फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पाकिस्तान की इस फिल्म ने तोड़ा 50 साल का रिकॉर्ड

विज्ञापन
विज्ञापन
जिंदा भाग, पाकिस्तान की तरफ से 50 साल बाद ऑस्कर में भेजी जाने वाली पहली फिल्म है।
विज्ञापन


'ज़िंदा भाग', ये वो पाकिस्तानी फिल्म है जिसने इतिहास बनाया। 50 साल बाद ये पाकिस्तान की ओर से ऑस्कर में भेजी जाने वाली पहली आधिकारिक फिल्म है।

फिल्म के निर्माता हैं मजहर अली जैदी और इसके निर्देशक हैं फरजाद नबी और उनकी पत्नी मीनू गौर जो एक भारतीय हैं।

बीबीसी से ख़ास बात करते हुए मजहर ने अपनी इस फिल्म के अलावा पाकिस्तानी फिल्म उद्योग और बॉलीवुड के बारे में भी कई बातें की।
 
'इतिहास बनाने पर गर्व'

'ज़िंदा भाग' एक कॉमेडी फिल्म्ा है जो तीन लड़कों की कहानी है। फिल्म के निर्माता मजहर जैदी हैं।

बड़ी खुशी की बात है कि हमारी फिल्म ऑस्कर में जा रही है। हमारी फिल्म कोई गंभीर किस्म की फिल्म नहीं है। ये एक कॉमेडी फिल्म्ा है जिसमें गाने भी हैं।

राहत फतेह अली ख़ान, आरिफ़ लोहार और शफ़क़त अमानत अली जैसे लोगों ने इसमें गाना गाया है। फिल्म 20 सितंबर को रिलीज़ हो रही है।

कहानी है लाहौर में रहने वाले तीन लड़कों की जो अपने करियर की बेहतरी और पैसा कमाने के लिए मुल्क छोड़कर कहीं बाहर जाने की फिराक में हैं।

हालांकि पाकिस्तान में बहुत कम सिनेमाघर हैं लेकिन हमें उम्मीद है कि फ़िल्म अच्छा व्यापार करेगी। इसे हम भारत में भी रिलीज़ करना चाहते हैं और हमारी कुछ वितरकों से बात चल रही है।

'नसीर ने की ख़ासी मदद'

फिल्म में नसीरुद्दीन शाह ने भी अहम भूमिका निभाई है। हम खासे खुशकिस्मत हैं कि नसीरुद्दीन शाह जैसे बड़े सितारे ने हमारी फिल्म में काम किया।

वो इतने बेहतरीन इंसान हैं कि उन्होंने अपनी सामान्य फीस से काफी कम में हमारे लिए काम किया। वर्ना तो हम उन्हें अपनी फिल्म में ले भी नहीं पाते।

हमारी फ़िल्म में कई नए सितारे हैं। नसीर साहब ने पाकिस्तान आकर उन सभी लड़कों को अभिनय की ट्रेनिंग भी दी। हम इसके लिए उनके बड़े शुक्रगुज़ार हैं।

'बहादुर हैं फ़िल्ममेकर'

'ज़िंदा भाग' के निर्माता मज़हर ज़ैदी कहते हैं कि पाकिस्तान के फ़िल्मकार ख़ासे बहादुर हैं।

मैं दाद देता हूं पाकिस्तान के फ़िल्मकारों को, जो तमाम ख़तरों, फ़ंडामेंटलिज़्म और उग्रवाद के बावजूद काफी बोल्ड फिल्में बनाते हैं। वो इश्यू उठाते हैं जो समाज के लिए ज़रूरी हैं।
विज्ञापन


ऐसी फ़िल्में लगातार बन रही हैं। जैसे शोएब मंसूर की 'ख़ुदा के लिए' फिर 'बोल' और हाल ही में आई 'मैं हूं शाहिद अफ़रीदी' भी इसी श्रेणी में आती है।

हमारी फ़िल्मों में सिर्फ़ मसाला नहीं होता बल्कि एक संदेश भी होता है जो पाकिस्तानी समाज की बेहतरी के लिए ज़रूरी है।

बॉलीवुड से प्रेरणा

फिल्म 20 सितंबर को पाकिस्तान में रिलीज हो रही है। निर्माता मजहर इसे भारत में भी रिलीज़ करना चाहते हैं।

बॉलीवुड फ़िल्में पाकिस्तान में बहुत मशहूर हैं। लेकिन हमें उनसे किसी तरह का डर महसूस नहीं होता। बल्कि हम उनसे प्रेरणा लेते हैं।

उन फ़िल्मों को देखकर हम भी सीखेंगे कि फ़िल्मों को और बेहतर कैसे बनाया जा सकता है। मैं भविष्य में बॉलीवुड के किसी फ़िल्मकार के साथ मिलकर फ़िल्म बनाना चाहता हूं।

मैं दिबाकर बनर्जी की फ़िल्ममेकिंग का प्रशंसक हूं। साथ ही कलाकारों में मुझे नसीरुद्दीन शाह के अलावा नई पीढ़ी के ऋतिक रोशन बहुत पसंद है।

'बैन है बेकार'

पहले बॉलीवुड की कई फ़िल्मों पर पाकिस्तान में बैन लग जाता था। लेकिन अब ऐसा नहीं है। अब हमारा सेंसर बोर्ड ख़ासा उदार हो गया है। हालांकि और सुधार की ज़रूरत है, लेकिन फिर भी हालात पहले से काफी बेहतर हुए हैं।

अब सेंसर बोर्ड में ज्यादा से ज्यादा फिल्मों से जुड़े लोग आ रहे हैं। ये अच्छा है। लेकिन मैं ये भी कहूंगा कि फिल्मकारों को भी किसी भी मामले को डील करते वक़्त सभी लोगों की संवेदनाओं का ध्यान रखना चाहिए।

पहले भारत की कई फिल्मों में पाकिस्तान को बेहद ख़राब तरीके से पेश किया गया। यही हाल कई पाकिस्तानी फिल्मों का भी था। जिनमें भारत की छवि ठीक तरह से पेश नहीं की गई।
विज्ञापन


लेकिन अब दोनों मुल्कों के फ़िल्मकार परिपक्व हो गए हैं। मेरी फ़िल्म में कैमरा क्रू और साउंड डिपार्टमेंट भारत से आई टीम ने संभाला है। तो हालात अब बेहतर हो रहे हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें