सनी लियोनी, राहुल भट्ट और अनुराग कश्यप
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फिल्म का कौन सा अनुभव सबसे खास रहा?
अनुराग सर ने मुझसे कहा था कि चार्ली की हंसी बिल्कुल वैसी ही चाहिए जैसी वह कल्पना कर रहे हैं। इस हंसी को अपने भीतर लाना मेरे लिए आसान नहीं था। मुझे हर जगह हंसना पड़ता था। कार और लिफ्ट में भी हंसना पड़ता था। सेट पर इतने लोग होते थे कि वे मुझे देखकर सोचते थे कि मैं क्यों हंस रही हूं। कई बार मुझे लगता था कि लोग मुझे पागल समझ रहे होंगे।
सच कहूं तो यह बात मुझे और मजेदार लगती थी क्योंकि मुझे मस्ती करना पसंद है और यह चार्ली वाली मस्ती एक अलग तरह की आजादी देती थी। धीरे-धीरे वह हंसी मेरे भीतर बस गई। इससे मैं चार्ली को गहराई से महसूस कर पाई। ये बात मैं कभी भूल नहीं सकती।
क्या अनुराग कश्यप के सामने अपनी बात रखना आसान होता है?
अनुराग कश्यप के साथ काम करते हुए मैं हमेशा सुरक्षित महसूस करती थी। बाहर से लोग सोचते हैं कि वह गंभीर या कठोर होंगे। लोग उनकी फिल्मों या कहानियां देखकर उनके बारे में एक इंटेंस पर्सनालिटी की छवि बना लेते हैं। पर असल में वह बहुत नरमदिल व्यक्ति हैं। उनके सामने बैठकर बात करते समय हमेशा लगता था कि मेरी बात को महत्व मिल रहा है।
हर कलाकार को यह एहसास नहीं मिलता कि उसे सुना जा रहा है। उन्होंने मुझे वही बनने दिया जो मैं उस पल बनना चाहती थी। यही वजह है कि उनसे जुड़ा हर अनुभव मेरे दिल में खास जगह रखता है।
जब इस फिल्म को कान फिल्म फेस्टिवल में एंट्री मिली तो पहला रिएक्शन क्या था?
उस वक्त जो खुशी मिली थी उसे शब्दों में नहीं बांधा जा सकता। वहां मुझे एक छोटा सा कागज मिला था, जिसमें मेरी सीट का नंबर लिखा था। वही मेरे लिए सबसे बड़ा अवॉर्ड था। उस टिकट को मैंने आज भी एक किताब के भीतर संभाल कर रखा है।
क्या आपको लगता है कि आपकी बायोपिक का सेकंड पार्ट आना चाहिए ?
बिल्कुल, मेरी बायोपिक 'करणजीत कौर: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ सनी लियोनी’ 2018 में रिलीज हुई थी। उस वक्त प्रोडक्शन के कुछ मसलों के चलते इसका दूसरा भाग नहीं आ सका पर मेरी अपनी कहानी में अब भी बहुत सारे अध्याय बाकी है, जिन्हें दुनिया ने न देखा न सुना है। मौका मिला तो मैं अवश्य अपना जीवन फिर से खोलकर रखना चाहूंगी।
सफलता की सबसे बड़ी परिभाषा क्या है? अवॉर्ड्स कितने मायने रखते हैं?
मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं यहां तक पहुंचूंगी। एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में जब आप दूसरों की सफलताए देखते हैं, तो मन में एक छोटी सी इच्छा उठती है। लगता है कि काश मुझे भी कोई ऐसा अवसर मिले जिसमें मुझे पहचान मिले। यह भावना हर कलाकार के भीतर होती है और मेरे भीतर भी थी। लेकिन मैंने कभी कल्पना नहीं की थी कि मैं एक दिन यहां बैठकर अपने प्रोजेक्ट के बारे में इस तरह बात करूंगी।
15 वर्ष हो चुके हैं और मैं बहुत खुश हूं कि मैं इस मुकाम पर हूं। मेरे जीवन में ऐसे लोग हैं जो हर कदम पर मुझे ऊपर उठाते हैं और आगे बढ़ने की ताकत देते हैं। मैं खुद को बेहद सौभाग्यशाली मानती हूं।