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दिव्या दत्ता का जन्मदिन: छोटी बुआ ने लगाया फिल्मों का शौक; मां से सीखे अभिनय के गुर, कैसे पहुंचीं मायानगरी?

Fri, 25 Sep 2026 06:30 AM IST
ज्योति राघव एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

Divya Dutta Birthday: अभिनेत्री दिव्या दत्ता आज 25 सितंबर को अपना जन्मदिन मना रही हैं। कई चर्चित फिल्मों में काम कर चुकीं अभिनेत्री के खास दिन पर पढ़िए उनसे जुड़े कुछ रोचक किस्से
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दिव्या दत्ता - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिव्या दत्ता आज अपना 49वां जन्मदिन मना रही हैं। पढ़ाई में वे हमेशा अव्वल रहीं। मगर, करियर फिल्मी दुनिया में बनाया। दिव्या को बॉलीवुड में लगभग 32 साल हो चुके हैं। तीन दशक के करियर में उन्होंने कई शानदार भूमिकाएं निभाई हैं। लुधियाना जैसे छोटे शहर से निकलकर दिव्या दत्ता मायानगरी पहुंचीं। वहां उन्होंने खुद को स्थापित किया। मगर, इसके पीछे उनकी अथक मेहनत और संघर्ष रहा है। जन्मदिन पर पढ़िए उनसे जुड़े किस्से

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दिव्या दत्ता - फोटो : इंस्टाग्राम
डॉक्टर माता-पिता के घर हुआ जन्म
अपनी प्यारी सी मुस्कान और अभिनय से सबका दिल जीतने वाली दिव्या दत्ता का जन्म 25 सितंबर 1977 को पंजाब के लुधियाना में डॉक्टर माता-पिता के घर हुआ। डॉक्टरों के परिवार में जन्म लेने के बाद उन्होंने अभिनय की दुनिया में कदम कैसे बढ़ाए? इसकी कहानी भी कम दिलचस्प नहीं। एक्टिंग की तरफ झुकाव उनका बचपन से ही हो गया था। छोटी बुआ ने उनके इस शौक को एक आकार दिया, जिनके पास दिव्या दत्ता को उनकी शैतानियों की वजह से भेजा गया था।

दिव्या दत्ता - फोटो : इंस्टाग्राम@divyadutta25
छोटी बुआ ने लगाया फिल्मों का शौक
दिव्या दत्ता का कहना है कि वे पढ़ाई में काफी होशियार रहीं। मगर, बचपन के किस्से याद करते हुए उन्होंने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि उनकी भाषा अचानक कुछ गड़बड़ हो गई। इसकी वजह यह थी कि दिव्या दत्ता के माता-पिता दोनों ही सरकारी डॉक्टर थे। लुधियाना में वह जब अपने पैरेंट्स के साथ रहती थीं तो कई मरीज घर भी आया करते थे। इस दौरान दिव्या दत्ता ने लोगों की भाषा को सीख लिया, इसमें गालियां भी शामिल थीं। ऐसे में पिता ने फैसला किया कि वह दिल्ली में रहने वाली अपनी बुआ के पास जाएंगी। दिल्ली में दिव्या की तीन बुआ रहती थीं। तीनों ने दिव्या को 7 साल तक पाला-पोसा। दिव्या दत्ता के मुताबिक, 

‘दिल्ली में मेरी तीन बुआ थीं, वो टीचर्स थीं। किसी ने मुझे पढ़ाया, हिंदी और अंग्रेजी सिखाई। वहीं सबसे छोटी बुआ को फिल्में देखने का शौक था। उनके साथ मैंने फिल्में देखीं, साथ ही मैं उनसे कहती थीं कि मुझे हीरोइनों वाला हेयरस्टाइल बनाकर स्कूल भेजो। किसी दिन मैं नीतू कपूर बनतीं, किसी दिन जीनत अमान, किसी दिन हेमा मालिनी। यहां से ही मेरे अंदर फिल्मों को लेकर झुकाव पैदा हुआ।’

माता-पिता के साथ दिव्या के बचपन की तस्वीर - फोटो : इंस्टाग्राम@divyadutta25
हादसे ने छीन लिया बचपन
दिव्या दत्ता की जिंदगी किसी राजकुमारी जैसी चल रही थी। माता-पिता का प्यार, बुआओं का दुलार। सबकुछ शानदार था। मगर, सात साल की उम्र में एक हादसा हुआ कि अचानक दिव्या बड़ी हो गईं। दिव्या के पिता का आकस्मिक निधन हो गया। सिर से पिता का साया उठने के बाद मां ने ही दिव्या और उनके भाई की अकेले परवरिश की। दिव्या दत्ता की मां डॉ. नलिनी दत्ता एक सरकारी अधिकारी थीं।

दिव्या दत्ता - फोटो : अमर उजाला
मां से लिया अभिनय का प्रशिक्षण
दिव्या को फिल्मों का शौक अगर बुआ की वजह से हुआ तो अभिनय का प्रशिक्षण उन्होंने एक तरह से अपनी मां से लिया। मां की नकल करते-करते उन्होंने यह गुर सीख लिया। दिव्या के मुताबिक, 
'पिता के जाने के बाद मैं सात साल की थी, लेकिन अचानक बड़ी हो गई। मैंने बुआ से कहा कि मां को मेरी जरूरत है और मुझे उनकी। इसके बाद मां के पास लुधियाना वापस चली आई। मां को लिखने का शौक था, मैं भी मां की सहेली बन गई थी। मां, मैं और भाई, अक्सर छत पर गाने लाकर डांस करते थे। मैं मम्मी की नकल करती थी। मां को पुरानी एक्ट्रेस पसंद थीं, वो उनकी तरह एक्सप्रेशन देती थीं। मैंने उनसे अनजाने में ही ये चीजें सीख लीं। आगे चलकर जब फिल्म ‘ट्रेन टू पाकिस्तान’ की तो मां से सीखी वो बातें काम आईं।’  

दिव्या दत्ता अपनी मां के साथ (फाइल फोटो) - फोटो : इंस्टाग्राम@divyadutta25
मां ने खोले मायानगरी आने के रास्ते
दिव्या दत्ता अगर आज अभिनय की दुनिया में दमक रही हैं, तो इसके पीछे उनकी मां का बहुत बड़ा हाथ रहा। उन्होंने समाज और रिश्तेदारों का विरोध झेलते हुए बेटी के सपनों को उड़ान दी। अभिनय में आगे बढ़ने के लिए मुंबई आने का फैसला उन्होंने कब और कैसे लिया? इस बारे में अमर उजाला से बातचीत में दिव्या दत्ता ने बताया-

‘मुझे खाली समय में फिल्मी मैगजीन पढ़ना पसंद था, एक बार स्टारडस्ट में एक फॉर्म निकला था, एक टैलेंट हंट कॉम्पिटिशन था। मैंने फॉर्म भर दिया और भूल गईं। लेकिन फॉर्म स्वीकार हो गया। इसके बाद मां को बताना पड़ा कि मुझे एक्ट्रेस बनना है और मुंबई जाना है। मां डॉक्टर थीं, मेरे परिवार में अधिकतर लोग डॉक्टर थे लेकिन मां ने मेरी एक्टिंग के सपने को सपोर्ट किया। कई रिश्तेदार आ गए थे घर पर, कोई नहीं चाहता था कि मैं एक्टिंग की दुनिया में जाऊं। लेकिन मां ढाल बनकर आगे खड़ी रहीं और बोलीं कि जो कुछ होगा, उसकी जिम्मेदारी वह लेंगी।’

इस तरह मायानगरी मुंबई आने की राह दिव्या दत्ता के लिए खुली। दिव्या दत्ता का कहना है कि मुंबई आने के बाद तमाम रिजेक्शन मिले। मगर उन्होंने हार नहीं मानी, मां के विश्वास को टूटने नहीं दिया। कुछ ही वर्षों में अपने उम्दा अभिनय से बॉलीवुड में एक खास जगह हासिल की। 

दिव्या दत्ता - फोटो : अमर उजाला
बॉलीवुड, पंजाबी और साउथ सिनेमा में किया है काम
  • साल 1994 में फिल्म 'इश्क में जीना इश्क में मरना' से दिव्या दत्ता की सिनेमा में बोहनी हुई।
  • बॉलीवुड में कदम रखने से पहले दिव्या पंजाब के रीजनल टीवी कमर्शियल्स के लिए मॉडलिंग किया करती थीं।
  • इतना ही नहीं वह एक डबिंग आर्टिस्ट भी रह चुकी हैं। एक्ट्रेस ने लीजा रे और आफताब शिवदासानी की फिल्म 'कसूर' में लीजा रे की डबिंग भी की थी।
  • दिव्या ने ना सिर्फ हिंदी फिल्मों बल्कि अंग्रेजी, पंजाबी, तमिल, तेलुगु और मलयालम जैसी भाषाओं में भी काम किया है।
  • बेशक दिव्या ने अपने करियर में ज्यादातर सपोर्टिंग रोल प्ले किए हैं, लेकिन अपनी काबिलियत के बल पर एक अलग मुकाम पाया है।
  • आज दिव्या अपने करियर में सौ से ज्यादा फिल्में कर चुकी हैं। ओटीटी पर भी कई वेब सीरीज का हिस्सा बनी हैं।

दिव्या दत्ता-शाहरुख खान - फोटो : सोशल मीडिया
शाहरुख खान की हीरोइन बनने का देखा था ख्वाब
शाहरुख खान और प्रीति जिंटा की 'वीर जारा' में दिव्या दत्ता का शब्बो का किरदार काफी पसंद किया गया था। मगर, वे यह भूमिका करना नहीं चाहती थीं। दरअसल, शुरुआत में उन्हें लगा कि वे इस फिल्म की लीड एक्ट्रेस हैं और वो बहुत खुश हुई कि शाहरुख की एक्ट्रेस बनने वाली हैं।

दिव्या बताती हैं, ‘मुझे फिल्में करते हुए कई साल हो चुके थे। मैं भी शाहरुख खान की हीरोइन बनने का सपना देखती थी। लेकिन मुझे फिल्म 'वीर-जारा' में शब्बो का रोल मिला। मैं इसे नहीं करना चाहती थी पर आदित्य चोपड़ा ने कहा कि इस किरदार के लिए तुम याद की जाओगी। ऐसा ही हुआ भी, मुझे शब्बो के किरदार में काफी सराहा गया।'

दिव्या ने आगे बताया, 
'आदित्य चोपड़ा ने मुझे एक और सलाह दी थी। जब मैंने उन्हें बताया कि मैंने एक साथ 20 फिल्में साइन की हैं तो उन्होंने कहा कि तुम्हें काम की कमी नहीं है। अच्छा काम करो और अपनी एक विरासत छोड़कर जाओ। मैंने आदित्य की सलाह मानी और जो फिल्में शुरू नहीं की थीं, उनका साइनिंग अमाउंट वापस दिया। उसके बाद करियर में हमेशा सिर्फ अपनी पसंद का ही काम किया।’ 
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दिव्या दत्ता - फोटो : इंस्टाग्राम @divyadutta25
दिव्या ने क्यों नहीं की शादी?
दिव्या की निजी जिंदगी की बात करें तो वे सिंगल हैं। शादी न करने की वजह पर वे कहती हैं,
‘कई बार लोग पूछते हैं कि शादी क्यों नहीं की? लेकिन मैं साफ कहती हूं कि मुझे सही पार्टनर नहीं मिला। मेरी जिंदगी में बहुत अच्छे लोग आए लेकिन वो ऐसे नहीं थे कि उनके साथ अपनी जिंदगी बिताना चाहूं। ऐसा भी नहीं है कि मैं जिंदगी में कुछ मिस कर रही हूं, मैं खुद में कंप्लीट हूं। मुझे यह भी लगता है कि रिश्ते ऐसे होने चाहिए जो आपको बेहतर बनाएं, ना कि आपको खींचकर नीचे ले आएं। आपको वो काम ना करने दें जो आप करना चाहते हैं। मैं एक्टिंग करना चाहती हूं। ऐसा नहीं है कि किसी ने सामने से एक्टिंग ना करने की बात कही, लेकिन बातों से, तरीकों से जता दिया जाता था।’

दिव्या दत्ता आगे कहती हैं, ‘जिंदगी मैंने भी गुजारनी है और सामने वाले ने भी गुजारनी हैं। लेकिन एक रिश्ते में यह कहना और जताना जरूरी होता है कि ‘मैं हूं’। यही बात ही किसी रिश्ते में सबसे ज्यादा मायने रखती है।’
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