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यूएस प्रेसिडेंट, सिंगर, बेसबॉल प्लेयर, से जुड़ा था मुनरो का नाम, जानें कई और राज

Wed, 08 Jun 2016 04:00 PM IST
लूसी बोल्टन/ बीबीसी
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- फोटो : getty
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मर्लिन मुनरो हॉलीवुड की सदाबहार खूबसूरत अभिनेत्री मानी जाती हैं। उनकी खूबसूरती, उनका ग्लैमर, उनके इश्क के किस्से और फिर अचानक हुई मौत, सारी बातें लीजेंड बन गई हैं। इसकी वजह शायद ये है कि उनकी जिंदगी के जितने राज सामने आए, उनसे ज्यादा पर्दे के पीछे छुपे रहे। उनकी खूबसूरती सदाबहार इसलिए भी हो गई कि वो कैमरे के सामने हमेशा जवान ही रहीं। उनकी मौत भी बहुत जल्दी हो गई थी।
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मुनरो के दौर की बाकी अभिनेत्रियों, एलिजाबेथ टेलर, डेबी रेनॉल्ड्स और जेन रसेल की तरह वो कभी बुजुर्ग नहीं हुईं। इसीलिए उनकी खूबसूरती एक पैमाना बन गई। उनके भूरे बाल, अलसाई आंखें और दिलकश मुस्कान उनके किरदार को बाकी सबसे अलग करती थी। वो बेफिक्र दिखकर भी लुभावनी लगती थीं। हालांकि वो असल में कितनी बेफिक्र थीं, इस पर आज भी उनकी फिल्मों से ज्यादा बहस होती है।
मर्लिन मुनरो की चकाचौंध भरी जिंदगी का काला धब्बा उनकी रहस्यमयी मौत है।

किसी चीज की ज्यादती और लत से इंसान का क्या हाल होता है, मुनरो की जिंदगी और मौत इसकी मिसाल है। उन लोगों के लिए ये चेतावनी भी है जो चकाचौंध भरी जिंदगी जीना चाहते हैं। हमेशा शैम्पेन की बोतलें खोलते हुए अपनी सेक्सी इमेज बनाना चाहते हैं। जो लोग ये चाहते हैं कि बडे और मशहूर लोगों से इश्क के उनके किस्से मशहूर हों, उन्हें मुनरो की जिंदगी से सबक लेना चाहिए। मुनरो का नाम अमरीकी राष्ट्रपति जॉन कैनेडी से लेकर गायक फ्रैंक सिनात्रा और बेसबाल खिलाडी जो डिमैगियो तक से जुडा। मुनरो ने कई शादियां भी कीं जो नाकाम रहीं।
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मुनरो के लिखे इन दस्तावेजों को, 'फ्रैगमेंट्स: पोएम्स, इंटिमेट नोट्स, लैटर्स बाय मर्लिन मुनरो' के नाम से छापा गया था

- फोटो : M GARRETTMURRAY GARRETTGETTY IMAGES
उनकी जीवनी लिखने वालों ने मर्लिन की तमाम लतों और दिमागी बीमारी के बारे में काफी लिखा है। उनके अभाव वाले बचपन के किस्से, अनाथालय में पलने की बात, सब कुछ किताबों में दर्ज है। फिर जवानी में तमाम मर्दों से उनके रिश्ते, शोषण के किस्से और प्यार के लिए तरसती मुनरो की संदिग्ध मौत की बातें भी जगजाहिर हैं। लेकिन, मौत के इतने वर्ष बाद मर्लिन मुनरो की जिंदगी के कुछ नए पहलू सामने आए हैं।

असल में वर्ष 2010 में उनके निजी कागजात छपे थे जिन्होंने उनके किरदार को और ऊंचे पायदान पर पहुंचा दिया। इन दस्तावेजों में मुनरो के अपने हाथ से लिखे खत, कविताएं और रोजाना के किस्से शामिल हैं। मुनरो के लिखे इन दस्तावेजों को, 'फ्रैगमेंट्स: पोएम्स, इंटिमेट नोट्स, लैटर्स बाय मर्लिन मुनरो' के नाम से छापा गया था। इसका संपादन स्टैनले बुचथाल और बर्नार्ड कॉमेंट ने किया। मुनरो की लेखनी से निकले इन शब्दों को पढने से उनके बारे में आपके ख्याल बदलने तय हैं।

ग्लैमर की चकाचौंध भरी जिंदगी से अलग, मर्लिन मुनरो, बेहद समझदार, जहीन इंसान थीं। उन्होंने एक कवि की तरह अपने दिल का हाल बयां किया है। जैसे कि वो और भी बहुत कुछ लिखना चाहती थीं। अपने मूड को बयां करने के लिए उन्होंने बहुत अच्छे शब्दों का चयन किया है। ये उनके किरदार पर भी नई रोशनी डालने वाला है। मुनरो के दस्तावेज का संपादन करने वाले कहते हैं कि ये एक बहुत बडा खजाना है। इन कागजात में कोई गलीज, घटिया बात नहीं। इसमें कोई अफवाह नहीं, कोई गप्प नहीं। मर्लिन मुनरो ऐसे तरीकों में यकीन नहीं करती थीं।

'मैं कभी-कभी इंसानों का साथ बर्दाश्त नहीं कर पाती : मुनरो

- फोटो : getty
उनकी कलम से निकले ये लफ्ज, लोगों से उनकी नजदीकी, उनकी आत्मा की गहराई में छुपे एहसास बयां करते हैं। इन दस्तावेजों से मुनरो के रहस्य खत्म नहीं होते। बल्कि उनका दायरा बढ जाता है। वो हॉलीवुड की ऐसी सुपरस्टार थीं, जिन तक लोग खिंचे चले जाते थे। मगर करीब पहुंचना बहुत कम लोगों के लिए मुमकिन था। मर्लिन मुनरो ने 40 के दशक में जेम्स डोहर्टी से अपनी शादी के बारे में काफी कुछ लिखा है। उन्होंने लिखा है, ''ये सारे ख्याल बयां करते हुए, ये लफ्ज लिखते-लिखते मेरे हाथ कांप रहे हैं। मगर मैं रुकूंगी नहीं, तब तक लिखती रहूंगी जब तक मेरे दिल के सारे एहसास बयां नहीं हो जाते''।

इससे साफ है कि किस तरह मुनरो लिखकर अपने दिल को तसल्ली देती थीं। खुद को खुश रखती थीं। मुनरो ने अपने लेखन में काफी ईमानदारी बरती है क्योंकि हॉलीवुड के ग्लैमर की दुनिया में वो खुलकर अपनी बात नहीं कह सकती थीं। इसके लिए उन्होंने कलम और कागज का सहारा लिया। अपनी नोटबुक में एक जगह मुनरो ने लिखा है, ''मैं कभी-कभी इंसानों का साथ बर्दाश्त नहीं कर पाती। मुझे पता है कि उनकी अपनी दिक्कतें हैं, ठीक उसी तरह जैसे कि मेरी अपनी परेशानियां।

फिर भी मैं उनकी बातें सुन-सुनकर थक गई हूं। उनकी परेशानियां समझने, उन्हें हौसला और मदद दे-देकर मैं थक गई हूं।'' साल 1955 की अपनी मशहूर रिकॉर्ड बुक में मर्लिन मुनरो लिखती हैं, ''मेरी पहली ख्वाहिश हीरोइन बनना थी, बिना इस बारे में शर्मिंदा हुए मैं ये काम करना चाहती थी। मैं इसके लिए तकलीफ बर्दाश्त करने को भी तैयार हूं''। वो एक जगह ये भी लिखती हैं कि उन्हें पता है कि वो कहां से आती हैं। उन्हें हवा में उडने की कल्पना करते हुए ये पता है कि जमीन पर उनके पांव कहां पर थे।

''मैं हमेशा किसी की बीवी होने से डरती रही हूं''

- फोटो : L.J.WILLINGER GETTY ARCHIVE
अमेरिका के मशहूर वाल्डॉर्फ एस्टोरिया होटल के एक कागज पर भी मर्लिन मुनरो ने अपने दिल का हाल लिखा। उन्होंने कहा कि उन्हें बार-बार वादा करके खुद को बांधना नहीं चाहिए। वो खुद को समझाती हैं कि उनके पास किसी चीज की कमी नहीं। उन्होंने ये भी कहा कि एक्टिंग के लिए जरूरी अनुशासन और तकनीक की कमी है, जो उन्हें सीखने की जरूरत है। वो डर से मुकाबला करना, उस पर जीत हासिल करना चाहती थीं। मगर डर उनकी जिंदगी के हर पहलू का हिस्सा बन गया। ऐसा उनकी आर्थर मिलर से शादी में भी हुआ।

जब वो इंग्लैंड में 'द प्रिंस ऐंड द शो गर्ल' नाम की फिल्म की शूटिंग कर रही थीं तो उन्हें मिलर का लिखा एक नोट मिला। मिलर ने उन्हें बताया था कि ये उनकी फिल्म के एक किरदार के बारे में है। मिलर ने इस नोट में लिखा था कि वो शादी से निराश हैं। उन्हें अपनी जीवनसाथी की वजह से कई बार शर्मिंदा होना पडता है। मुनरो ने जब ये जाना कि ये तो मिलर ने उनके बारे में लिखा है तो उनका दिल टूट गया। फिर इस बारे में उन्होंने जो खुद लिखा वो उनके एहसास को बखूबी बयां करता है। 

मुनरो ने लिखा, ''मैं हमेशा किसी की बीवी होने से डरती रही हूं। क्योंकि मुझे पता है कि कोई किसी और को प्यार नहीं कर सकता। तो कल से मैं अपना ख्याल खुद रखना शुरू करूंगी क्योंकि यही मेरी पूंजी है। पहले भी ऐसा था और आज भी ऐसा ही है''। मुनरो के दस्तावेजों से साफ है कि वो हमेशा खुद को हकीकत की याद दिलाती रहती थीं। अपनी मददगार खुद बनना चाहती थीं और अपने दिल के भीतर छुपे डर पर जीत हासिल करना चाहती थी। ये उनके मजबूत इरादों की झलक दिखाता है। पार्टी की तैयारी हो या फिल्म में एक्टिंग की तैयारी, मुनरो की कोशिश हमेशा बेहतर से बेहतर करने की रही।
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हिसाब-किताब में कमजोर थीं मुनरो

- फोटो : getty
जिन लोगों को मर्लिन मुनरो की निजी जिंदगी में दिलचस्पी है, उनके लिए इस किताब में काफी कुछ है। उनकी अपनी निजी कैबिनेट में रखी चीजों का जिक्र है। इसमें बिल थे, रसीदें थीं, खत थे, फिल्मों के कॉन्ट्रैक्ट थे और कारोबारी दस्तावेज भी थे। इनसे भी मुनरो के बारे में तमाम धारणाएं टूटती हैं। जैसे कि लोग मानते हैं कि वो पैसों के हिसाब-किताब में कमजोर थीं। मगर उनके दस्तावेज कुछ और ही कहानी कहते हैं।

इन दस्तावेजों से ये भी पता चलता है कि मर्लिन मुनरो को खाना बनाना बहुत पसंद था। उनकी निजी जिंदगी के तमाम किस्से बयां करती इस किताब के बाजार में आने से सोशल मीडिया में मुनरो की खूब चर्चा हो रही है। पिंटरेस्ट, इंस्टाग्राम और फेसबुक पेज पर उनके किस्से लिखे जा रहे हैं। इन्हें पढते वक्त ये ध्यान रखना चाहिए के मुनरो के लिखे खत या नोट्स, छपने के लिए नहीं लिखे गए थे। वो एक औरत के दिल के एहसास हैं, जिसे वो बयां करना चाहती थीं। ये खुदकलामी करके वो अपने आपको तसल्ली देती थीं। उन्होंने अपनी बातें लिखने में पूरी ईमानदारी बरती है। वो क्या महसूस करती थीं और क्या चाहती थीं, ये बताने में उन्होंने कोई गुरेज नहीं किया है।

इन कागजात से साफ है कि वो सोचने-विचारने वाली महिला थीं। वो पढती-लिखती भी खूब थीं। सबसे अहम बात ये है कि ये दस्तावेज मर्लिन मुनरो को आवाज देते हैं। जिसमें किसी का दखल नहीं। जहां वो खुलकर अपने एहसास बयां करती हैं। ये उनकी ग्लैमरस हीरोइन की इमेज के ठीक उलट है। इन्हें पढकर पता चलता है कि वो खूबसूरत लडकी जब कैमरे के सामने नहीं होती थी, तो दुनिया से दूर अपने घर पर वो क्या कर रही होती थी, क्या सोच रही होती थी। कुल मिलाकर, ये खत, ये नोट, मर्लिन मुनरो के लीजेंड होने में एक और पहलू जोडते हैं।
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