कैंसर की महंगी दवाइयों से राहत के लिए चीन कई तरह के क़दम भी उठा रहा है। फ़िल्म रिलीज़ होने के बाद चीन ने 9 जुलाई को कहा था कि उसका भारत के साथ दवाइयों और ख़ासकर कैंसर रोधी दवाइयों के आयात को लेकर समझौता हुआ है। इससे पहले मई में कुछ कैंसर रोधी दवाइयों के आयात पर टैरिफ़ भी हटाया गया था।
इसके अलावा कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन विदेशी फार्मा कंपनियों के साथ भी दवाइयों की क़ीमत कम करने को लेकर बातचीत करने वाला है। हाल के सालों में, चीन ने देश में निर्मित जेनरिक दवाओं के ज़्यादा सुरक्षित और सस्ता बनाने को मंजूरी देने में तेजी ला रहा है।
साइंस और टेक्नोलॉजी की सरकारी अख़बार ने कहा है कि कुछ मरीजों को जेनरिक दवाओं को लेकर चिंताएं हैं और चीन की घरेलू दवा बनाने वाली कंपनियां कम मुनाफ़े के चलते इन दवाइयों को बनाने से बचती भी हैं। अख़बार लिखता है कि एक और समस्या ये है कि जिन अस्पतालों के पास फंड की कमी है वो अपनी लागत पूरी करने के लिए दवाओं को महंगे दामों पर बेचते हैं।
'ग्लोबल टाइम्स' अख़बार के मुताबिक चीन में मिलने वाली भारतीय दवाओं में ज़्यादातर कैंसर रोधी दवाइयां हैं। ये दवाइयां ज़्यादा असरदार होने के कारण चीन की स्वेदश निर्मित दवाइयों से अधिक प्रचलित हैं। अख़बार में ये भी लिखा है कि यहां तक कि चीन में एजेंट्स भारतीय जेनरिक दवाएं बेच रहे हैं जो चीन के सर्च इंजन बेडु और ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म टाओबो पर आसानी से मिल जाती हैं।