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बड़े बजट की फिल्म के बजाय अमित राय ने क्यों चुनी 'ओह माय डॉग'? किया खुलासा; बोले- 'फॉर्मूले पसंद नहीं मुझे'

Fri, 17 Jul 2026 01:13 PM IST
ज्योति राघव एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

Amit Rai On Ohh My Dog: फिल्म 'ओएमजी 2' के बाद अमित राय 'ओह माय डॉग' लेकर आ रहे हैं। उन्होंने किसी बड़े बजट वाली फिल्म के बजाय इसे क्यों चुना? हाल ही में खुद वजह बताई है।
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ओह माय डॉग-अमित राय - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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फिल्म 'ओएमजी 2' के बाद निर्माता अमित राय आसानी से बड़े स्टार वाली कमर्शियल फिल्म बना सकते थे, लेकिन इसके बजाय, वे 'ओह माय डॉग' (Ohh My Dog) लेकर आए हैं। यह फिल्म एक 12 साल के लड़के और एक इंडी डॉग की कहानी है। इस बारे में अमित राय कहते हैं, 'किसी कहानी को कहने की इच्छा ही आगे बढ़ने की वजह होती है, चाहे फिल्म बड़े बजट की हो या छोटे बजट की। स्टार, स्टूडियो और बजट...सब कहानी के अधीन होते हैं, न कि कहानी उनके अधीन।

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बोले- 'स्वाभाविक रूप से आई कहानी'
अमित राय मानते हैं कि 'ओएमजी 2' के बाद वे एक बड़ी कमर्शियल फिल्म बना सकते थे। उन्होंने कहा, 'मैंने यह कहानी इसलिए चुनी, क्योंकि यह मेरे पास स्वाभाविक रूप से आई। मेरे पास एक कुत्ता है, जो मेरे बेटे जैसा है और उसके प्यार और वफादारी ने मुझे हैरान कर दिया है। उसी ने मुझे इस कहानी के लिए प्रेरित किया'। 

क्या है इंडस्ट्री की प्रॉब्लम?
हिंदी फिल्म इंडस्ट्री किस तरफ जा रही है, अमित राय ने इस बारे में भी चर्चा की। उन्होंने कहा, 'हमारी इंडस्ट्री के साथ प्रॉब्लम यह है कि हम फिल्में नहीं बना रहे हैं, बल्कि प्रोजेक्ट्स बढ़ा रहे हैं। जिस तरह से हम स्टोरीटेलिंग करते हैं, उसमें कुछ गड़बड़ है। कैरेक्टर ग्राफ के पहले बिजनेस ग्राफ की बात करते हैं यहां। सीन कंस्ट्रक्शन से ज्यादा पीपीटी, पाई चार्ट और टेरिटरी पर फोकस है। स्टोरीटेलिंग पीछे छूट गई है। 

बोले- 'मैं फॉर्मूला का फैन नहीं हूं'
अमित राय कहते हैं, 'हम में से कई लोग भूल गए हैं कि फिल्म असल में कहानी, किरदारों, परिस्थिति और इंसानी भावनाओं के बारे में है। फिल्म बिजनेस कहानी की वजह से है। कहानी, बिजनेस की वजह से नहीं। फैसले लेने वालों के छोटी सोच को देखते हुए महत्वपूर्ण स्टोरीटेलिंग की गुंजाइश कम हो गई है। यहां एक रैट रेस है। कोई भी यूनिक कॉन्सेप्ट के साथ रिस्क लेने को तैयार नहीं है। मैं फॉर्मूला का फैन नहीं हूं। मैं कहानियों को फॉलो करता हूं। मैं हर कहानी के साथ खुद को नए सिरे से बनाता हूं। यही एकमात्र फॉर्मूला है, जिसे मैं फॉलो करता हूं'। 
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एक ही कंटेंट बार-बार नहीं दिखा सकते
रीजनल सिनेमा से तुलना करते हुए अमित राय कहते हैं कि दर्शक घिसे-पिटे फॉर्मूले के बजाय ओरिजिनैलिटी को पसंद कर रहे हैं। डिजिटल और कंटेंट की भरमार वाले इस दौर में आप एक ही तरह का कंटेंट बार-बार नहीं दिखा सकते। यही वजह है कि हिंदी फिल्में रीजनल फिल्मों के मुकाबले अपनी अहमियत और बिजनेस खो रही हैं, क्योंकि रीजनल फिल्में बेहतरीन सिनेमाई अनुभव दे रही हैं। उन्होंने इस मामले में 'पुष्पा' से लेकर 'मंजुम्मेल बॉयज', 'दशावतारम', 'कांतारा' और 'महावतार नरसिम्हा' का नाम लिया।
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