टाइपकास्ट होना इंडस्ट्री में हमेशा से संघर्ष रहा
अभिनेत्री ने टाइपकास्ट होने पर भी बात की। उन्होंने कहा कि मुझे अक्सर शहरी किरदारों में बांध दिया जाता है। लोग मुझसे पूछते हैं, 'क्या तुम हिंदी भी बोल सकती हो?' और मैं कहती हूं, बिल्कुल बोल सकती हूं। रूढ़िवादिता से बाहर निकलना हमेशा एक चुनौती होती है। इसलिए जब कोई निर्देशक कुछ अलग तरह से सोचता है तो यह एक तोहफा होता है। टाइपकास्टिंग के खिलाफ संघर्ष एक ऐसा संघर्ष है जिसका सामना ज्यादातर कलाकार करते हैं। आप किसी खास भूमिका में खुद के बारे में सोचने के लिए किसी पर निर्भर होते हैं, और कभी-कभी आपको मनचाहा काम नहीं मिलता।
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अनुराग कश्यप की बंदर का हिस्सा हैं सबा
सबा को आखिरी बार फिल्म ‘सॉन्ग्स ऑफ पैराडाइज’ में देखा गया था। ओटीटी पर रिलीज हुई इस फिल्म में उनके साथ सोनी राजदान भी प्रमुख भूमिका में नजर आई थीं। सबा अनुराग कश्यप की टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में दिखाई जाने वाली फिल्म ‘बंदर’ का भी हिस्सा है।