अध्ययन सुमन ने बतौर हीरो अपने करियर की शुरुआत किया था, लेकिन एक के बाद एक उनकी फिल्में फ्लॉप करती चली गई। अपने फ्लॉप फिल्मों के बारे में बातें करते हुए अध्ययन कहते हैं, 'एक दौर था जब पोस्टर पर मेरी तस्वीर सबसे बड़ी हुआ करती थी। धीरे-धीरे मैं पोस्टर से गायब होने लगा'।
अभिनेता शेखर सुमन और उनके बेटे अध्ययन इन दिनों सुर्खियों में बने हुए हैं। पिता-पुत्र की यह जोड़ी सुमन ने संजय लीला भंसाली द्वारा निर्देशित शो 'हीरामंडी' में नजर आए। इस शो में दर्शकों ने दोनों प्रदर्शन को काफी सराहा है। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान अध्ययन सुमन अपनी असफलताओं का जिक्र करते नजर आए। उनके साथ उस साक्षात्कार में शेखर सुमन भी मौजूद थे। उन्होंने अपने बेटे को क्या सलाह दी आइए जानते हैं।
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छोटे पोस्टर को देख हुआ दुख
अध्ययन सुमन ने बतौर हीरो अपने करियर की शुरुआत किया था, लेकिन एक के बाद एक उनकी फिल्में फ्लॉप करती चली गई। अपने फ्लॉप फिल्मों के बारे में बातें करते हुए अध्ययन कहते हैं, 'एक दौर था जब पोस्टर पर मेरी तस्वीर सबसे बड़ी हुआ करती थी। धीरे-धीरे मैं पोस्टर से गायब होने लगा। मेरी तस्वीर छोटी होने लगी। यह देखकर मुझे काफी दुख होता था'।
हारना नहीं होता है
अध्ययन सुमन की टिप्पणी को सुनकर शेखर सुमन ने उन्हें सलाह देते हुए बोले, 'संघर्ष सबके हिस्से में आता है। हमें हारना नहीं होता है। दूसरे लोगों की यात्रा को देखकर हमें सीखना और खुद को समझाना होता है। हमेशा अपनी गलतियों से सीखते हुए जिंदगी में आगे बढ़ना होता है'।
कैटरीना कैफ की सीखा जा सकता है
शेखर सुमन आगे कहते हैं, 'आप कैटरीना कैफ को देखिए। जब वे फिल्म 'बूम' में आई थीं तब वे न तो ठीक से अपने डायलॉग बोल पाती थीं, न ही डांस कर पाती थीं और आज देखिए वे कहां हैं। उन्होंने 'राजनीति' और 'जिंदगी ना मिलेगी दोबारा' में कितना शानदार काम किया है। आप उनकी इन फिल्मों को देखकर कह ही नहीं सकते हैं कि ये 'बूम' वाली अभिनेत्री हैं। ऐसे ही 'खो गए हम कहां' से पहले तक अनन्या पांडे को काफी ट्रोलिंग का सामना करना पड़ता था, लेकिन आज सब उनकी एक्टिंग तारीफ करते नजर आते हैं। इसलिए हमें हारना नहीं होता है बस सीखना होता है'।