पूर्व सेलिब्रिटी मैनेजर दिशा सालियान के आत्महत्या मामले में अब मुंबई पुलिस ने ये साफ कर दिया है कि ये आत्महत्या ही थी। पुलिस ने बाकी सभी आशंकाओं को दूर कर दिया है। मुंबई पुलिस ने बॉम्बे हाईकोर्ट में दायर किए अपने हलफनामे में कोर्ट को बताया कि दिशा सालियान ने आत्महत्या की है और उनकी मौत में कोई गड़बड़ी नहीं पाई गई है। हालांकि, दिशा के पिता का अभी भी ये ही कहना है कि उनकी बेटी के साथ सामूहिक दुष्कर्म के बात हत्या की गई है।
पुलिस बोली- पारिवारिक विवाद और बिजनेस को लेकर थी स्ट्रेस
पुलिस ने पिछले महीने हाईकोर्ट में दायर हलफनामे में ये कहा है कि दिशा सालियान ने अपनी मर्जी से फ्लैट की खिड़की से छलांग लगाई थी और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी दुष्कर्म या शारीरिक हमले के कोई संकेत नहीं मिले हैं। मालवाणी पुलिस स्टेशन के सीनियर इंस्पेक्टर शैलेंद्र नागरकर की ओर से दायर किए गए हलफनामे में कहा गया है कि दिशा सालियान अपने परिवार के साथ विवाद और बिजनेस डील्स को लेकर स्ट्रेस में थीं। घटना के समय वो नशे में थी और उनके मंगेतर, जो उस समय उनके साथ थे, उन्होंने भी किसी भी तरह की गड़बड़ी की आशंका नहीं जताई है।
पुलिस ने दिशा के पिता के आरोपों को बताया गलत
पुलिस ने यह भी कहा कि सतीश सालियान द्वारा अपनी याचिका में उठाए गए तर्क बेबुनियाद हैं। सीनियर इंस्पेक्टर ने कहा कि पुलिस द्वारा दायर क्लोजर रिपोर्ट फोरेंसिक जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर आधारित थी। हलफनामे में ये भी कहा गया है कि बाद में मामले गठित एसआईटी ने भी पुलिस की रिपोर्ट को ही सही माना है।
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पिता ने याचिका में लगाए दुष्कर्म और हत्या के आरोप
दिशा के पिता सतीश सालियान ने इस साल मार्च में हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर अपनी बेटी की मौत की सीबीआई जांच की मांग की थी। साथ ही उन्होंने शिवसेना (यूबीटी) विधायक आदित्य ठाकरे के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग भी की थी। याचिका में दावा किया गया कि उनकी बेटी जून 2020 में रहस्यमय परिस्थितियों में मृत पाई गई थी। उन्होंने दिशा के साथ दुष्कर्म करने के बाद उसकी हत्या करने का आरोप लगाया था। इसी याचिका कल यानी बुधवार को न्यायमूर्ति ए एस गडकरी की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई की और इसे 16 जुलाई तक के लिए आगे बढ़ा दिया।
अभी भी अपने रुख पर कायम सतीश सालियान
हालांकि, दिशा के पिता सतीश सालियान ने अभी भी अपने रुख पर कायम हैं। उन्होंने कहा कि गंभीर अपराध के होने का खुलासा करने वाली जानकारी प्राप्त होने पर, पुलिस को एफआईआर दर्ज करनी चाहिए और फिर जांच करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एसआईटी पहले एफआईआर दर्ज किए बिना दुष्कर्म और हत्या के गंभीर मामले की जांच कर रही है, जो पूरी तरह से गलत है। उन्होंने दावा किया कि अदालत के आदेश की जानबूझकर अवहेलना की गई है। क्योंकि हलफनामा महाराष्ट्र सरकार के मुख्य सचिव से मांगा गया था, पुलिस से नहीं।