैं सच में काफी समय से इस सफर में हूं। मेरी सबसे सच्ची सपोर्टर बनने के लिए शुक्रिया। मुझ पर तब भी भरोसा करने के लिए, जब मैं खुद पर भरोसा नहीं कर पाता था। हुमी, यही तो तुम्हें 'तुम' बनाता है। तुम ऐसी बातें नोटिस करती हो, जो ज्यादातर लोग नहीं देख पाते और उन्हें शब्दों में पिरोने का तुम्हारा अंदाज कमाल का है। मैं सही शब्द ढूंढने में उलझता हूं। न जाने कैसे तुम्हें हमेशा पता होता है कि क्या कहना है। सेट पर और सेट के बाहर, तुमसे बहुत कुछ सीखने को मिलता है। इस सफर को साथ तय करने से मुझमें कई खूबसूरत बदलाव आए हैं, तो उसके लिए शुक्रिया। सलीम सिब्लिंग्स के लिए, बस एक ही बात कहनी है: 'हम हमेशा साथ मिलकर 'डू-डाई-डू' करेंगे'।