दिग्गज फिल्म निर्माता प्रियदर्शन ने हाल ही में आदित्य धर की 'धुरंधर' फ्रेंचाईजी की सफलता पर बात की। साथ ही उन्होंने निर्देशक के इंडस्ट्री में शुरुआती संघर्षों के बारे में भी बात की है। एक तरफ फिल्म 'धुरंधर 2' इन दिनों सिनेमाघरों में छाई हुई है और शानदार कमाई कर रही है। दूसरी तरफ इस पर प्रोपेगेंडा फैलाने के आरोप लगे हैं। इस पर प्रियदर्शन ने रिएक्शन दिया है।
आदित्य धर के शुरुआत स्ट्रगल पर कही ये बात
प्रियदर्शन ने हाल ही में सिद्धार्थ कन्नन से बात करते हुए याद किया कि आदित्य धर को इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाने से पहले कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। उन्होंने कहा, 'वे बहुत निराश थे। लेकिन शुरुआत में उन्होंने मुझे इस बारे में कभी नहीं बताया। उन्होंने बाद में जाकर इस बारे में बात की, जब वह मेरे लिए लिखने लगे थे और मेरे साथ काम कर रहे थे'।
प्रियदर्शन की 'गर्दिश' देख आदित्य धर को मिली प्रेरणा
आदित्य धर को रास्ता कैसे मिला? यह बताते हुए प्रियदर्शन ने कहा, 'एक दिन, जब हम शाम को साथ बैठे थे, तो मैंने उनसे पूछा कि वे फिल्मों में कैसे आए? उन्होंने मुझे बताया कि उन्हें दिल्ली की यूनिवर्सिटी टीम से निकाल दिया गया था और उसके बाद उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें? उन्होंने आगे बताया कि एक अहम मोड़ तब आया जब धर ने उनकी एक फिल्म देखी। फिर उन्होंने कहा कि उन्होंने मेरी फिल्म ‘गर्दिश’ देखी और उसी से उन्हें फिल्ममेकिंग में आने की प्रेरणा मिली'। प्रियदर्शन ने आदित्य धर के साथ काम करने के अपने अनुभव पर भी बात की। उन्होंने कहा, 'हमने लंदन और स्कॉटलैंड में साथ काम किया और वह काफी सहज थे। ऐसा लगा जैसे किसी को अपनी आंखों के सामने आगे बढ़ते देख रहा हूं'।
'कुछ लोगों की राय क्यों मायने रखनी चाहिए'
रणवीर सिंह अभिनीत आदित्य धर की ‘धुरंधर’ फ्रेंचाईजी को लेकर हो रही आलोचनाओं और 'प्रोपेगेंडा' के कथित आरोपों पर प्रियदर्शन ने कहा कि 'प्रोपेगेंडा जैसी कोई चीज नहीं होती'। उन्होंने 'प्रोपेगेंडा' के तमगे को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि आप बस दर्शकों के सामने कुछ पेश कर रहे होते हैं। निर्माता ने इस बात पर जोर दिया कि दर्शकों की प्रतिक्रिया ही सबसे ज्यादा मायने रखती है। उन्होंने कहा, 'जब पूरे देश ने किसी फिल्म को स्वीकार कर लिया है, तो फिर कुछ लोगों की राय क्यों मायने रखनी चाहिए'? अपनी बात को दोहराते हुए निर्देशक ने कहा, 'हां। अगर भारत के ज्यादातर लोगों ने किसी फिल्म को स्वीकार कर लिया है, तो यह अपने आप में ही उसकी अहमियत साबित कर देता है। कुछ लोगों की राय मायने नहीं रखती, उन्हें बस नजरअंदाज करें'।