सात साल चली मामले की सुनवाई
हालांकि, राम गोपाल वर्मा ने इस सेशन में भाग नहीं लेने का फैसला किया। अब एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सात साल तक मामले की सुनवाई के बाद मुंबई की अदालत ने आखिरकार आज उनके नाम पर गैर-जमानती वारंट जारी किया है। राम गोपाल वर्मा को नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत दोषी पाया गया है।
राम को हो सकती है अतिरिक्त कैद की सजा
यह विशेष अधिनियम 'अपर्याप्त धनराशि या खाते में तय राशि से अधिक होने के कारण चेक अनादर के लिए दंडनीय है।' जेल की सजा के अलावा राम गोपाली वर्मा को शिकायतकर्ता को क्षतिपूर्ति के रूप में 3.75 लाख रुपये भी देने होंगे और अगर वह तीन महीने में ऐसा करने में विफल रहते हैं तो उन्हें तीन महीने की अतिरिक्त कैद की सजा दी जाएगी।
क्या है पूरा मामला
यह मामला श्री नाम की कंपनी द्वारा महेशचंद्र मिश्रा के माध्यम से 2018 में राम गोपाल वर्मा की फर्म के खिलाफ दायर की गई शिकायत से शुरू हुआ है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि राम गोपाल वर्मा द्वारा जारी किया गया चेक कम राशि के कारण बाउंस हो गया था। जून 2022 में निदेशक को व्यक्तिगत मुचलका और 5000 रुपये की सुरक्षा जमा राशि प्रदान करने के बाद जमानत दे दी गई थी। मजिस्ट्रेट ने स्पष्ट किया कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 428 के तहत कोई 'सेट-ऑफ' नहीं होगा, क्योंकि राम गोपाल वर्मा मुकदमे के दौरान हिरासत में नहीं थे। कई सुनवाई और कानूनी कार्यवाही के बाद अदालत ने फिल्म निर्माता के खिलाफ फैसला सुनाया और कहा कि आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद हैं।