‘वागले की दुनिया’ फेम दिग्गज अभिनेता अंजन श्रीवास्तव की बेटी और थिएटर कलाकार रंजना अंजन इन दिनों अपनी पहली फिल्म ‘चांद तारा’ को लेकर चर्चा में हैं। फिल्म का ट्रेलर हाल ही में कान फिल्म फेस्टिवल में लॉन्च हुआ। फिल्म में रंजना, 17वीं सदी की मशहूर सिंगर और नृत्य कलाकार तारामती का किरदार निभा रही हैं।
रंजना अंजन
- फोटो : इंस्टाग्राम@ranjana.aanjjan
‘तारामती का भावनात्मक पक्ष मुझे सबसे ज्यादा करीब लगा’
हाल ही में अमर उजाला से बातचीत के दौरान रंजना ने फिल्म में अपने किरदार के बारे में बात करते हुए कहा, ‘तारामती एक ऐतिहासिक किरदार हैं। वह कुतुब शाही दौर की 17वीं सदी की मशहूर सिंगर और नृत्य कलाकार थीं। जो अब्दुल्ला कुतुब शाह के दरबार से जुड़ी थीं। उनके बारे में बहुत कम जानकारी उपलब्ध है। इसलिए उनके स्वभाव, सोच और पर्सनालिटी को समझने के लिए मुझे काफी हद तक अपने डायरेक्टर की दृष्टि और उनकी समझ पर भरोसा करना पड़ा।'
जो चीज मुझे उनसे सबसे ज्यादा जोड़ती है, वो उनकी इमोशंस हैं। समय चाहे कोई भी हो, इंसान के इमोशंस नहीं बदलते। एक कलाकार होने के बावजूद वो भी डर, दुख और उलझन महसूस करती होंगी। शायद कभी गलतियां भी करती होंगी। अपने हुनर में पूरी तरह डूबी होने के बावजूद उनका इंसानी पक्ष मुझे सबसे ज्यादा सच्चा और करीब लगा। वही जुड़ाव इस किरदार को निभाने में मेरी सबसे बड़ी ताकत बना।’
रंजना अंजन
- फोटो : इंस्टाग्राम@ranjana.aanjjan
‘कान में ट्रेलर लॉन्च होना बहुत भावुक पल था’
रंजना ने अपने थिएटर सफर के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा, ‘थिएटर ने मुझे सिर्फ एक्टिंग नहीं, बल्कि धैर्य, अनुशासन और अपने काम के प्रति ईमानदारी सिखाई है। वर्षों तक मंच पर काम करते हुए जो अनुभव और सीख मिली, वही मुझे यहां तक लेकर आई। कान जैसे बड़े मंच पर अपनी पहली फिल्म का ट्रेलर लॉन्च होते देखना मेरे लिए बहुत इमोशनल और गर्व का पल था। एक पल के लिए लगा कि वर्षों की मेहनत का फल मिला है। लेकिन दिल में आज भी यही लगता है कि यह मंजिल नहीं, बल्कि एक नई और खूबसूरत शुरुआत है।’
रंजना अंजन
- फोटो : इंस्टाग्राम@ranjana.aanjjan
‘पापा ने सिखाया कि हर कलाकार की अपनी अलग पहचान होती है’
रंजना ने अपने पिता अंजन श्रीवास्तव से मिली सीख के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा, ‘पापा ने हमेशा मुझे एक्टिंग को ईमानदारी और विनम्रता के साथ करने की सीख दी। मुझे आज भी याद है, पृथ्वी थिएटर में ‘हाउस ऑफ बर्नाडा अल्बा’ के एक मुश्किल शो से पहले उन्होंने मुझसे कहा था - ‘जो तुम कर सकती हो, वो सिर्फ तुम कर सकती हो और जो तुम्हारा को-एक्टर्स कर सकता है, वो उसकी अपनी खूबी है।’
इस बात ने मुझे बहुत प्रभावित किया। तभी समझ आया कि हर कलाकार अपनी अलग जर्नी और एक्सपीरियंस से बनता है। इसलिए किसी से तुलना करने की जरूरत नहीं है। यही सोच मुझे हर सीन से पहले अपने को-एक्टर्स के लिए सम्मान और अपने अंदर बैलेंस का एहसास देती है।’
रंजना अंजन
- फोटो : इंस्टाग्राम@ranjana.aanjjan
‘थिएटर मेरी जिंदगी का हिस्सा रहा है’
आज के दौर में जहां कई कलाकार सोशल मीडिया और छोटे वीडियो प्लेटफॉर्म के जरिए पहचान बना रहे हैं, वहीं रंजना मानती हैं कि थिएटर ने उन्हें कलाकार के तौर पर मजबूत बनाया। उन्होंने कहा, ‘मैंने थिएटर इसलिए किया क्योंकि मुझे थिएटर से प्यार है। मैं उसी माहौल में बड़ी हुई हूं और कहीं न कहीं वही मेरी जिंदगी का हिस्सा बन गया। लेकिन मुझे नहीं लगता कि कला का कोई भी माध्यम छोटा या बड़ा होता है। लोग वही रास्ता चुनते हैं, जहां तक उनकी पहुंच होती है। हर किसी को थिएटर या फिल्मों में काम करने का मौका नहीं मिलता। लेकिन अगर मौका मिले तो हर कलाकार अपने हुनर को और बेहतर बनाना चाहता है।
मैं खुद को खुशकिस्मत मानती हूं कि मुझे 15 साल तक मंच पर सीखने और काम करने का मौका मिला। मैं आगे भी थिएटर से जुड़ी रहना चाहूंगी। मेरी इच्छा है कि हमारे यहां भी थिएटर और परफॉर्मिंग आर्ट्स को उतनी ही अहमियत मिले, जितनी आज सोशल मीडिया को मिलती है।’