'हनुमान' बन घर-घर में पूजे गए
दारा सिंह को रामानंद सागर के पौराणिक धारावाहिक ‘रामायण’ में हनुमान जी का किरदार निभाकर ऐसी लोकप्रियता मिली कि उन्हें लोग पूजने लगे। इस किरदार के लिए उन्होंने मांसाहार तक छोड़ दिया था। ये रोल भारतीय टेलीविजन इतिहास में अमर हो गया और हनुमान के रोल में हमेशा दारा सिंह को ही देखा जाने लगा।
पर्दे के पीछे भी दिखाया हुनर
बहुत कम लोग जानते हैं कि एक्टर होने के साथ-साथ दारा सिंह एक सफल निर्देशक और लेखक भी रहे। उन्होंने पंजाबी और हिंदी में कई फिल्मों का निर्देशन किया, जिनमें ‘नानक दुखिया सब संसार’, ‘मेरा देश मेरा धर्म’, ‘रुस्तम’, ‘सवा लाख से एक लड़ाऊं’ जैसी फिल्में शामिल हैं। साल 1989 में उन्होंने ‘मेरी आत्मकथा’ नामक आत्मकथा लिखी, जो 1993 में हिंदी में प्रकाशित हुई।
राजनीति में भी रखा कदम
साल 1998 में दारा सिंह ने बीजेपी जॉइन की और 2003 से 2009 तक राज्यसभा के मनोनीत सदस्य रहे। वो पहले खिलाड़ी थे, जिन्हें राज्यसभा के लिए नामांकित किया गया था। इसके अलावा वे जाट महासभा के अध्यक्ष भी रहे हैं।
दारा सिंह की शादी
दारा सिंह की पहली शादी महज 14 साल की उम्र में बचनो कौर से हुई थीं। वो 17 साल की उम्र में ही पिता बन गए थे। बचनो के साथ दारा सिंह के एक बेटे प्रद्युमन सिंह रंधावा ने जन्म लिया। उनके कुल 6 बच्चे थे- इनमें तीन बेटे और तीन बेटियां शामिल हैं।
दारा सिंह की दूसरी शादी साल 1961 में सुरजीत कौर से हुई थी। ये एक पारंपरिक अरेंज मैरिज थी। इसी शादी से उनके बेटे विंदू दारा सिंह भी हुए, जो कि एक मशहूर अभिनेता हैं और उन्होंने भी रेसलिंग और अभिनय की दुनिया में कदम रखा।
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