रेटिंग- *1/2 (डेढ़ स्टार)
कौन कहता है कि सिर्फ बॉलीवुड में ही लंबे चौड़े बजट के साथ खराब फिल्में बनती हैं, हॉलीवुड भी ऐसा कर सकता है और इसका जीवंत उदाहरण है फैंटास्टिक 4। यह फिल्म इतनी खराब बन पड़ी है कि फिल्म के निर्देशक जोश ट्रैंक ने फिल्म की रिलीज से पहले ही इससे पल्ला झाड़ लिया था।
निर्देशक का आरोप है कि फ़िल्म की निर्माता कंपनी '20 सेंचुरी फॉक्स' ने उनके काम में दखलअंदाज़ी की है और वे फाइनल प्रोडक्ट से खुश नहीं है। यकीन मानिए जब आप यह फिल्म देखेंगे तो आप भी निराश ही होंगे। मार्वल फिल्मों के शौकीन ये जानते हैं कि 'फैंटास्टिक 4' भी उसी मार्वल यूनिवर्स का हिस्सा है। जिसमें कैप्टन अमेरिका, आईरन मैन और एक्स मैन जैसे सुपरहिट हीरो आते हैं।
लेकिन मार्वल फ़िल्म के धोखे में आकर आप इसे मार्वल की 'एवेंजर्स' जैसी फिल्म न समझें। साल 1986 में इस फिल्म के राइट्स मार्वल से ले लिए गए थे और उसके बाद साल 2005 और 2007 में आई फिल्मों ने हालांकि अपनी लागत वसूली लेकिन लोगों ने उन्हें पसंद नहीं किया।
पुरानी फिल्मों से भी खराब है ये फिल्म
साल 2015 में निर्माता कंपनी ने इस फ़िल्म को एक नए सिरे से और एक नई कहानी के साथ शुरू करने की कोशिश की लेकिन यह फिल्म पुरानी फिल्मों से भी खराब बन पड़ी है। दर्शक फिल्म में 'फैंटास्टिक 4' यानी मिस्टर फैंटास्टिक, इनविजिबल वूमैन, ह्यूमन टॉर्च और थिंग के एक्शन सीन और कारनामे देखने जाते हैं। लेकिन अफसोस फिल्म में एक्शन दृश्य सिर्फ नाममात्र के हैं।
किसी धारावाहिक सी लगती इस फ़िल्म की बोरियत में तड़का लगाते हैं फिल्म की सुस्त गति, बोझिल संवाद और खराब ग्राफिक। अगर फिल्म की इतनी 'तारीफ' सुनने के बाद भी आप इस फिल्म की कहानी जानने के इच्छुक हैं तो लीजिए।
ये है फिल्म 'फैंटास्टिक 4' की कहानी
एक तेज दिमाग युवक रीड रिचर्डस अपने साथी बेन के साथ मिलकर एक ऐसा यंत्र बनाता है जिसकी सहायता से किसी दूसरे ब्रह्मांड में मौजूद ग्रह पर पहुंचा जा सकता है। एक वैज्ञानिक उसके इस यंत्र की क्षमता को पहचान कर चार और तेज दिमाग बच्चों के साथ मिलकर इस यंत्र का बड़ा प्रारूप तय करता है और फिर इस यंत्र से बच्चे पहुंच जाते हैं दूसरे ग्रह पर।
ग्रह पर हुए एक हादसे से चार युवाओं को मिलती हैं कमाल की शक्तियां जिनसे वो कोई खास कमाल नहीं दिखाते और एलियन ग्रह पर पीछे रह गए एक वैज्ञानिक को मिलती है नकारात्मक शक्ति जो जाहिर तौर पर इन 4 युवाओं से भिड़ता है।
किसी हिंदी फिल्म की तरह सिर्फ पांच मिनट में विलेन मारा जाता है, असत्य पर सत्य की जीत होती है और फिल्म खत्म, हां दर्शक खुद को ठगा सा महसूस करते हैं पर इससे फैंटास्टिक 4 को क्या?