नेटफ्लिक्स ओटीटी का लीडर रहा है। इन दिनों प्राइम वीडियो और डिज्नी प्लस के अलावा एपल टीवी और तमाम दूसरे ओटीटी के साथ बहुकोणीय मुकाबले में फंसा है। सदस्यता शुल्क भी इसका सबसे ज्यादा है लिहाजा इससे उम्मीद रहती है कि ये दूसरों से बेहतर कंटेंट दर्शकों को परोसेगा। ऐसे में जब आप हफ्तों पहले जेसन मोमोआ जैसे किसी सितारे की वीकएंड पर रिलीज होने वाली फिल्म ‘स्वीट गर्ल’ का रिमाइंडर इसके ऐप पर लगाते हैं और फिल्म का कई दिनों तक इंतजार करते हैं तो उम्मीद यही रहती है कि ‘एक्वामैन’ जैसी फिल्म और ‘गेम ऑफ थ्रोन्स’ और ‘बेवॉच’ जैसी सीरीज का सितारा कुछ तो धमाकेदार लेकर आएगा। जेसन मोमोआ की नई फिल्म ‘स्वीट गर्ल’ तंबू भी बहुत ऊंचा तानती है लेकिन इसका आखिरी से पहले वाला ‘टेंट पोल’ फुस्स निकलता है। मोमोआ के चाहने वाले भारत में भी बहुत हैं और उनको भी इस फिल्म से काफी उम्मीद रही लेकिन मामला जम नहीं पाया। क्यों? आइए इसका पता लगाते हैं।
फिल्म ‘स्वीट गर्ल’ को देखने का अधिकतर दर्शकों का मूल मकसद जैसन मोमोआ ही रहे। फिल्म में उनका अभिनय भी अच्छा है और भावनात्मक दृश्यों में भी उन्होंने मेहनत की है। लेकिन, फिल्म के क्लाइमेक्स से ठीक पहले उनका फिल्म की कहानी का बैटन अपनी बेटी का किरदार कर रही इसाबेला को थमा देना फिल्म की सबसे कमजोर कड़ी बन गया। इसाबेला फिल्म दर फिल्म बतौर अभिनेत्री अपना विकास अच्छा कर रही हैं। लेकिन, फिल्म ‘स्वीट गर्ल’ का पटाक्षेप करने के लिए जिस तरह के किरदार की जरूरत थी, वह उन पर फिट नहीं बैठ पाया। मैनुअल गार्सिया रुल्फो, एमी ब्रेनेमैन, जस्टिन बारथा और रूमी जाफरी ने भी अपने अपने किरदार ठीक ठाक से निभा दिए हैं। रूमी जाफरी को गोवा के भ्रष्ट कारोबारी विनोद शाह के रूप में दिखाकर फिल्म बनाने वालों ने मेडिकल माफिया के तार इस फिल्म में भारत से भी जोड़ दिए हैं। फिल्म की सिनेमैटोग्राफी, बैकग्राउंड म्यूजिक, एडीटिंग सब बढ़िया है लेकिन इसकी चाल इसकी कहानी ने लंगड़ी कर दी।