'किल' के बाद पहली बार लगा कि लोगों की नजर बदल गई
राघव कहते हैं कि संघर्ष उन्होंने पहले भी किया था, लेकिन 'किल' के बाद पहली बार उन्हें महसूस हुआ कि लोग उन्हें अलग नजर से देखने लगे हैं। 'जब आप एक कदम आगे बढ़ते हो तो सबको प्रूव करना पड़ता है। मां-बाप को भी और इंडस्ट्री को भी। मुझे भी प्रूव करना पड़ा। 'किल' के बाद मेरे लिए लोगों का परसेप्शन रातों-रात बदल गया। ऐसा बदलाव मैंने अपने एक्सपीरियंस में पहले कभी नहीं देखा था। कपिल शर्मा भाई ने भी मुझसे कहा था कि 'जो परसेप्शन चेंज तू कर रहा है, वो बहुत अलग है।' टीवी इंडस्ट्री के जितने भी लोग थे, सबने फोन किया। सब कह रहे थे कि पता नहीं क्यों, लेकिन ऐसा लग रहा था कि हमने भी ये क्रैक कर दिया। वो इमोशन मेरे लिए बहुत बड़ा था।'
फहाद फासिल का मैसेज आज भी नहीं भूले
बातचीत के दौरान जब उन कलाकारों का जिक्र आया जिन्होंने 'किल' देखने के बाद उनसे संपर्क किया, तो राघव बिना देर किए फहाद फासिल का नाम लेते हैं। 'बहुत लोगों के मैसेज आए, लेकिन इस वक्त सबसे पहले फहाद भाई का मैसेज याद आता है। उन्होंने लिखा था- 'Hi Raghav... This is Fahadh Faasil... a small time actor.' मैं पढ़कर शॉक्ड रह गया। उन्होंने बताया कि 'किल' में उन्हें मेरा रिद्म बहुत अच्छा लगा। इतने बड़े एक्टर का इस तरह आपको खुद मैसेज करना... ये सिर्फ एक एक्टर ही दूसरे एक्टर के लिए कर सकता है। वो मेरे लिए बहुत इमोशनल मोमेंट था।'
'16 साल तक साइड में रहा, लेकिन खुद पर भरोसा नहीं छोड़ा'
राघव मानते हैं कि उनके करियर की सबसे बड़ी ताकत टैलेंट से पहले आत्मविश्वास रहा। 'यही चीज मुझे मोटिवेट करती रही कि मैं हमेशा अपने ऊपर भरोसा करता रहा। इतने साल साइड में रहा, लेकिन मेरे अंदर से कभी ये चीज नहीं गई कि मुझे यही बनना है। मैं कभी मीडियोकर माइंडसेट में नहीं रहा। 16 साल बहुत लंबा वक्त होता है, लेकिन जब तुम अंदर से सोच लेते हो कि तुम यही हो, तो धीरे-धीरे बाहर भी वही होने लगता है।'
'रिजेक्शन मिले, फिल्मों से निकाला गया... लेकिन रुकना नहीं सीखा'
राघव अपने संघर्ष को किसी शिकायत की तरह नहीं, बल्कि सीख की तरह देखते हैं। 'लाइफ में अनफेयर चीजें होती हैं। जिंदगी कोई स्ट्रॉबेरी वर्ल्ड नहीं है। लोग अनफेयर होंगे। लेकिन बैठकर शिकायत करने से कुछ नहीं होगा। मेरे साथ भी बहुत कुछ हुआ। रिजेक्शन मिले, फिल्मों से निकाला गया। किसी एक्टर ने मना कर दिया तो काम चला गया। लेकिन बाद में एहसास हुआ कि ये सब एक बड़ी तस्वीर के छोटे-छोटे डॉट्स थे। जिस फिल्म के लिए मैं परेशान था, वो फिल्म बनी ही नहीं। हर बार उसके बाद कुछ बड़ा मिला। राफ्टिंग में भी रैपिड्स आते हैं, लेकिन अगर नदी पार करनी है तो पैडल मारते रहना पड़ता है। मूव ऑन करना पड़ता है।'
टीवी छोड़ना सबसे बड़ा दांव था, आज उसी फैसले पर गर्व है
राघव बताते हैं कि जब उन्होंने टीवी छोड़कर फिल्मों पर दांव लगाया, तब यह फैसला आसान नहीं था। 'जब मैं देहरादून से मुंबई आया था, तब मम्मी-पापा को भी नहीं पता था कि यहां क्या होगा। उस समय उनका सपोर्ट वैसा नहीं था, क्योंकि उन्हें इस दुनिया की समझ नहीं थी। लेकिन बाद में जब मैंने टीवी छोड़ने का रिस्क लिया, तब मैं खुद हैरान था कि वो मेरे साथ खड़े रहे। पैसे भी खत्म होने लगे थे, फिर भी उन्होंने मेरा साथ नहीं छोड़ा। आज वो सबसे ज्यादा खुश हैं। रोज लोगों को बताते हैं कि फिल्म आ रही है। रिश्तेदारों को फोन करके कहते हैं- 'मेरा बेटा बड़े पर्दे पर आ रहा है, टिकट लेकर देखना।' उनके चेहरे की खुशी देखकर लगता है कि 16 साल की मेहनत आखिर रंग ले आई।'
अब बारी लोगों को हंसाने की
संघर्ष और सफलता की बातें करने के बाद राघव अपनी नई फिल्म 'भाई तेरा स्टार है' पर आते हैं। उनके मुताबिक, फिल्म का नाम भी आम बोलचाल की उसी भाषा से निकला है, जो छोटे शहरों की पहचान है। 'फिल्म का टाइटल 'भाई तेरा स्टार है' है। हर शहर में हर कोई अपने लेवल का एक स्टार होता है। एक कहने की बात होती है- 'अरे भाई, तेरा स्टार है... मैं कर दूंगा।' छोटा सा भी काम हो तो लोग बोल देते हैं- 'अरे भाई, तेरा भाई स्टार है यार, मैं कर दूंगा... टेंशन मत ले।' बस वहीं से यह टाइटल आया। फिल्म में मेरा किरदार अजय अपने आपको बहुत कमाल का एक्टर समझता है, लेकिन असल में वह बिल्कुल टैलेंटेड नहीं है। बहुत खराब एक्टिंग करता है और सोचता है कि आगे जाकर बहुत बड़ा सुपरस्टार बनेगा। पैसों के चक्कर में फंस जाता है और फिर हर जगह अपनी खराब एक्टिंग से बचने की कोशिश करता है। यही उसकी सबसे बड़ी कॉमेडी है।'
वह अपने किरदार की तुलना खुद से करते हुए हंस पड़ते हैं। 'बहुत मेल खाता हूं। ये भी डिल्यूजनल है। इसे भी लगता है कि ये सुपरस्टार है और बहुत बढ़िया एक्टर है, मगर मैं इससे थोड़ा ज्यादा टैलेंटेड हूं। मैं रियल लाइफ में ऐसी एक्टिंग नहीं करता। लेकिन इस किरदार के लिए मुझे वो करना पड़ा, जो कभी गोविंदा की फिल्मों, 'हेरा फेरी' और 'जाने भी दो यारों' जैसी फिल्मों में देखने को मिलता था। मैं उस तरह की कॉमेडी वापस लाना चाहता हूं।'
सुनाया स्कूल का मजेदार किस्सा
इसी दौरान वह स्कूल का एक मजेदार किस्सा भी सुनाते हैं। 'एक बार दोस्त को बोला- 'भाई, लड़के मारने आ रहे हैं। अरे भाई, तेरा स्टार है यार... मैं तेरे साथ चलूंगा। कोई टच नहीं कर पाएगा।' वहां पहुंचे तो बहुत सारे लड़के आ गए... और सबने टच किया। बहुत पीटे थे। वही सबसे बड़ी किरकिरी हुई थी।'
'पहली लीड फिल्म से ज्यादा खुशी मम्मी-पापा के चेहरे पर दिखती है'
बातचीत खत्म होने से पहले जब पहली लीड फिल्म की बात आती है, तो राघव फिर अपने माता-पिता का जिक्र करते हैं। 'मैं बहुत इमोशनल हूं। मुझे सबसे ज्यादा खुशी इस बात की है कि मेरे मम्मी-पापा बहुत खुश हैं। उन्होंने देखा है कि मैं यहां तक कैसे पहुंचा हूं। फिल्म में निहारिका हैं, संजय सर हैं, विमान भाई हैं, बरखा, पार्वती, चंदन भाई जैसे इतने अच्छे कलाकार हैं। सबने फिल्म को अलग ही लेवल पर पहुंचा दिया है। मैं चाहता हूं कि लोग थिएटर में आएं और खुलकर हंसें। टीवी पर लोगों ने मुझे बहुत देखा है। अब मैं चाहता हूं कि लोग थिएटर में मेरा दूसरा रूप देखें।'