दर्शकों की प्रतिक्रिया सबसे बड़ा तोहफा
इम्तियाज अली ने समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में कहा, 'मैं लगातार पढ़ रहा था कि कहीं तबाही मची है, कहीं लड़ाई हो रही है और बहुत से लोग बेघर होकर शरणार्थी बन रहे हैं और अस्तित्व बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। मैं यह सोचे बिना नहीं रह सका कि बंटवारे के समय भी ठीक ऐसा ही हुआ था'। मंगलवार को इम्तियाज ने अपना 55वां जन्मदिन मनाया। हालिया रिलीज फिल्म को मिला रिस्पॉन्स शायद उनके लिए जन्मदिन का सबसे बड़ा तोहफा है। युवा दर्शक शांति से बैठकर फिल्म और उसकी कहानी जुड़ रहे हैं, जिसमें एक 95 वर्षीय बुज़ुर्ग सरहद के उस पार छूटे अपने प्यार को याद कर रहा है।
बोले- युवाओं को पसंद आ रही फिल्म
'जब वी मेट', 'रॉकस्टार', 'लव आज कल' और 'अमर सिंह चमकीला' जैसी फिल्मों का निर्देशन कर चुके इम्तियाज अली इन दिनों 'मैं वापस आऊंगा' के लिए दर्शकों की प्रतिक्रिया जानने के लिए सिनेमाघरों का दौरा कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह एक संतोषजनक अनुभव रहा है। उन्होंने कहा, 'ऐसा लग रहा है कि मैं जो कहना चाहता था, वह लोगों तक पहुंच गया है। मैंने कभी दर्शकों को फिल्म इतनी शांति से देखते हुए नहीं देखा। मेरी सभी सफल फिल्मों में भी, लोगों की आदत होती है कि वे इधर-उधर हिलते-डुलते रहते हैं। इस बार, वे सच में ध्यान दे रहे हैं, युवा लोग ध्यान दे रहे हैं। वे इतनी बड़ी संख्या में आ रहे हैं और फिल्म को इतना पसंद कर रहे हैं'।
इस फिल्म को क्यों बताया जरूरी?
रिश्तों पर अपनी खास समझ के लिए मशहूर डायरेक्टर इस बात से बहुत खुश हैं कि कहानी का मुख्य हिस्सा 'आत्मीयता और स्नेह', युवाओं को पसंद आया है। निर्देशक ने कहा, 'मैंने कई बार कहा है कि आज की पीढ़ी को थोड़ा खोया-खोया सा महसूस होता है, क्योंकि उन्हें ऐसा प्यार नहीं मिल पाता जो लंबे समय तक चले। इसे वे अपने दिल में संजोकर रख सकें, जैसे पुराने जमाने का प्यार या पुराना संगीत। वह चाहत, वह तड़प, किसी एक इंसान का साथ और उसके साथ रहना। वे इन चीजों से जुड़ाव महसूस कर रहे हैं'। उन्होंने कहा कि यह फिल्म अलग-अलग पीढ़ियों के बीच के उन रिश्तों को खोजने के बारे में है, जिन्हें समझना हमारे आज के लिए जरूरी है।
बोले- 'इंसानियत को महसूस करें लोग'
इम्तियाज अली चाहते हैं कि बंटवारे की कहानी के जरिए फिल्म देखने वाले लोग अपनी इंसानियत को महसूस करें। उन्होंने कहा, 'मैं यह कहना चाहता हूं कि इतिहास सिर्फ गुजरे हुए समय की कोई घटना नहीं है। यादें एक ऐसी नदी हैं, जो दोनों तरफ बहती हैं। मैं माइकल जैक्सन की बात दोहराना चाहता हूं। उन्होंने कहा था, 'मैं शुरुआत आईने में दिख रहे इंसान से कर रहा हूं। मैं उससे अपने तौर-तरीके बदलने के लिए कह रहा हूं'।