निर्देशक कुकू कोहली का निधन
- फोटो : सोशल मीडिया
बोले- 'स्कूल में मेरे सीनियर थे'
रजा मुराद कहते हैं, 'मुझे भी अचानक ही खबर मिली। रिपोर्ट्स में यही आ रहा है कि वह बिल्कुल ठीक थे, लेकिन फिर अचानक हार्ट अटैक आ गया। मैं तो उन्हें एक फंक्शन में अरुणा जी के साथ देख भी रहा था, जहां वह कंडोलेंस मीटिंग में जा रहे थे। वह बिल्कुल तंदुरुस्त लग रहे थे'।
कुकू मेरे स्कूल के सीनियर थे और मैंने उनकी पहली फिल्म 'फूल और कांटे' में काम भी किया था। इसलिए उनके साथ मेरा एक लंबा जुड़ाव रहा है।
'फिल्म 'फूल और कांटे' महत्वपूर्ण रोल था'
रजा मुराद ने कुकू कोहली के साथ मुलाकातों का दौर याद किया। उन्होंने कहा, 'मुलाकातें तो होती ही रहती थीं। वह मेरे स्कूल में मुझसे सीनियर थे। मैं बांद्रा में स्कूल में पढ़ता था। इसके अलावा वह राज साहब के असिस्टेंट भी रहे थे और राहुल रवैल के भी असिस्टेंट थे। मैंने राहुल रवैल के साथ भी फिल्में की हैं।
फिर उनकी पहली 'फिल्म फूल और कांटे' में मेरा बहुत महत्वपूर्ण रोल था। इस वजह से भी उनसे मेरा एक अलग जुड़ाव रहा'।
अरुणा ईरानी-कुकू कोहली
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'कम बात करते थे, अपने काम से काम रखते थे'
उनकी शादी अरुणा जी से हुई, यह तो पूरी दुनिया जानती है। लेकिन उनकी कोई औलाद नहीं थी। यह भी उनके लिए काफी दुखद बात रही।
वह बहुत साधारण से आदमी थे। कम बात करते थे, अपने काम से काम रखते थे। बहुत ज्यादा मिलना-जुलना या दिखावा करने वाले इंसान नहीं थे। वह अपने काम पर ध्यान देते थे।
उन्होंने भी बहुत ज्यादा फिल्में नहीं बनाईं। हमारे बीच एक प्रोफेशनल रिलेशनशिप थी।
'ठुकरा दिया था फिल्म का ऑफर'
'फूल और कांटे' से जुड़ी एक बात मुझे हमेशा याद रहेगी। उन्होंने पहले मुझे एक रोल ऑफर किया था, जिसमें केवल एक दिन का काम था। मैंने वह रोल करने से मना कर दिया था। बाद में वह रोल गोगा कपूर ने किया।
फिर उनका मेरे पास फोन आया और उन्होंने कहा कि मैं आपको सबसे अच्छा रोल दे रहा हूं। उन्होंने मुझे गोगा कपूर के भाई का रोल दिया था, जो अमरीश पुरी को मारता है।
उस वक्त अमरीश पुरी को फिल्म में मारना अपने आप में बहुत बड़ी बात थी। मेरा फिल्म में काफी अहम रोल था। मैं हमेशा उस रोल के लिए कुकू को याद करता हूं।
निर्देशक कुकू कोहली का निधन
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'जिस बुलंदी पर पहुंचना चाहिए था, वहां नहीं पहुंच पाए'
मुझे लगता है कि फिल्म की कामयाबी के बाद उन्हें जितनी फिल्में मिलनी चाहिए थीं, उतनी मिली नहीं। उसके बाद उन्होंने शादी भी कर ली। जितनी बुलंदियों पर उन्हें पहुंचना चाहिए था, वह वहां तक पहुंच नहीं पाए। यह बहुत अफसोस की बात है।
उनमें क्षमता थी और उन्होंने अपनी पहली ही फिल्म से अपनी पहचान बना ली थी। पहली ही फिल्म गोल्डन जुबली बनी, लेकिन उसके बाद उन्हें उस तरह की फिल्में नहीं मिलीं। उनका करियर जिस तरह आगे बढ़ना चाहिए था, उस तरह नहीं बढ़ पाया। यह बात आज उनके जाने पर और ज्यादा खलती है।