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Shradha Mishra Interview: 'जीत और ट्रॉफी मेरे हिस्से थी, यकीन नहीं हो रहा', बोलीं सारेगामापा की विनर श्रद्धा

Sun, 19 Jan 2025 12:05 AM IST
ज्योति राघव एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

Shradha Mishra Interview: सिंगिंग रियलिटी शो 'सा रे गा मा पा' की ट्रॉफी श्रद्धा मिश्रा ने अपने नाम की है। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के आगरा की रहने वाली श्रद्धा ने 'अमर उजाला' के साथ शो के मंच तक पहुंचने का सफर साझा किया। साथ ही बताए अपनी यात्रा के कुछ दिलचस्प किस्से। चलिए जानते हैं...
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श्रद्धा मिश्रा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सिंगिंग रियलिटी शो 'सा रे गा मा पा' के विनर का एलान हो चुका है। श्रद्धा मिश्रा ने ट्रॉफी अपने नाम की है। श्रद्धा मूल रूप से उत्तर प्रदेश की ताजनगरी यानी आगरा शहर से आती हैं। उनका आगरा से मुंबई और फिर सारेगामापा के मंच तक पहुंचने का सफर काफी दिलचस्प रहा है और काफी प्रेरित करने वाला भी। उनके इस सफर में उनका परिवार हमेशा साथ खड़ा रहा है। श्रद्धा का यह हुनर सबसे पहले उनकी दादी ने पहचाना। फिर, बेटी का सपना साकार करने के लिए माता-पिता का त्याग काबिले-तारीफ है। अपनी जीत के बाद श्रद्धा मिश्रा ने 'अमर उजाला' से खास बातचीत में कई दिलचस्प बातें साझा कीं। पढ़िए पूरा इंटरव्यू...

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श्रद्धा मिश्रा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
इस जीत के लिए आपको बधाई! 'सा रे गा मा पा'  में आपका सफर कैसा रहा?
शुक्रिया! सफर मेरा बहुत खूबसूरत रहा। वो कहते हैं न कि सफर खूबसूरत होता है मंजिल से भी। मैंने बिल्कुल भी मंजिल की चिंता नहीं की थी और शायद इसलिए भी सफर सुंदर रहा। मैंने बहुत कुछ सीखा और मेरा मकसद पूरा हो गया फाइनली। मैंने बहुत एंजॉय किया। बहुत सारे इमोशंस देखे और इस पूरी यात्रा में खुद को मैंने बहुत मजबूत किया है। हर यात्रा में कुछ उतार-चढ़ाव तो होते ही हैं। ऐसा यहां भी देखने को मिला, जैसे कि मेरे परफॉर्मेंस में ड्रॉप हुआ था, उसकी वजह से जो अनुभव हुआ, वह सीखने वाला रहा। मैं फेलियर से उठी हूं। मैंने बहुत सीखा है। वापस उठकर मैं वापस अपने लिए लड़ी हूं और मैंने वापस गाया। बहुत मेहनत की है। मुझे लगता है कि मैंने इससे बहुत सीखा, सबसे ज्यादा तो ये कि हमें कभी हार नहीं माननी चाहिए। मैं यहां आने के बाद भावनात्मक रूप से बहुत आत्मनिर्भर हुई, क्योंकि मम्मी-पापा से बहुत दूर रहना पड़ता है। बहुत मजबूत हुई हूं।

श्रद्धा मिश्रा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
संगीत में आपकी दिलचस्पी कैसे जागी? बचपन से शौक था या किसी को देखकर प्रेरणा मिली?
बचपन से कुदरती रहा, तब मेरी दादी और मेरी मम्मी ने बताया कि तुम सुर में गाती हो। मैं पहली कक्षा में पढ़ती थी तब ऐसे ही घर में घूम रही थी। दादी ने मुझे बुलाकर कहा कि तुझे एक भजन सिखाती हूं, तू बहुत टाइमपास करती है। अगले दिन मेरे स्कूल में फ्री पीरियड था। टीचर ने कहा कि कोई कुछ करना चाहता है? मैंने बोला हां मैं भजन सुनाना चाहती हूं। मैंने वहां भजन सुनाया। टीचर्स को बहुत अच्छा लगा तो तारीफ करते हुए कहा कि तुम बहुत अच्छा गाती हो। फिर पेरेंट्स टीचर मीटिंग में टीचर्स ने मेरी मम्मी से कहा कि इसे गाना सिखावाओ ये बहुत अच्छा गाती है। मम्मी ने मुझसे पूछा मैंने हां बोल दिया कि सीखूंगी। तब से मैंने जो गाना सीखने का सिलसिला शुरू किया तो अब तक सीख रही हूं। वो यात्रा वहां से शुरू हुई और बस सीखती जा रही हूं।

एक तरह से तो आपकी पहली गुरु आपकी दादी रही हैं? आपकी जीत पर उन्होंने क्या कहा है?
हां बिल्कुल! मेरी पहली गुरु मेरी दादी ही रहीं। उनके साथ मैं सत्संग में भी जाया करती थी तो वहां भी भजन सुनाती थी। सबको पसंद आता था। सा रे गा मा पा के सेट पर भी मेरी दादी आईं। उन्हें मुझे देखकर बहुत अच्छा लग रहा है। उन्होंने सा रे गा मा पा में मुझे लाइव गाते हुए भी देखा। मुझे वो दिन भी याद है जब वो मुझे भजन सिखा रही थीं और उन्हें भी याद है। मुझे यकीन है कि वो मुझ पर गर्व कर रही होंगी और मेरे ऊपर उनका आशीर्वाद हमेशा रहेगा।

श्रद्धा मिश्रा अपने माता-पिता के साथ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
आपने बताया कि आपका यह हुनर परिवार ने पहचाना और अब आप यहां तक पहुंची हैं तो जाहिर सी बात है कि उनका सहयोग भी मिला है। लेकिन, पारंपरिक पढ़ाई से अलग संगीत के क्षेत्र में करियर बनाने और फिर दूसरे शहर भेजने में परिवार का कितना सपोर्ट मिला?
मैं सही बताऊं तो मैंने सिर्फ सुना है कि माता-पिता अपने बच्चों का सपोर्ट नहीं करते हैं। मैंने अपने जीवन में कभी ऐसा नहीं देखा। मैं इसके लिए शुक्रगुजार हूं। मेरे पापा खुद आईआईटी के बच्चों को केमिस्ट्री पढ़ाते हैं। मेरी मम्मी साइकोलॉजिस्ट हैं। दोनों का ही संगीत से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है, तब भी उन्होंने मुझ पर भरोसा दिखाया कि मैं ये कर सकती हूं। ईश्वर ने मुझे सुरीला कंठ दिया है, शक्ति दी है कि मैं अपनी मेहनत से थोड़ा बहुत कर सकती हूं। मैं अपने माता-पिता के प्रति शुक्रगुजार हूं कि उन्होंने मुझे मुंबई भेजा। अभी तक वे मुझे बहुत सपोर्ट कर रहे हैं। सारेगामापा में भी सबने देखा कि उन्होंने मुझे कितना सपोर्ट किया है।

आपने संगीत की तालीम किससे ली?
आगरा में मेरे गुरु थे मनोज कुंडली सर। मैंने सबसे पहले उनसे सीखना शुरू किया। फिर मैं मुंबई आ गई। यहां आकर मैंने राजश्री पाठक से सीखा। नीति मोहन आदि ने भी उनसे सीखा है। उन्होंने मुझे बहुत अच्छे से सिखाया। अभी मेरे गुरु पंडित ललित मिश्रा जी हैं। उन्होंने भी मुझे आगे बहुत क्लासिकल संगीत सिखाया।

सा रे गा मा पा की विजेता श्रद्धा मिश्रा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
हमारे जीवन में एक गुरु की क्या भूमिका होती है, वह आपने बहुत करीब से महसूस किया है। उस पर कुछ बोलेंगी?
मुझे ऐसा लगता है कि गुरू के बिना मेरा जीवन बिल्कुल अधूरा महसूस होता है। ऐसा लगता है कि बैसाखी के सहारे चलने वाले किसी इंसान की बैसाखी निकाल दी गई हो। मैं एकदम लंगड़ा जाती हूं। बिल्कुल संतुलन बिगड़ जाता है और हिल जाती हूं। मैं हमेशा गुरू की तलाश करती रहती हूं। मुझे कहीं से भी सीखने को मिले मैं तुरंत सीखना चाहती हूं। सारेगामापा में भी जाने का मेरा यह मकसद था कि वहां बहुत सारे गुरू हैं जो आपको सिखा सकते हैं। मैंने संजय विद्यार्थी सर, सचिन वाल्मीकी सर, साहिल सर, विश्वजीत सर ये हमारे मेन्टॉर थे। और मैंने सोचा कि मैं कुछ नहीं करूं तो वहां जाकर बहुत कुछ सीखूंगी इतने बड़े बड़े लोगों से। फिर मुझे मेरे सचिन जिगर सर मिले, और सचेत-परंपरा मैम, तीनों मेन्टॉर से मैंने बहुत सीखा।

श्रद्धा मिश्रा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
'सा रे गा मा पा' में जाने का मौका कैसे मिला? जब आप प्रतियोगिता के लिए गई थीं तो क्या ऐसा सोचा था कि जीत आपकी झोली में आएगी?
नहीं, बिल्कुल नहीं! मैं घर पर ऐसे ही बैठी थी और मेरा बिल्कुल मेंटल ब्लॉक हो चुका था। कुछ समझ नहीं आ रहा था कि मैं अपने करियर में क्या करूं? मैं बतौर सिंगर रियाज कर रही थी। कोशिश कर रही थी। मेरे दोस्त ने कहा कि तुम्हें 'सा रे गा मा पा' के लिए ट्राई करना चाहिए। ऑडिशन हो रहा है तुम भी दे दो। मैंने कहा यार मैं रेडी ही नहीं हूं। वो लोग मुझे ऑडिशन में ही निकाल देंगे। उसने कहा कि तुम मुझे वीडियो भेजो मैं उन्हें भेज दूंगा। मैंने उसे वीडियो भेजे और वहां वो वीडियो सलेक्ट हो गए। उसके बाद मैं वहां गई लेवल 2 के लिए। मैंने इनहाउस ऑडिशन दिए और फिर मैं टीवी राउंड के लिए सलेक्ट हुई। मैं ऐसे सलेक्ट होती गई और सफर आगे बढ़ता रहा। मुझे पता ही नहीं चला कि कब ग्रैंड फिनाले के स्टेज पर पर खड़ी थी। बहुत-बहुत सीखने के बाद वहां जब खड़ी थी तो बस भगवान को याद कर रही थी। मैंने कभी सोचा ही नहीं था कि मैं जीतूंगी। मैंने कभी एक पल के लिए भी नहीं सोचा था कि मुझे ट्रॉफी चाहिए। बस हां जब मैंने आखिर में ट्रॉफी को देखा तो सोचा यार कितनी खूबसूरत ट्रॉफी है, अगर ये मेरे पास आ जाए तो कितना अच्छा रहेगा। मैंने अपनी यात्रा के लिए भगवान को शुक्रिया कहा। लेकिन, जीत और ट्रॉफी मेरे ही हिस्से में थी, इस बात का यकीन तो मुझे अभी तक नहीं हो रहा।

श्रद्धा मिश्रा अपने माता-पिता के साथ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
आपकी जीत के बाद परिवार का क्या रिएक्शन है? क्या कह रहे हैं बिटिया जीतकर आई है...
मेरे पापा ट्रॉफी को देख रहे हैं और मुझे प्यार करते हैं, बोलते हैं- बेटा थैंक्यू सो मच, तूने बहुत बड़ा काम किया है। ये ट्रॉफी मुझे घर पर देखकर इतना अच्छा महसूस होता है। पापा सबको बताते हैं कि मेरी बेटी 'सा रे गा मा पा' की विनर है। सभी बधाई देने आ रहे हैं। मम्मी-दादी बहुत खुश हैं। मेरा भाई फिनाले में मेरे साथ रहा। उसने फिनाले में मुझे लाइव गाते देखा। उसने मेरी जीत भी देखी है। दादी को फोन करके बताया है। वो भी इंतजार कर रहे थे कि कैसा रिजल्ट होगा, क्या होगा। जबसे उन्हें बताया है तो वो लोग बहुत-बहुत खुश हो गए हैं।

सचिन सांघवी और जिगर के साथ 'धोखेबाजी' गाना कंपोज किया। वह अनुभव कैसा रहा?
मुझे जब ये मिला तो मुझे यकीन ही नहीं हुआ। मुझे सा रे गा मा पा का पहला सॉन्ग (धोखेबाजी) मिला। वो भी सचिन जिगर सर मेरे लिए कंपोज करना चाहते थे, जिनके लिए मैं कब से चाहती थी कि मैं उनसे एक बार मिल भी पाऊं तो बहुत बड़ी बात होगी। उन्होंने मुझे अपना एक बहुत ही स्पेशल सॉन्ग दे दिया जो उन्होंने कंपोज किया। उन्होंने मेरी कला पर विश्वास किया, मुझ पर विश्वास किया। इसके लिए मैं बहुत शुक्रगुजार हूं। खुशी इस बात की भी है कि वह गाना लोगों को बहुत पसंद भी आ रहा है।

आप आप खुद एक चर्चित चेहरा बन चुकी हैं, लेकिन आपसे पूछें कि संगीत जगत में आप किस सिंगर से प्रभावित हैं, कौन है आपका फेवरेट?
फेवरेट की बात करें तो बहुत सारे वेस्टर्न कलाकार भी हैं। जैसे कि बियॉन्से, एरियाना ग्रांडे और माइकल बूबले, ऐसे बहुत सारे नाम हैं। हिंदुस्तानी पॉप म्यूजिक में, बॉलीवुड में सुनिधि मैम (सुनिधि चौहान) हमेशा से मेरी फेवरेट रही हैं। मैं बचपन से उन्हें देखती आ रही हूं जिस तरह से वो परफॉर्म करती हैं। अगर लाइव परफॉर्मेंस की बात करें तो मैंने सिर्फ सुनिधि मैम को देखा है। उनके अलावा श्रेया मैम (श्रेया घोषाल) से भी प्रेरणा मिली है।

किस बॉलीवुड अदाकारा के लिए गाना पसंद करेंगी? कोई ऐसी ख्वाहिश?
मैंने ऐसा नहीं सोचा कभी। मुझे सारी ही हीरोइनों के लिए गाना है। लेकिन, हां अगर मुझे आलिया भट्ट के लिए गाने का मौका मिले, क्योंकि वो मेरी फेवरेट हैं। अगर किसी गाने में उनकी आवाज बनने का मौका मिले तो वाकई खुशी की बात होगी।

श्रद्धा मिश्रा - फोटो : इंस्टाग्राम-@shradhamishramusic
आगे की क्या प्लानिंग है?
मेरी प्लानिंग के हिसाब से तो शायद कुछ चलेगा नहीं, लेकिन प्लान यही है कि मुझे बहुत सारे प्लेबैक में गाने गाने हैं। हर तरह के गाने गाने हैं। मैं इस मामले में अरिजीत सिंह से प्रेरित होती हूं। वे लोगों को जिस तरह की विविधता देते हैं वह एक अलग स्तर की बात है। मैं उस तरह की सिंगर बनना चाहती हूं, जो दर्शकों को विविधता दे। जितने भी गाने बनें, मैं चाहती हूं वो सब मैं गाऊं। खुद को बहुत आगे लेकर जाऊं। मेरे सामने कोई भी गाना आए मैं उसे एक ब्लेसिंग की तरह ले लेती हूं और उसे निभाने की कोशिश करताी हूं।

श्रद्धा मिश्रा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
आप आगरा से हैं और आपके बचपन का एक हिस्सा वहां बीता, कुछ यादें शेयर करना चाहेंगी? क्या अब भी आगरा जाना होता है?
आगरा मैं हर साल जाती हूं। हालांकि, इस बीच काफी टाइम से नहीं गई हूं। करीब एक साल। बहुत याद कर रही हूं। वहां की याद क्या बताऊं, मेरा तो बचपन वहां बीता है। सबकुछ जैसे छपा हुआ है मन में। बचपन में बाहर खेलने जाती थी अपने कजिन के साथ। मैं जॉइंट फैमिली में रहती थी। मेरी दादी हमें खाना खिलाती थीं। और बहुत प्यार करती थीं। हम सारे कजिन दिनभर खेलते रहते थे। पढ़ाई करते ही नहीं थे। दिनभर सिर्फ मौज-मस्ती। मैं थोड़ा-बहुत रियाज करती थी। फिर मैं यहां मुंबई आ गई, लेकिन आगरा की तो ढेर सारी यादें हैं। वहां का मेरा स्कूल सिम्बॉयजिया मुझे बहुत याद आता है। मैंने आगरा से छठी क्लास तक पढ़ाई की है। सातवीं क्लास से मैं मुंबई आ गई।

श्रद्धा मिश्रा - फोटो : इंस्टाग्राम-@shradhamishramusic
मुंबई आने और नए शहर में घुलने-मिलने का अनुभव कैसा रहा?
पहले मम्मी-पापा ने मुझे भेजा था मुंबई। मम्मी-पापा बाद में शिफ्ट हुए। मुंबई एकदम से नया हीं था। यहां मेरी नानी का घर है तो नानी के यहां हम हर साल गर्मी की छुट्टियों में आते ही थे। मेरे लिए कुछ नया नहीं था। शुरू में तो यहां रहने आना मेरे लिए अलग तरह का एक्साइटमेंट था कि मैं अपने मामा मामी के बच्चों के साथ रहने जा रही हूं। शुरुआत में खुशी थी, लेकिन बाद में पता चला कि मम्मी पापा से दूर रहना क्या होता है। उनकी कमी कोई पूरी नहीं कर सकता। यहां मेरी नानी और मामा-मामी ने हमेशा बहुत अच्छे से रखा और प्यार दिया। लेकिन मम्मी-पापा की कमी मुझे हमेशा महसूस हुई। और फिर मैंने एक दिन पापा को बुला लिया और पापा एक बार में आगरा छोड़ मुंबई आ गए।

तो पेरेंट्स को सिर्फ आपके लिए नए सिरे से मुंबई शिफ्ट होना पड़ा?
बिल्कुल! मेरे पापा ने मुझसे ज्यादा त्याग किए हैं। उन्होंने यहां आकर बिल्कुल नया सेटअप तैयार किया। वो प्रोफेसर हैं और आगरा में हमारे घर पर उनका पूरा कोचिंग सेंटर था। वहां पापा बहुत जाने-माने टीचर रहे। लेकिन, मुंबई आकर उन्हें पूरा नए सिरे से शुरुआत करनी पड़ी। वे बस से ट्रैवल करते थे। सबसे पूछते थे कि मैं आईआईटी केमिस्ट्री का प्रोफेसर हूं अगर आपको चाहिए हो तो आपके यहां आता हूं। मैंने उस वक्त गौर नहीं किया, लेकिन बाद में जाना कि पापा ने बहुत त्याग किए हैं।

श्रद्धा मिश्रा - फोटो : इंस्टाग्राम-@shradhamishramusic
आप युवाओं को क्या संदेश देंगी?
यही कहूंगी कि एक आर्टिस्ट बनने के लिए पहले एक अच्छा इंसान, एक प्योर सोल बनना बहुत जरूरी है। उसके लिए पहले मेहनत करती चाहिए। जितनी भी हमारे शरीर में गंदगी है- जैसे झूठ, छल-कपट ये सब हमें निकालकर साइड रखना पड़ेगा। एक अच्छा इंसान बनना पड़ेगा। उसके बाद एक अच्छा आर्टिस्ट बन सकते हैं, क्योंकि हम जो भी हैं वो हमारे काम में झलकता है।
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श्रद्धा मिश्रा - फोटो : इंस्टाग्राम-@shradhamishramusic
'सा रे गा मा पा' का कोई यादगार किस्सा बताना चाहेंगी?
यादगार किस्से तो बहुत सारे हैं। लेकिन, एक मेरा फेवरेट है। जिगर सर के साथ मेरी परफॉर्मेंस थी ऑन स्टेज। वो मैं कभी नहीं भूल सकती। सभी प्रतिभागियों ने आकर खूब तारीफ की। वह मेरा फेवरेट मूमेंट बन गया।
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