फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Sweet Girl Review: भारतीय मेडिकल माफिया से जुड़ा नेटफ्लिक्स की फिल्म का कनेक्शन, कहानी में मिला धोखा

विज्ञापन
स्वीट गर्ल - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
विज्ञापन
Movie Review
स्वीट गर्ल
कलाकार
जेसन मोमोआ , रूमी जाफरी , जस्टिन बारथा , एमी ब्रेनेमैन , मैनुअल गार्सिया रुल्फो और इसाबेला मरसेड
लेखक
फिलिप आइजनर , विल स्टैपल्स और ग्रेग हरविट्ज
निर्देशक
ब्रायन एंड्र्यू मेनडोजा
निर्माता
ब्रायन एंड्र्यू मेनडोजा और जेसन मोमोआ
ओटीटी
नेटफ्लिक्स
रेटिंग
2/5

नेटफ्लिक्स ओटीटी का लीडर रहा है। इन दिनों प्राइम वीडियो और डिज्नी प्लस के अलावा एपल टीवी और तमाम दूसरे ओटीटी के साथ बहुकोणीय मुकाबले में फंसा है। सदस्यता शुल्क भी इसका सबसे ज्यादा है लिहाजा इससे उम्मीद रहती है कि ये दूसरों से बेहतर कंटेंट दर्शकों को परोसेगा। ऐसे में जब आप हफ्तों पहले जेसन मोमोआ जैसे किसी सितारे की वीकएंड पर रिलीज होने वाली फिल्म ‘स्वीट गर्ल’ का रिमाइंडर इसके ऐप पर लगाते हैं और फिल्म का कई दिनों तक इंतजार करते हैं तो उम्मीद यही रहती है कि ‘एक्वामैन’ जैसी फिल्म और ‘गेम ऑफ थ्रोन्स’ और ‘बेवॉच’ जैसी सीरीज का सितारा कुछ तो धमाकेदार लेकर आएगा।  जेसन मोमोआ की नई फिल्म ‘स्वीट गर्ल’ तंबू भी बहुत ऊंचा तानती है लेकिन इसका आखिरी से पहले वाला ‘टेंट पोल’ फुस्स निकलता है। मोमोआ के चाहने वाले भारत में भी बहुत हैं और उनको भी इस फिल्म से काफी उम्मीद रही लेकिन मामला जम नहीं पाया। क्यों? आइए इसका पता लगाते हैं।

विज्ञापन

स्वीट गर्ल - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
कोरोना संक्रमण काल में एक चीज जो दुनिया भर के लोगों ने शिद्दत से महसूस की है और वह है इलाज के दौरान होने वाला भारी भरकम खर्च। एक तरफ दवा कंपनियां हैं और दूसरी तरफ अस्पतालों में तड़पते लोग। दवाओं के नाम पर नकली शीशियों में पानी भरकर भारत में भी लोगों ने लाखों करोड़ों कमाए हैं। और, ये सिलसिला पूरी दुनिया में चल रहा है। इलाज सस्ता हो सकता है अगर चंद दवा कंपनियां मुनाफे के लिए षडयंत्र करना बंद कर दें। फिल्म ‘स्वीट गर्ल’ की कहानी भी शुरू में इसी लाइन पर चलती है। कैंसर की एक बेहद अहम दवा ऐन मौके पर बाजार में आने से रोक दी जाती है। नेता वाहवाही लूटते हैं। कंपनी अपनी मजबूरी जताती है। अस्पताल में अपने सामने अपनी पत्नी को दम तोड़ते देखने वाला रे कूपर इसके लिए जिम्मेदार लोगों को अपने हाथों सजा देने का एलान नेशनल टेलीविजन पर फोन कॉल करके देता है। यहां तक भी दर्शक फिल्म को माफ करते चलते हैं।

स्वीट गर्ल - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
लेकिन, फिल्म ‘स्वीट गर्ल’ दर्शकों को ऐन उस वक्त पर धोखा देती है जब वे इस फिल्म में पूरी तरह शामिल हो चुके होते हैं। प्लॉट ट्विस्ट के नाम पर इसके लेखक अच्छी खासी चल रही गाड़ी में पांचवां पहिया फंसाने की कोशिश करते हैं और मामला बेपटरी तो हो ही जाता है, दर्शकों का अब तक फिल्म को देखने में खर्च हुआ समय यूं लगता है कि बेकार चला गया है। हाल के दिनों में तमाम खराब फिल्में देखने को मिली हैं, लेकिन दर्शकों को इस तरह झटका देने की फिल्म ‘स्वीट गर्ल’ की ये एक अलग ही स्तर की कोशिश है। फिल्म की कहानी एक बार लड़खड़ाने के बाद तमाम चेज और एक्शन सीक्वेंस के बाद भी संभल नहीं पाती है। इसाबेला मरसेड पूरा दमखम लगाने के बाद भी फिल्म के क्लाइमेक्स तक दर्शकों की दिलचस्पी बरकरार रख पाने में विफल रहती हैं।

स्वीट गर्ल - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
जेसन मोमोआ की परदे पर शख्सीयत ऐसी है कि उनके किरदार को बॉक्सर या फिर कुछ ऐसे ही लहीम फहीम किरदार में फंसाना होता है। उनकी हल्क जैसी देहयष्टि के हिसाब से फिल्म लिख पाना भी लेखकों के लिए चुनौती ही होती होगी। फिल्म ‘स्वीट गर्ल’ के लेखकों ने फिल्म का मूल विचार सही पकड़ा था। निर्देशक नीरज पांडे जब विजय सेतुपति और माधवन की हिट फिल्म ‘विक्रमवेधा’ का हिंदी रीमेक गोवा में लिख रहे थे तो उनके सामने दिक्कत थी कि इसके हिंदी संस्करण में फिल्म के विलेन का कारोबार क्या रखा जाए। फिल्म की राइटिंग टीम में शामिल मनोज मुंतशिर के जरिये उन्होंने मुझे संपर्क किया तो तीन साल पहले यानी 2 मई 2018 को मैंने जो विचार उन्हें दिया था, वह अब फिल्म ‘विक्रमवेधा’ के हिंदी संस्करण में है कि नहीं, ये तो पता नहीं लेकिन फिल्म ‘स्वीट गर्ल’ में उसकी झलक दिख गई है।
विज्ञापन

स्वीट गर्ल - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

फिल्म ‘स्वीट गर्ल’ को देखने का अधिकतर दर्शकों का मूल मकसद जैसन मोमोआ ही रहे। फिल्म में उनका अभिनय भी अच्छा है और भावनात्मक दृश्यों में भी उन्होंने मेहनत की है। लेकिन, फिल्म के क्लाइमेक्स से ठीक पहले उनका फिल्म की कहानी का बैटन अपनी बेटी का किरदार कर रही इसाबेला को थमा देना फिल्म की सबसे कमजोर कड़ी बन गया। इसाबेला फिल्म दर फिल्म बतौर अभिनेत्री अपना विकास अच्छा कर रही हैं। लेकिन, फिल्म ‘स्वीट गर्ल’ का पटाक्षेप करने के लिए जिस तरह के किरदार की जरूरत थी, वह उन पर फिट नहीं बैठ पाया। मैनुअल गार्सिया रुल्फो, एमी ब्रेनेमैन, जस्टिन बारथा और रूमी जाफरी ने भी अपने अपने किरदार ठीक ठाक से निभा दिए हैं। रूमी जाफरी को गोवा के भ्रष्ट कारोबारी विनोद शाह के रूप में दिखाकर फिल्म बनाने वालों ने मेडिकल माफिया के तार इस फिल्म में भारत से भी जोड़ दिए हैं। फिल्म की सिनेमैटोग्राफी, बैकग्राउंड म्यूजिक, एडीटिंग सब बढ़िया है लेकिन इसकी चाल इसकी कहानी ने लंगड़ी कर दी।


और पढ़ें...
विज्ञापन
MORE
AU ऐप में पढ़ें