क्षत्रिय परिषद ने क्या कहा?
क्षत्रिय परिषद ने राजपूत इतिहास को हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने पर विरोध किया है। संगठन का कहना है कि ऐसी कोशिशें चुनावी या वैचारिक मकसद से की जा रही हैं। सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में संगठन ने इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया कि राजपूत पहचान को एक बार फिर राजनीतिक नैरेटिव में घसीटा जा रहा है।
सोशल मीडिया पर जारी किया बयान
क्षत्रिय परिषद की तरफ से एक्स अकाउंट पर एक बयान जारी किया गया है। इसमें लिखा है, 'हम नीरज यादव और अजय देवगन की आने वाली फिल्म 'चौहान' में मौजूदा सांप्रदायिक राजनीति के लिए 'चौहान' कुल के नाम का इस्तेमाल करने की कोशिश की कड़ी निंदा करते हैं। राजपूत इतिहास कोई राजनीतिक हथियार नहीं है। चौहानों की विरासत राजपूत इतिहास का हिस्सा है, न कि चुनावी नैरेटिव या बाहरी लोगों द्वारा खड़े किए गए विवादों का। हम वैचारिक मकसदों के लिए राजपूत पहचान को हथियार बनाने की हर कोशिश को खारिज करते हैं।
संगठन ने उदाहरण के साथ रखी बात
संगठन ने कहा कि ऐसी बातें भारतीय इतिहास की अज्ञानता को दिखाती हैं और भारतीय उपमहाद्वीप के अतीत को सरल सांप्रदायिक बंटवारे में नहीं बांधा जा सकता। क्षत्रिय परिषद ने उन मौकों के उदाहरण भी दिए जब अफगान और राजपूत एक साथ लड़े थे। संगठन ने बताया, 'महमूद लोदी खानवा की लड़ाई में महाराणा सांगा के नेतृत्व में लड़ा था। हकीम खान सूर ने हल्दीघाटी में महाराणा प्रताप की सेना की एक टुकड़ी की कमान संभाली थी। फरीद खान, जो बाद में शेरशाह सूरी बना, अपने शुरुआती दौर में राजा रायसल शेखावत के अधीन सैन्य सेवा से जुड़ा था और महाराजा विक्रमादित्य तोमर पानीपत की पहली लड़ाई में लोदी सेना के साथ लड़ते हुए शहीद हुए थे।
मेकर्स से की यह अपील
फिल्म में एक डायलॉग है, 'पठानों से कहना चौहान आ रहा है'। इस पर आपत्ति जताई जा रही है। यह फिल्म कश्मीर की पृष्ठभूमि पर है। यह संवाद भी कश्मीरियों को पठान कहने की कोशिश के संदंर्भ में है। इसी को लेकर फिल्म का विरोध हो रहा है। परिषद ने अपील करते हुए लिखा है, 'ऐतिहासिक पलों को सांप्रदायिक हिंसा का जरिया नहीं बनाना चाहिए। हम राजनीतिक हस्तियों और फिल्म निर्माताओं से अपील करते हैं कि वे भारत के इतिहास के साथ जिम्मेदारी से पेश आएं। ऐतिहासिक जटिलताओं का सम्मान करें, न कि विभाजनकारी राजनीतिक बहस के लिए राजपूत विरासत का इस्तेमाल करें'।