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ऑस्कर अवार्ड की तैयारियों का पूरा लेखा-जोखा

Mon, 07 Mar 2016 06:29 AM IST
बीबीसी हिन्दी/अमर उजाला, पार्टनर

सार

  • हर साल करोड़ों डॉलर लग जाते हैं ऑस्कर की तैयारी में।
  • क्या अखबारों में छपवाए जाते हैं बड़े बड़े विज्ञापन।
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- फोटो : getty images
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विस्तार
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ऑस्कर पुरस्कारों की दौड़ में शामिल फिल्में बनाने वाले स्टूडियो प्रचार पर हर साल लाखों डॉलर खर्च करते हैं। पुरस्कारों के लिए वोट डालने वाले तकरीबन 6,000 लोगों को लुभाने के लिए काफी पैसा खर्च किया जाता है। पर क्या इससे काम बनता भी है? आपने उस अभिनेत्री के बारे में सुना है, जिसने ऑस्कर मतदाताओं से अपने प्रदर्शन पर विचार करने के लिए पूरे एक पेज का विज्ञापन अखबारों में छपवाया?
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या आपको उस फिल्म प्रोड्यूसर के बारे में पता है, जिस पर अपने विरोधी की सुपरहिट फिल्म के खिलाफ प्रचार करने की वजह से प्रतिबंध लगा दिया गया था? एकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर्स आर्ट्स एंड साइंसेज के 6,000 मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश करने के ये सिर्फ दो उदाहरण हैं।

एक अनुमान के मुताबिक, ऑस्कर पुरस्कारों के लिए होने वाले प्रचार पर हर साल लगभग 10 करोड डॉलर से 50 करोड डॉलर खर्च किया जाता है। ये आंकडे फिल्म प्रोड्यूसरों ने नहीं दिए हैं। प्रोड्यूसर और ब्लॉगर स्टीफन फॉलोज ने फिल्म उद्योग के अपने सहयोगियों से मिले आंकडों के आधार पर यह अनुमान लगाया है।
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उन्होंने अनुमान लगाया है कि सबसे अच्छी फिल्म का पुरस्कार पाने वाली फिल्म के लिए प्रचार अभियान पर तकरीबन एक करोड डॉलर खर्च किया गया। यह पैसा विज्ञापन, मीडिया और प्रचार पर खर्च किया गया। ऑस्कर के समय स्टूडियो फिल्म उद्योग की पत्रिकाओं में विज्ञापन देते हैं और फिल्म की खूबियों और उसके कलाकारों के प्रदर्शन के बारे में लोगों को बहुत ही सलीके से बताते हैं।

कई तरह के उपहार दिए जाते हैं

- फोटो : getty images
हॉलीवुड के रिपोर्टर गेल मर्फी ने बीबीसी से कहा, 'ये लोग बहुत ही ज्यादा पैसा पाने वाले पब्लिसिस्ट हैं। वे एकेडेमी के सदस्यों को जानते हैं और यह भी जानते हैं कि उन तक कैसे पंहुचा जाए और उन्हें क्या पसंद है।' सीधे सीधे घूस देना मना है। पर मतदाताओं के पास उपहारों और छोटी-मोटी चीजों की बाढ आ जाती है।

एक मतदाता ने हॉलीवुड रिपोर्टर से 2013 में कहा था, 'मुझे पुस्तकें, खाने-पकाने से जुडी किताबें समेत कई तरह के छोटे मोटे उपहार दिए गए। यह हास्यास्पद है।'

एकेडमी ने साल 2011 में नियम बना कर सीधे लॉबी करने या ई-मेल और टेलीफोन के जरिए अपनी बात कहने पर रोक लगा दी थी। नामांकनों की घोषणा होने के बाद स्टूडियो, फिल्म की स्क्रीनिंग करने के लिए रिसेप्शन नहीं रख सकते न ही मुफ्त के खाने पीने की व्यवस्था कर सकते हैं।

साल 2010 में 'हर्ट लॉकर' फिल्म के प्रोड्यूसर निकोलस कार्टियर पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। उन्होंने मतदाताओं को ई-मेल भेज कर कहा था कि वे उनकी फिल्म का समर्थन करें, न कि '50 करोड डॉलर की फिल्म' का। साफ तौर पर उनका इशारा 'अवतार' की तरफ था।

आखिरकार 'हर्ट लॉकर' उस साल विजेता घोषित हुई थी, पर कार्टियर को ट्रॉफी एक महीने बाद इस विवाद के थमने पर ही मिली थी।
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- फोटो : getty images
माना जाता है कि पुरस्कारों के मौसम में अखबारों में छपने वाली नकारात्मक खबरों के पीछे ये ऑस्कर के लिए लॉबिंग करने वाले भी कुछ हद तक जिम्मेदार होते हैं। 'स्लमडॉग मिलिनेयर' पर बाल कलाकारों से बहुत ही कम पैसे में काम कराने और 'जीरो डार्क थर्टी' पर प्रताडना को जायज ठहराने के आरोप लगे थे।

डाटा विश्लेषक केविन स्वीनी ने इस पूरे मामले पर अध्ययन किया है। उनका कहना है कि ऑस्कर पुरस्कार जीतने के बाद किसी फिल्म को 30 लाख डॉलर की अतिरिक्त कमाई होती है। पर गोल्डन ग्लोब पुरस्कार जीतने वाली फिल्म बॉक्स ऑफिस पर 1।42 करोड डॉलर अतिरिक्त कमा लेती है।

इसकी वजह यह है कि ऑस्कर पुरस्कारों की घोषणा काफी देर से होती है और तब तक फिल्में रिलीज हो चुकी होती हैं। साल 2014 में किए गए एक दूसरे अध्ययन से पता चला है कि एकेडमी पुरस्कार जीतने वाले अभिनेता की कमाई 39 लाख डॉलर बढ जाती है। पर अभिनेत्री की फीस सिर्फ 5 लाख डॉलर बढती है।

केविन स्वीनी इसकी वजह फिल्म उद्योग में मौजूद लिंग भेद को मानते हैं। पर पैसे के अलावा दूसरी चीजें भी हैं। हॉलीवुड की अंदरूनी राजनीति और आपके समकालीन कलाकार भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

एडमंड हेल्मर के मुताबिक, गोल्डन या ऑस्कर पुरस्कार 'सिर्फ टिकट बेचने की बात नहीं है।' वे कहते हैं, 'पुरस्कार जीतने वालों को बडे मौके मिलते हैं जिससे उन्हें बहुत बडा आत्मसंतोष मिलता है, जिसे मापा नहीं जा सकता।'
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