सनी देओल और अक्षय खन्ना अभिनीत फिल्म 'इक्का' में तिलोत्तमा शोम ने पहली बार वकील की भूमिका निभाई है। अमर उजाला से खास बातचीत में उन्होंने शूटिंग के दौरान का एक ऐसा किस्सा साझा किया, जो आज भी उनके जेहन में ताजा है। इसी बातचीत में उन्होंने फिल्म चुनने की वजह, 'ढाई किलो का हाथ' वाला मशहूर संवाद बोलने की घबराहट, अक्षय खन्ना के साथ काम करने का अनुभव, न्यूयॉर्क की राइकर्स आइलैंड जेल में कैदियों के साथ किए गए काम और अपनी आने वाली फिल्म पर भी खुलकर बात की।
इक्का
- फोटो : वीडियो ग्रैब
आंख पर बैठी मक्खी भी नहीं हटाई, ताकि मेरा सीन बीच में न रुके
तिलोत्तमा कहती हैं, 'यह घटना शायद मैं कभी नहीं भूल पाऊंगी। हम एक सीन की शूटिंग कर रहे थे। पहले सनी सर का हिस्सा शूट हुआ। फिर कैमरा मेरी तरफ आ गया। सनी सर बिल्कुल मेरे सामने खड़े थे और मैं अपना लंबा संवाद बोल रही थी। इसी दौरान कई मक्खियां उनके चेहरे के आसपास मंडराने लगीं। फिर एक मक्खी उनकी आंख के बिल्कुल किनारे जाकर बैठ गई। मैं मन ही मन सोच रही थी कि अब तो शूटिंग जरूर रोक दी जाएगी, क्योंकि ऐसी स्थिति किसी के लिए भी असहज हो सकती है। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सनी सर बिना जरा भी विचलित हुए वहीं खड़े रहे। उन्होंने तब तक कुछ नहीं कहा, जब तक मेरा पूरा संवाद खत्म नहीं हो गया। सीन खत्म होने के बाद मैंने उनसे पूछा, 'आपने शूटिंग क्यों नहीं रुकवाई?' उन्होंने मुस्कुराकर कहा, 'तुम बहुत अच्छा कर रही थीं। मैं नहीं चाहता था कि तुम्हारा सीन बीच में रुक जाए।' वह चाहते तो एक सेकेंड में शूटिंग रुकवा सकते थे। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। उस दिन मैंने सीखा कि एक अच्छा सह-कलाकार वही होता है, जो अपने साथी कलाकार की परफॉर्मेंस का भी उतना ही ख्याल रखे।'
इक्का
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पर्दे के 'एक्शन हीरो', असल जिंदगी में बेहद शांत और शर्मीले
सनी देओल के बारे में वह कहती हैं, 'इस फिल्म से पहले हमारी कभी मुलाकात नहीं हुई थी। इसलिए शुरुआत में मैं सिर्फ उनके काम करने के तरीके को समझना चाहती थी। साथ ही उन्हें पूरा स्पेस भी देना चाहती थी, लेकिन पहले ही दिन मेरी सारी झिझक खत्म हो गई। सनी सर बेहद शांत, संकोची और सहज इंसान हैं। उनके साथ काम करते हुए कभी असहज महसूस नहीं हुआ। वह कम बोलते हैं, लेकिन उनके व्यवहार में एक अपनापन है। शायद यही वजह है कि उनके साथ काम करना बहुत आसान लगा।'
तिलोत्तमा शोम
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'ढाई किलो का हाथ' वाला संवाद सुनते ही घबरा गई थी
इस किस्से को याद करते हुए अभिनेत्री बताती हैं, 'शुरुआत में 'ढाई किलो का हाथ' वाला संवाद स्क्रिप्ट में था ही नहीं। मैंने फिल्म के लिए हां कह दी थी। बाद में जब मैं मिस्र में थी, तब सिद्धार्थ ने बताया कि यह लाइन जोड़ी गई है और इसे मुझे बोलना है। मेरी पहली प्रतिक्रिया यही थी, 'क्या आप सच में ऐसा चाहते हैं? यह तो सनी सर का आइकॉनिक संवाद है। अगर मैंने इसे ठीक से नहीं कहा, तो उनके प्रशंसक मुझे बिल्कुल नहीं छोड़ेंगे।' फिर हमने काफी देर तक इस पर बात की। कोशिश यही थी कि यह संवाद किसी पंचलाइन की तरह नहीं, बल्कि सामान्य बातचीत का हिस्सा लगे। शूटिंग से पहले मैंने खुद सनी सर से पूछा, 'मैं यह संवाद बोल रही हूं, आपको कोई आपत्ति तो नहीं है?' उन्होंने मुस्कुराकर कहा, 'बिल्कुल नहीं... इसे अपने अंदाज में कहो।' उनके इतना कहते ही मेरी सारी घबराहट खत्म हो गई। उसके बाद यह सीन एक-दो टेक में ही पूरा हो गया।'
तिलोत्तमा शोम
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स्क्रिप्ट बाद में पढ़ी, पहले निर्देशक के भरोसे पर फिल्म के लिए हामी भर दी
फिल्म चुनने की वजह बताते हुए वह कहती हैं, 'सच कहूं तो मैंने स्क्रिप्ट पढ़ने से पहले ही फिल्म के लिए हां कह दी थी। इसकी सबसे बड़ी वजह निर्देशक सिद्धार्थ का मुझ पर भरोसा था। उन्होंने जिस भरोसे के साथ मुझे यह किरदार दिया, उससे मुझे लगा कि उन्हें पूरा यकीन है कि मैं इसे निभा सकती हूं। जब स्क्रिप्ट पढ़ी तो सबसे ज्यादा खुशी इस बात की हुई कि मैं पहली बार वकील का किरदार निभा रही हूं। एक अभिनेता के तौर पर मैं हमेशा ऐसे किरदार करना चाहती हूं, जो मुझे कुछ नया सिखाएं। बतौर दर्शक मुझे कोर्टरूम ड्रामा और मर्डर मिस्ट्री हमेशा से पसंद रहे हैं। लेकिन पहली बार ऐसी फिल्म का हिस्सा बनना मेरे लिए बिल्कुल नया अनुभव था। इस फिल्म की वजह से मुझे कानून की दुनिया, उसकी भाषा और उसकी बारीकियों को समझने का मौका मिला।'
फिल्म 'इक्का'
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अक्षय खन्ना सेट पर आते ही पूरी तरह किरदार में उतर जाते थे
अक्षय खन्ना के साथ काम करने के अनुभव पर वह कहती हैं, 'अक्षय के साथ मेरा अनुभव बिल्कुल अलग रहा। मैंने पहले कभी उनके साथ काम नहीं किया था। इस फिल्म में वह सेट पर आते ही पूरी तरह अपने किरदार में उतर जाते थे। मैंने उन्हें लगभग हमेशा उसी किरदार में देखा। मैं उनके काम करने के तरीके का सम्मान करना चाहती थी। इसलिए उन्हें कभी परेशान नहीं किया। मैं खुद भी बहुत ज्यादा मिलनसार नहीं हूं। लेकिन पहली बार जब मैंने उनके साथ सीन किया और उनकी आंखों में देखा, तो लगा कि उनमें एक अलग ही इंसानियत है। वह सिर्फ शानदार अभिनेता ही नहीं, बल्कि बेहद संवेदनशील इंसान भी हैं।'
तिलोत्तमा शोम
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राइकर्स आइलैंड जेल में कैदियों के साथ काम करना जिंदगी की बड़ी सीख थी
बहुत कम लोग जानते हैं कि अभिनय की दुनिया में आने से पहले तिलोत्तमा ने जेल में कैदियों के साथ ड्रामा थेरेपी पर काम किया था। इस बारे में उन्होंने कहा, 'कॉलेज के दौरान मैं करीब दो साल तक न्यूयॉर्क की राइकर्स आइलैंड जेल जाती रही। वहां मैंने पुरुष और महिला, दोनों कैदियों के साथ ड्रामा थेरेपी पर काम किया। वह अनुभव मेरे लिए जिंदगी की सबसे बड़ी सीख में से एक रहा। अक्सर कहा जाता है कि मैंने सिर्फ मर्डर कन्विक्ट्स के साथ काम किया था, जबकि ऐसा नहीं है। वहां अलग-अलग अपराधों में सजा काट रहे लोग थे। उनकी सजा भी उनके अपराध के हिसाब से अलग-अलग थी।'
तिलोत्तमा शोम
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अब थोड़ा एक्शन भी करती नजर आऊंगी
अपनी अगली फिल्म को लेकर तिलोत्तमा ने कहा, 'फिलहाल मैं अपनी नई फिल्म की तैयारी कर रही हूं। उसमें दर्शकों को मेरा थोड़ा एक्शन वाला रूप भी देखने को मिलेगा। अभी उससे ज्यादा कुछ नहीं बता सकती। लेकिन उसे लेकर मैं काफी उत्साहित हूं।'