20 घंटे काम और आठ घंटे की भी दिहाड़ी नहीं
बी एन तिवारी ने कहा कि इसका सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ रहा है, जो कैमरे के पीछे काम करते हैं। इनमें स्पॉट बॉय, लाइट मैन, आर्ट डायरेक्टर और छोटे कलाकार शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इनमें से कई लोगों को लंबे समय तक काम करने के बाद भी सही पेमेंट नहीं मिल रहा है। उनके संघर्ष के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, 'सबसे बड़ा नुकसान मजदूरों की रोज की दिहाड़ी का है। उन्होंने यह भी कहा कि मजदूरों से 20 घंटे काम करवाया जा रहा है, जबकि कई मामलों में उन्हें उनके आठ घंटे के काम की बेसिक पेमेंट भी नहीं दी जा रही है।
'ऐसा ही रहा तो बंद हो जाएगी इंडस्ट्री'
तिवारी ने कहा, 'उन्हें आठ घंटे की पेमेंट भी नहीं मिल रही है और उनसे 20-20 घंटे काम करवाया जा रहा है। 50-60% की कटौती हो रही है। कई मजदूर कम पैसे लेने पर मजबूर हैं, क्योंकि उन्हें काम की जरूरत है और उन्हें अपने परिवारों का पेट भरना है'। बी एन तिवारी ने OTT और डिजिटल प्रोजेक्ट्स में पेमेंट में होने वाली देरी के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि कभी-कभी पेमेंट महीनों बाद आता है और तब तक कंपनी या प्रोड्यूसर का पता लगाना मुश्किल हो जाता है। इंडस्ट्री के भविष्य के बारे में बात करते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि अगर हालात नहीं सुधरे, तो स्थिति और भी खराब हो सकती है। उन्होंने कहा, 'अगर ऐसा ही चलता रहा, तो एक दिन फिल्म इंडस्ट्री बंद हो जाएगी और लोग सड़कों पर आ जाएंगे। स्थिति अभी भी ठीक नहीं है। तिवारी ने कहा कि फेडरेशन कर्मचारियों तक पहुंचने, उनकी समस्याओं को समझने और उन्हें इंसाफ दिलाने में मदद करने की कोशिश कर रहा है।