हाल ही में पेरिस पुलिस ने अमेरिकी गायक और कवि जिम मॉरिसन की लंबे समय से गायब हुई प्रतिमा को बरामद कर लिया है। साल 1988 में इस मूर्ति के चोरी होने के बाद दिवंगत गायक के प्रशंसक काफी दुखी थे, लेकिन इस खबर को सुनकर उनके बीच खुशी का माहौल छा गया है। आइए जानते हैं कैसे और कहां मिली प्रतिमा।
कहां मिली प्रतिमा?
मशहूर गायक और कवि जिम मॉरिसन की प्रतिमा बरामद कर ली गई है। 37 साल पहले उनके कब्र से गायब हुई प्रतिमा पेरिस पुलिस द्वारा बरामद कर ली गई है। पेरिस पुलिस ने बीते सोमवार को इंस्टाग्राम पर पोस्ट में बताया कि पेरे-लाचाइज कब्रिस्तान से 1988 में चुराई गई प्रतिमा, पेरिस के सरकारी अभियोजक कार्यालय द्वारा धोखाधड़ी के मामले से जुड़ी तलाशी के दौरान मिली। मूर्ति की बरामदगी ने कला जगत और प्रतिष्ठित डोर्स फ्रंटमैन के प्रशंसकों को उत्साहित कर दिया है।। इस बारे में तत्काल कोई जानकारी नहीं दी गई कि प्रतिमा को कब्र में वापस रखा जाएगा या नहीं।
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क्या है प्रतिमा का इतिहास?
साल 1971 में जिम मॉरिसन 27 वर्ष की आयु में पेरिस के बाथटब में मृत पाए गए थे। उनकी मृत्यु का कारण हृदय गति रुकना बताया गया, हालांकि शव परीक्षण नहीं किया गया क्योंकि कानून के अनुसार ऐसा करना आवश्यक नहीं था। इसके बाद उन्हें पेरिस के कब्रिस्तान पेरे-लाचाइज में दफनाया गया। फिर क्रोएशियाई कलाकार म्लाडेन मिकुलिन द्वारा गायक की एक प्रतिमा बनाई गई, जिसे मॉरिसन के निधन के 10वीं वर्षगांठ पर, यानी 1981 में कब्र पर रखा गया था। इसे 300 पाउंड में तैयार किया गया था। इसके बाद गायक के प्रशंसक इसे तीर्थस्थली के रूप में पूजने लगे थे और उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए आते थे।
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जिम मॉरिसन के बारे में
जिम मॉरिशन ने संगीत की दुनिया में बहुत कम समय में शानदार योगदान दिया, जिस कारण उन्होंने अपने प्रशंसकों को दीवाना बना लिया था। गायक ने 1965 में रे मंजरेक के साथ लॉस एंजिलस में डोर्स की सह-स्थापना की। मॉरिसन को ‘लाइट माई फायर’, ‘ब्रेक ऑन थ्रू’ और ‘द एंड’, ‘डोर्स’ जैसे गानों के लिए जाना जाता है।