कलाकार: क्रिस हेम्सवर्थ, टेसा थॉम्प्सन, लियाम नीसन आदि
निर्देशक: एफ गैरी ग्रे
बैनर: सोनी पिक्चर्स एंटरटेनमेंट
हॉलीवुड की एवेंजर्स सीरीज की फिल्मों के भारतीय भाषाओं के संस्करणों ने जिस तरह की रिकॉर्डतोड़ कमाई भारत में की है, उससे अब हर हॉलीवुड प्रोडक्शन को लगने लगा है कि भारत में डब फिल्मों का बाजार बहुत बड़ा है। वाकई ये बाजार बड़ा है भी। लेकिन, इस बाजार के उपभोक्ता सिनेमा समझते हैं और सितारे हों या न हों, अब कहानी पर बहुत ध्यान देते हैं। एवेंजर्स सीरीज की फिल्मों की कामयाबी इनकी कहानियों में, इनके भावुक दृश्यों और इनकी भारत से मिलती जुलती संवेदनाओं में है। मेन इन ब्लैक सीरीज की नवीनतम फिल्म में ये तीनों प्रमुख चीजें गायब हैं और इसीलिए ये सीधी सपाट फिल्म बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिरने जा रही है।
1997 में शुरू हुई मेन इन ब्लैक सीरीज की मेन इन ब्लैक इंटरनेशनल चौथी फिल्म है। अब तक की तीनों फिल्मों के लीड कलाकारों विल स्मिथ और टॉमी ली जोन्स ने भारत में भी अपना अच्छा फैन बेस तैयार किया है। दोनों की कमी इस फिल्म में शिद्दत से महसूस होती है। हॉलीवुड में इन दिनों तकरीबन सारे स्टूडियोज अपनी पुरानी फ्रेंचाइजी या पुरानी हिट फिल्मों के नए संस्करण बना रहे हैं। डिजनी ने अलादीन का जिन फिर से चमकाया। लॉयन किंग भी लाइन में है। सोनी ने मेन इन ब्लैक को थोड़ा समसामयिक बनाने की कोशिश इस फिल्म से की है।
फिल्म मेन इन ब्लैक इंटरनेशनल की काहनी शुरू होती मौली के घर से। एलियन का मौली के घर पर हमला होता है। एमआई एजेंट उसके माता पिता की याददाश्त मिटा देते हैं ताकि उन्हें इसके बारे में कुछ याद न रहे। मौली का अब एक ही मिशन है किसी तरह एमआईबी में दाखिल होना। वह इसमें कामयाब भी होती है। एजेंट ओ बन चुकी मौली अब एजेंट एच के साथ काम करना चाहती है जिसे अकेले ही अपने मिशन पर जाने की आदत है। किसी तरह दोनों की जोड़ी बनती है और वह तमाम नई नई और आकर्षक लोकेशंस पर एलियंस से भिड़ते दिखते हैं।
फिल्म की सबसे कमजोर कड़ी इसकी कहानी है। दूसरे नंबर पर जो दिक्कत फिल्म के लिए घातक रही वह है थोर रैग्नारॉक की इस सुपरहिट जोड़ी के बीच किसी तरह की केमिस्ट्री का न बन पाना। फिल्म के निर्देशक गैरी एलियंस की नई नई प्रजातियां स्पेशल इफेक्ट्स के जरिए विकसित करने में इतने खो गए कि उन्हें शायद ध्यान भी नहीं रहा कि उनकी फिल्म के लीड कलाकार दो इंसान भी हैं।
निर्देशक गैरी ग्रे को युवाओं में लोकप्रिय दो बेहतरीन कलाकार भी मिले लेकिन वह फिल्म में न मानवीय संवेदनाओं जगा पाए और न ही दोनों के बीच किसी तरह का भावुक रिश्ता ही विकसित कर सके। पूरी फिल्म एक ऐसे घुमाव में घूमती रहती है, जहां आने वाले हर मोड़ का अंदाजा दर्शकों को पहले से हो जाता है। अदाकारी के मामले में क्रिस और टेसा दोनों ने काफी मेहनत की है फिल्म को बचाने की लेकिन, निर्देशक का ध्यान अपनी लोकेशंस से दर्शकों को चौंकाने पर ज्यादा दिखा। यहां तक कि लियाम नीसन जैसे कलाकार के संवाद भी बेतुके लगते हैं। एमआईबी के प्रशंसकों को इस फिल्म से निराशा ही हाथ लगती है। अमर उजाला के वीकली मूवी रिव्यू में इस फिल्म को मिलते हैं दो स्टार।