फिल्म 'है जवानी तो इश्क होना' की रिलीज से पहले डेविड धवन की सिनेमाई यात्रा का जश्न मनाने के लिए 'डेविड धवन फिल्म फेस्टिवल' का आयोजन किया गया। बीती रात शनिवार को एक भव्य इवेंट आयोजित हुआ, जहां सलमान खान से करण जौहर तक, कई सेलेब्स पहुंचे। इस दौरान डेविड धवन ने अपने करियर और फिल्मों को लेकर दिलचस्प किस्से साझा किया। इसी दौरान निर्देशक ने कहा कि उन्होंने फिल्म 'चश्मे बद्दूर' गुस्से में बनाई थी।
गुस्से में क्यो बनाई 'चश्में बद्दूर'?
बता दें कि डेविड धवन निर्देशित कॉमेडी फिल्म 'चश्मे बद्दूर' साल 2013 में रिलीज हुई थी। हाल ही में डेविड धवन ने कहा कि उन्होंने इसे गुस्से में बनाया था, क्योंकि उन्हें लगा था कि बड़े स्टार्स उनके साथ काम करने में हिचकिचा रहे हैं। बता दें कि यह फिल्म साल 1981 की इसी नाम की कल्ट-क्लासिक फिल्म का रीमेक थी, जिसमें तापसी पन्नू, दिव्येंदु, सिद्धार्थ और पाकिस्तानी एक्टर अली फजल जैसे कलाकार थे। फिल्म को दर्शकों और आलोचकों से मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली।
एक्टर्स से झेलना पड़ा था रिजेक्शन
डेविड धवन को 'आंखें', 'राजा बाबू', 'हीरो नंबर 1', 'मैंने प्यार क्यों किया', 'पार्टनर' और 'मैं तेरा हीरो' जैसी फिल्मों के लिए जाना जाता है। डेविड धवन ने बीती रात एक इवेंट में कहा, 'मैंने फिल्म 'चश्मे बद्दूर' गुस्से में बनाई थी। चिंटू जी (ऋषि कपूर) का इसमें मुश्किल से ही कोई रोल था, लेकिन मैंने जिद की कि वे मेरे लिए यह रोल करें। इसमें हमारे साथ तीन नए लड़के और एक लड़की थी। डेविड धवन से जब पूछा गया कि क्या उन्हें अपने करियर के किसी मोड़ पर एक्टर्स से रिजेक्शन का सामना करना पड़ा था? इस पर निर्देशन ने हां में जवाब दिया और कहा कि उन्हें महसूस होता था कि स्टार्स उनके साथ काम करने में हिचकिचाते थे।
दो एक्टर्स के साथ काम करना आसान नहीं
डेविड धवन के मुताबिक रिजेक्शन की मुख्य वजह यह थी कि उनकी फिल्में कमर्शियली अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रही थीं। उन्होंने कहा, 'मैं स्टार्स के साथ काम करने के एक ही ढर्रे से बाहर निकलना चाहता था। अगर कोई डायरेक्टर अच्छी स्क्रिप्ट, सीन, डायलॉग लिख सकता है और उसके पास एक अच्छा गाना है, तो वह नए कलाकारों के साथ फिल्म क्यों न बनाए? स्टार्स फिल्म बनाने की प्रक्रिया में दखल देते हैं और इसके ऊपर, दो एक्टर्स के साथ काम करना बिल्कुल भी आसान नहीं होता'।
गोविंदा के साथ काम करने पर कही ये बात
डेविड धवन ने गोविंदा के साथ सबसे ज्यादा काम किया है। उन्होंने गोविंदा को 17 कॉमेडी फिल्मों में डायरेक्ट किया, जिनमें 'शोला और शबनम', 'आंखें', 'राजा बाबू', 'कुली नंबर 1', 'हीरो नंबर 1', 'पार्टनर' और कई अन्य हिट फिल्में शामिल हैं। गोविंदा के साथ अपने लंबे जुड़ाव के बारे में बात करते हुए डेविड धवन ने कहा कि वे इंडस्ट्री के एकमात्र ऐसे एक्टर हैं, जिन्होंने उनकी फिल्मों की सफलता या असफलता के आधार पर उनके साथ काम करने का फैसला कभी नहीं किया। डेविड धवन ने कहा, 'एक एक्टर ऐसा है, जिसने कभी यह नहीं देखा कि मेरी फिल्में चलीं या नहीं। और वह है गोविंदा। मुझे याद है जब मेरी एक फिल्म नहीं चली थी, तो मैं परेशान था। गोविंदा ने कहा, ‘एक स्क्रिप्ट लिखो, दुखी मत हो।’ फिर मैंने ‘शोला और शबनम’ लिखी।
बोले- 'एक्टर्स किसी के प्रति वफादार नहीं होते'
डेविड धवन ने एक्टर्स को लेकर अपनी राय बेबाकी से रखी और कहा कि वे किसी के भी प्रति 'वफादार' नहीं होते। उन्होंने कहा, 'मैंने अमिताभ बच्चन, विनोद खन्ना, राज बब्बर, ऋषि कपूर, संजय दत्त, गोविंदा और सलमान खान के साथ काम किया है। आमतौर पर फिल्म को अभिनेता ही चलाते हैं। अगर एक निर्देशक के तौर पर आपकी फिल्म नहीं चलती, तो अभिनेता अगली फिल्म की ओर बढ़ जाता है। अभिनेताओं की यह नस्ल ऐसी है कि वे किसी के नहीं होते। उनकी किसी के प्रति कोई वफादारी नहीं होती'। बात करें 'है जवानी तो इश्क होना है' की तो यह 05 जून को थिएटर्स में दस्तक देगी।