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Podcast: 'अब प्यार नहीं, सिर्फ कारोबार बचा', इंडस्ट्री के हाल पर बोले मेहुल कुमार; सुनाए 90’s के यादगार किस्से

Fri, 01 Aug 2025 07:00 AM IST
आराध्य त्रिपाठी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

Mehul Kumar Interview: मरते दम तक और तिरंगा जैसी बेहतरीन देशभक्ति की फिल्में बनाने वाले निर्देशक मेहुल कुमार ने साझा किए राजकुमार, नाना पाटेकर और गोविंदा से जुड़े मजेदार किस्से।
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मेहुल कुमार - फोटो : यूट्यूब ग्रैब
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विस्तार
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जब भी देशभक्ति की फिल्मों की बात होती है तो उनमें राजकुमार की ‘तिरंगा’ और नाना पाटेकर की ‘क्रांतिवीर’ जैसी फिल्मों का जिक्र जरूर होता है। इन दोनों ही फिल्मों के एक-एक सीन और डायलॉग आज भी लोगों को हूबहू याद हैं। 90 के दशक में ऐसी ही देशभक्ति से लबरेज एक्शन फिल्में बनाने वाले निर्देशक मेहुल कुमार ने हाल ही में अमर उजाला से खास बातचीत की। इस दौरान मेहुल कुमार ने मोहम्मद रफी से लेकर राज कुमार तक से जुड़े कई मजेदार किस्से साझा किए।

अपनी फिल्मों में आपने बात हमेशा वजनदार की और उसे लोगों के हिसाब से भी बनाया। ये कितना मुश्किल था?

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मैं हमेशा बड़ी बात लोगों के हिसाब से ही कहता हूं, ताकि जो हमें कहना है, वो कह भी दिया जाए और लोग उससे जुड़ भी जाएं। यही वजह है कि मेरी कई एक्शन फिल्में परिवारों ने भी पसंद कीं। चाहे ‘क्रांतिवीर’ हो या ‘तिरंगा’, इनमें सिर्फ धर्म या देशभक्ति का ही एंगल नहीं रहा। इनमें गाने और लव एंगल जोड़कर व्यावसायिक तरीके से ही पेश करना पड़ा, तभी वजनदार बात लोगों के दिलों तक पहुंची।

आपने मोहम्मद रफी साहब के साथ काम किया है। वो कैसी शख्सियत थे?
रफी साहब रमजान महीने में कभी गाने नहीं गाते थे, पर मेरी एक गुजराती फिल्म के लिए वो सिर्फ एक बार कॉल करने पर रिकॉर्ड करने आ गए। उन्होंने शाम 7 बजे रोजा खोलने के बाद मेरे लिए गाना रिकॉर्ड किया। वो जितने बड़े और महान कलाकार थे, उतने ही सरल इंसान थे।

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मेहुल कुमार, राजकुमार और गोविंदा - फोटो : सोशल मीडिया

आपने अशोक कुमार से लेकर मनोज बाजपेयी तक के साथ काम किया है। कलाकारों के साथ रिश्ते कैसे रहे? 
दादा मुनि ने तो मेरे साथ पर-डे के हिसाब से काम किया था। उन्हें लगा शूट 10 दिन का होगा पर छह दिन में ही खत्म हो गया। मेरे से हंसते हुए बोले- ‘तेरे साथ अब कभी पर-डे के हिसाब से काम नहीं करूंगा।’ शबाना आजमी जी ने जब साथ काम किया ‘अनोखा बंधन’ में तो उन्होंने पूरी फिल्म में पुराने कपड़े ही पहने, क्योंकि फिल्म में उनका किरदार मध्यम वर्गीय परिवार की महिला का था। महमूद भाईजान ने तो अपनी आखिरी फिल्म मेरे साथ की थी। वो इंडस्ट्री में काम करना छोड़ चुके थे, पर मेरे कहने पर फिल्म ‘लव मैरिज’ में मेरे साथ काम किया। कहना यह चाहता हूं कि उस वक्त इंडस्ट्री में आपस में प्यार था। लोग एक-दूसरे का साथ देने के लिए हमेशा खड़े रहते थे और कहानी को प्राथमिकता दी जाती थी। अब तो सबकुछ धंधा बन गया है।

राज कुमार साहब के साथ जब पहली बार काम किया था तो कोई डर था?
हमने साथ में पहली बार फिल्म 'मरते दम तक' में साथ काम किया था। मैंने उन्हें कहानी सुनाने के लिए पहली बार फोन लगाया, बोला- राज कुमार साहब मैं मेहुल कुमार बोल रहा हूं। आपको एक फिल्म की कहानी सुनानी है। वहां से जवाब मिला- ‘कौन मेहुल कुमार?’ फिर मैंने उन्हें अपने बारे में बताया तो मिलने को राजी हुए। फिल्म की स्क्रिप्ट मैंने उन्हें उर्दू में लिखकर दी। उन्हें पसंद आई तो फिल्म करने को राजी हुए। मुहूर्त शॉट का दिन आया तो देखा राज साहब टैक्सी में आ रहे हैं। पूरे यूनिट में हंगामा हो गया। मैंने पूछा राज साहब आप टैक्सी में तो बोले- ‘गाड़ी खराब हो गई थी और पहले ही दिन सेट पर नहीं आता तो कहानियां बन जातीं इसलिए टैक्सी से चला आया।’ 

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मेहुल कुमार, राजकुमार, गोविंदा और नाना पाटेकर - फोटो : सोशल मीडिया

नाना पाटेकर और राजकुमार या गोविंदा जैसे अलग-अलग तरह के कलाकारों के साथ एक फिल्म में काम करने पर कोई परेशानी आई?
नहीं मुझे कोई परेशानी नहीं आई। हां, ‘तिरंगा’ के वक्त मुझे इंडस्ट्री के कई लोगों ने कहा था कि ये फिल्म पूरी नहीं हो पाएगी। क्योंकि इसमें नाना पाटेकर और राज कुमार जैसे दो अलग-अलग मिजाज के लोग हैं। लेकिन हमने आराम से फिल्म पूरी की।

‘मरते दम तक’ से एक किस्सा गोविंदा के रूमाल का काफी मशहूर है, वो क्या है?
एक बार गोविंदा सिल्क का कोई शर्ट पहनकर आए थे, तो राज कुमार ने शर्ट की तारीफी की। तो गोविंदा ने वो शर्ट राज साहब को ही दे दी। राज साहब ने क्या किया कि वो उस शर्ट को फाड़कर उसका रूमाल बनाकर अगले दिन सेट पर लेकर आ गए। गोविंदा यह देखकर हैरान रह गए।

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