एक्टिंग के बाद अचानक निर्देशन में कैसे हाथ आजमाया? 'दादा लखमी' का ख्याल कैसे आया?
यशपाल शर्मा ने कहा, 'मुझे बॉलीवुड में बहुत उकताहट हो गई थी। हमेशा ही होती है, क्योंकि आप थिएटर में मुख्य रोल करते हो। आपकी पूरी बॉडी चार्ज रहती है थिएटर करते हुए। और, यहां 'सिंह इज किंग', 'राउडी राठौर' करो तब तो लोग पहचानते हैं। नहीं तो इतनी सारी फिल्में अवॉर्ड मिलकर खत्म हो जाती हैं। तो मैं तंग आ गया था। मुझे संतुष्टि नहीं मिलती थी। इतना थिएटर किया। रात दिन हम थिएटर में मरे जा रहे थे। 'गंगाजल', 'अपहरण', 'अब तक छप्पन', 'वेलकम टू सज्जनपुर' कुछ ऐसी फिल्में मिल गईं। अवॉर्ड मिल गए। लेकिन, मैंने सोचा यार थिएटर टाइप कोई फिल्म बनानी चाहिए। एक फोक आर्टिस्ट 'दादा लखमी' हैं, उन पर फिल्म बनाई। मुझे लगा कि यह काम मैं खुद करूंगा। मैं खुद डायरेक्टर, एक्टर, प्रोड्यूसर सब रहूंगा, क्योंकि उसके बिना मैं मन का काम नहीं कर पाऊंगा। कुदरती मुझे मेरे मन का प्रोड्यूसर मिल गया। आधा पैसा उसने आधा मैंने लगाया। मन का राइटर मिल गया। आधा मैंने, आधा उसने लिखा'।
'पांच साल तक दादा लखमी के कॉस्टूम में रहा'
यशपाल शर्मा ने आगे कहा, 'एक्टिंग की बात है तो मेरी एक्टिंग इस फिल्म में बस 20 मिनट है। बाकी पार्ट 2 में आएगा। मैं पांच साल धोती-कुर्ते में 'दादा लखमी' के कॉस्ट्यू में रहा हूं। बीच में एक-दो फिल्म कर ली। फिर, छह महीने हरियाणा चला गया। इस फिल्म का सारा पोस्ट-प्रोडक्शन कोरोना में किया। नेशनल अवॉर्ड मिल गया। 107 इंटरनेशनल अवॉर्ड मिल गए। कान फेस्टिवल में भी दिखाई गई। नाम बहुत हुआ। हरियाणा में बच्चे बच्चे की जुबान पर आ गया था। एक बंदा भी ऐसा नहीं मिला, जिसने दादा लखमी की बुराई की हो। ऐसे पांच हजार बुजुर्ग थे, जो कभी सिनेमाघर नहीं गए थे। वे भी सिनेमाघर आए थे। जेन-जी तो दूसरी दुनिया में हैं। उन्हें कई लोगों का नहीं पता। प्रेमचंद का नहीं पता। लेकिन, उनकी गलती नहीं है। रील का जमाना आ गया। 20 सेकंड में सब चाहिए तो कहां किताबें पढ़ेंगे। मगर, ऐसे में भी कुछ लोगों ने खुद को संभाल रखा है।
'लोग पूछते हैं दादा लखमी का पार्ट 2 कब बनेगा'
यशपाल शर्मा ने आगे कहा, 'फिल्म 'दादा लखमी' के पार्ट वन में एक्टर कम हैं, डायरेक्टर ज्यादा है। मुझे पता था कि टेक्निकली हरियाणवी फिल्म बहुत वीक होती हैं। मगर, 'दादा लखमी' टेक्निकली बहुत मजबूत है। यह ढाई घंटे की फिल्म है और खत्म होने के बाद लोग कहते हैं अरे खत्म हो गई। लोगों का सवाल होता है कि पार्ट 2 कब बनेगा?
आने वाले प्रोजेक्ट कौन से हैं?
यशपाल शर्मा ने अपने आगामी प्रोजेक्ट के बारे में बताया कि एक तो 'सिविल लाइन' वेब सीरीज में नजर आऊंगा। इसके प्रोड्यूसर गोल्डी बहल हैं। फिर, 'दुपहरिया 2' आएगी, प्राइम वीडियो पर। नेटफ्लिक्स पर 'ग्लोरी' आएगी। अभी इसी महीने 'वेटिंग' आएगी। पहले इसका नाम 'तत्काल' था। यह रेलवे पर आधारित है। वहीं, 'वेकलम' फिल्म है। बाकी कई प्रोजेक्ट हैं, इन पर काम चल रहा है, इसलिए ज्यादा नहीं बता पाऊंगा।
ओटीटी से क्रिएटिव संतुष्टि बढ़ी है?
इस पर यशपाल शर्मा ने कहा, 'थोड़ा नहीं, बहुत संतुष्टि मिली है। ओटीटी के आने से सारे पंख खुल गए हैं। पहले सिर्फ दिलीप कुमार, धर्मेंद्र, अमिताभ बच्चन यही हुआ करते थे। वहां जाना ही सपना था। छोटे गांव वाले सोच भी नहीं सकते थे। आज तो एक 'भिखारिन' भी गाना गा दे तो वह भी फेमस हो जाती है। हालांकि, ओटीटी का एक नुकसान भी समझ सकते हैं कि युवा पीढ़ी को यहां उकसाने वाले कंटेंट की भरमार है। गाली, डबल मीनिंग के गाने, यह सब है। एक्टिंग का क्राइटेरिया ही गाली देना हो गया है। हिंसा काफी ज्यादा है। हालांकि, 'धुरंधर' सबको पसंद आ रही है। लेकिन, क्या करें अभी मोबाइल सबके हाथ में आ गए हैं। इसका दस फीसदी भी फिल्म में नहीं है।