फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Dhirendra Nath Ganguly: जब धीरेंद्र नाथ गांगुली की इस बात नाराज हो गए निजाम, दे डाला हैदराबाद छोड़ने का आदेश

Mon, 18 Nov 2024 08:04 AM IST
मोहम्मद फायक अंसारी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

धीरेंद्र नाथ गांगुली का भारतीय सिनेमा के एक जाने माने निर्माता-निर्देशक और लेखक थे। उन्होंने मदन थियेटर्स के मैनेजर नितीश लाहिड़ी के साथ मिलकर साल 1918 में  पहली फिल्म निर्माण कंपनी इंडो ब्रिटिश फिल्म कंपनी बनाई थी।
विज्ञापन
धीरेंद्र नाथ गांगुली - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

धीरेंद्र नाथ गांगुली की गिनती भारतीय सिनेमा के दिग्गज फिल्मकारों में होती है। अभिनेता के साथ वह सफल उद्योगपति, निर्माता-निर्देशक और लेखक भी थे। बंगाली सिनेमा में उनका योगदान बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। कॉमेडी की समझ में काफी ज्यादा थी, यही वजह है कि उन्होंने कई कॉमेडी फिल्में बनाईं।

विज्ञापन

कोलकाता में हुआ जन्म
धीरेंद्र नाथ गांगुली का जन्म 26 मार्च 1893 में कोलकाता में हुआ था। उन्होंने शांतिनिकेतन में विश्व भारती विश्वविद्यालय से अपनी पढ़ाई पूरी की। बाद में, वह हैदराबाद में स्टेट आर्ट स्कूल के प्रधानाध्यापक बने। साल 1915 में भावकी अभिव्यक्ति नाम की किताब उन्होंने जारी की। यह मेकअप तकनीकों की तस्वीरों की एक पुस्तक थी। उनकी इसी किताब की वजह से जेएफ मदन उनके संपर्क में आए और उनकी फिल्मों में पैसे लगाने को राजी हुए।

1918 में बनाई फिल्म निर्माण कंपनी
धीरेंद्र नाथ और मदन थियेटर्स के मैनेजर नितीश लाहिड़ी ने 1918 में  पहली फिल्म निर्माण कंपनी इंडो ब्रिटिश फिल्म कंपनी बनाई। यह पहली ऐसी कंपनी थी, जिसका मालिकाना हक बंगालियों के पास था। इस कंपनी के बैनर तले पहली फिल्म बिलत फेरत थी, जो साल 1921 में आई थी। फिल्म का निर्देशन नितीश लाहिड़ी ने किया था। यह एक मूक कॉमेडी फिल्म थी। इसके बाद कंपनी ने साल 1922 में दो और फिल्में यशोदा नंदन और साधु और शैतान भी रिलीज की।

जब निमाज हुए नाराज
इसके कुछ समय बाद धीरेंद्र नाथ ने हैदराबाद में लोटस फिल्म कंपनी की स्थापना की। वहां के निजाम की मदद से उन्होंने वहां एक स्टूडियो और दो सिनेमाघर भी खोले। हालांकि, 1924 में धीरेंद्र की एक बात ने निजाम को काफी ज्यादा नाराज कर दिया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक साल 1924 में आई फिल्म रजिया बेगम नाम की फिल्म की कहानी से हैदराबाद के निजाम खुश नहीं थे। इस फिल्म के वितरक धीरेंद्र ही थे। कहा जाता है कि इस फिल्म को लेकर निजाम इतने ज्यादा नाराज हुए कि उन्होंने धीरेंद्र नाथ को हैदराबाद छोड़कर चले जाने का आदेश दे दिया था।
विज्ञापन

कई बड़े पुरस्कारों से हुए सम्मानित
धीरेंद्र नाथ इसके बाद बंगाल वापस आ गए और फिल्म निर्माण कंपनी ब्रिटिश डोमिनियन फिल्म्स का गठन किया। अभिनेता प्रमथेश बरुआ ने इसमें निवेश किया और इस कंपनी के बैनर तले बनी एक फिल्म में अभिनय भी किया। हालांकि, टॉकीज और नई ध्वनि तकनीकों के आने की वजह से यह फिल्म कंपनी विफल हो गई।  बाद में, धीरेंद्र प्रमथेश बरुआ की बरुआ पिक्चर्स कंपनी में शामिल हो गए। हालांकि, कुछ समय बाद वे दोनों बीएन सरकार के न्यू थियेटर्स का हिस्सा बन गए। कला के क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए उन्हें साल 1974 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। इसके एक साल बाद उन्हें दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था। 18 नवंबर 1978 में 85 साल की उम्र में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया था।
Priyanka Chopra: प्रियंका चोपड़ा ने ‘गुंडे’ की पुरानी यादों को किया साझा, प्रशंसकों को भाई कातिलाना अदाएं
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें