इस किरदार में खुद को किस तरह ढाला?
दरअसल, फिल्म के हर किरदार की कई परतें हैं क्योंकि ये ऐसी फिल्म है, जिसमें कोई भी पूरा अच्छा या बुरा नहीं है। कोई दूध का धुला नहीं है। अपने अंदर दोनों किरदार लेकर चलना आसान नहीं। साथ ही झुग्गी में रहने वालों की भाषा अपनाना भी आसान नहीं था। लखनऊ का किरदार है तो वहां की भाषा को अपनाना पड़ा क्योंकि मेरी पंजाबी मजबूत है। काफी मेहनत लगी पर यह मजेदार अनुभव था।
आप एक मशहूर कलाकार हैं तो अपनी निजता कैसे संभालती हैं?
अगर सोशल मीडिया पर कोई मुझे लेकर बुरा कमेंट करता है तो उसे ब्लॉक कर देती हूं। शुरुआत में मैं बहुत सोचती थी कि लोग ऐसा क्यों कह रहे हैं? तब जॉन अब्राहम ने कहा था कि मैं कभी कमेंट्स नहीं पढ़ता। ये बहुत कमाल की सलाह थी। इतने लोग हैं, बातें करेंगे ही। मेरा आत्मविश्वास कोई डगमगा नहीं सकता।
कोई ऐसा किरदार जो करना चाहती हों?
पहले कहती थी कि मुझे कॉमेडी फिल्म करनी है। अब एक पीरियड फिल्म करने की इच्छा है।
साल में बहुत कम फिल्में करती हैं। क्या ऐसा जानबूझकर होता है?
नहीं, मैं कई स्क्रिप्ट सुनती हूं पर काम उसमें ही करती हूं जो पसंद आती है। अगर आगे भी अच्छे और मजेदार किरदार मिलेंगे तो मैं जरूर करूंगी। इसके बाद मेरी एक तेलुगु फिल्म 'जटाधरा' आने वाली है, शायद नवंबर में रिलीज होगी। उसके लिए मैंने तेलुगु सीख ली है, डबिंग भी खुद कर रही हूं।