छाया कदम ने फिर जीता दिल
फिल्म गांधारी को लेकर मिलीजुली प्रतिक्रिया सामने आई है। अधिकांश यूजर्स के शुरुआती रिएक्शन देखकर लग रहा है कि फिल्म दर्शकों पर ज्यादा असर नहीं कर पाई है।
एक यूजर ने लिखा है, 'छाया कदम (उमा) और चंदन रॉय (सोमेश) अधिक स्क्रीन टाइम के हकदार थे। प्रशांत नारायणन और स्वस्तिका मुखर्जी भी निष्पक्ष हैं। प्रीति श्रॉफ (एएसआई संजुक्ता) एक बेहतरीन खोज हैं'।
क्या समय बर्बाद है फिल्म?
कुछ दर्शकों का अनुभव इतना खराब रहा कि उन्होंने इसे समय बर्बाद फिल्म तक कह डाला है। फिल्म का स्क्रीनप्ले उन्हें पसंद नहीं आया है। ऐसे ही एक यूजर ने लिखा है, 'फिल्म बनाने वालों ने इसके नाम को कुछ ज्यादा ही गंभीरता से ले लिया और इस पटकथा (स्क्रीनप्ले) को मंजूरी देते समय आंखें बंद कर लीं'।
यूजर ने नेटफ्लिक्स पर साधा निशाना
एक यूजर ने फिल्म देखकर हुए खराब अनुभव के बाद नेटफ्लिक्स पर निशाना साधा है। लिखा है, 'किसी को नेटफ्लिक्स के अधिकारियों का इंटरव्यू लेना चाहिए और वह असली 'मिलियन-डॉलर' सवाल पूछना चाहिए कि कुछ प्रोड्यूसर्स का आप पर किस तरह का रहस्यमयी, 'काला जादू' चलता है? क्योंकि एक के बाद एक फ्लॉप फिल्में देने के बावजूद बड़े नए प्रोजेक्ट्स के लिए मंजूरी मिलना एक चमत्कार है।
क्या है 'गांधारी' की कहानी?
इस फिल्म में बानी (तापसी पन्नू) की छह साल की बेटी का अपहरण हो जाता है। रेलवे स्टेशन पर बच्ची को लेकर भाग रही महिला का पीछा करते हुए बानी पर हमला होता है। आंख के पास गंभीर चोट लगने के बाद, कुछ समय के लिए उसकी आंखों की रोशनी चली जाती है। मगर, वह खास प्रशिक्षण लेती है और बेटी की खोज में निकलती है।