ऐसा कम ही होता है कि हॉलीवुड की फिल्म में हिंदी या उर्दू में संवाद देखने को मिलें। पर इस बार ऐसा ही हुआ है।
ऐसा कम ही होता है कि हॉलीवुड की फिल्म में हिंदी या उर्दू में संवाद देखने को मिलें। लेकिन निर्देशक पीटर बर्ग की फिल्म ‘लोन सर्वाइवर’ में यह अनोखी बात देखने को मिलेगी। असल में इस फिल्म की कहानी इन संवादों की मांग करती है।
‘लोन सर्वाइवर’ अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर चल रहे युद्ध की कहानी है। जिसमें अफगानिस्तान में अमेरिकी मिशन की नाकामयाबी के बाद मात्र एक सैनिक बचता है। जो बुरी तरह से घायल है। मार्कस लटरेल ने इस सैनिक का रोल निभाया है।
बर्ग के अनुसार, ‘जहां तक संभव था हम चीजों और घटनाओं को सहज रखना चाहते थे। ऐसे में स्वाभाविक था कि स्थानीय भाषाओं का प्रयोग करते। यह ऐसा इलाका है जहां पर अफगानी जनजातियां और पाकिस्तानी शरणार्थी रहते हैं।
ऐसे में उन लोगों के बीच उर्दू और हिंदी में ही बातचीत संभव है।’ फिल्म में मार्कस को एक अफगानी जनजाति के द्वारा बचाते हुए दिखाया गया है। लेकिन साथ ही अफगानियों और अमेरिकियों के जटिल संबंधों तथा पाकिस्तान द्वारा की जाने वाली राजनीति पर भी बात की गई है।