'मुझे स्क्रिप्ट देखकर लगा, दर्शक होती तो यह फिल्म जरूर देखती'
अमर उजाला से बातचीत में निहारिका बताती हैं कि फिल्म का ऑफर मिलते ही उन्हें इसकी कहानी पसंद आ गई। वह कहती हैं, 'मुझे स्क्रिप्ट बहुत अच्छी लगी। डायरेक्टर बहुत अच्छे लगे और पूरी टीम यंग और फ्रेश थी। राघव भी थे, इसलिए पूरा पैकेज ही एक्साइटिंग था। मैं हमेशा दर्शक के नजरिए से सोचती हूं। अगर मैं खुद ऑडियंस होती, तो क्या यह फिल्म देखने जाती? जब इसका जवाब 'हां' था, तभी मैंने फिल्म करने का फैसला लिया।'
'राघव जुयाल उड़ाते हैं मेरी इंग्लिश का मजाक'
सेट पर माहौल कैसा रहता था? इस सवाल पर निहारिका हंस पड़ती हैं। वह कहती हैं, 'राघव मेरी इंग्लिश और मेरे एक्सेंट का बहुत मजाक उड़ाता है। वैसे जब कोई साउथ से आता है तो लोग ऐसी चीजों पर मजाक कर ही लेते हैं। लेकिन यह सब बहुत पॉजिटिव तरीके से होता है। फिर मैं भी उसे छोड़ती नहीं हूं। हम दोनों एक-दूसरे की खूब खिंचाई करते थे। इसी वजह से सेट का माहौल हमेशा हल्का और मजेदार बना रहता था।'
'सोशल मीडिया स्टार्स को फिल्में क्यों मिलती हैं? मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता'
इंडस्ट्री में सोशल मीडिया फॉलोअर्स के आधार पर कास्टिंग होने की बहस पर निहारिका ने बेबाकी से अपनी राय रखी। वह कहती हैं, 'मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कौन क्या सोचता है। अगर मैं 10 साल से मेहनत कर रही हूं और मुझे अच्छी फिल्म मिल रही है तो मैं जरूर करूंगी। अगर अनफेयर की बात हो रही है, तो दुनिया ही अनफेयर है। इसे बदल नहीं सकते, इसलिए उसी हिसाब से अपना गेम खेलना चाहिए। अगर किसी को सोशल मीडिया से दिक्कत है तो वह भी सोशल मीडिया बना ले। मेरे बारे में कोई कुछ भी बोले, उसका ओपिनियन अपनी जगह सही हो सकता है। मैं लोगों की राय समझती हूं, लेकिन आखिर में करूंगी वही जो मुझे सही लगता है।'
'हमारे पास बार-बार असफल होने का मौका नहीं होता'
डिजिटल स्टार होने की वजह से लोगों की उम्मीदें भी अलग होती हैं। इस पर निहारिका कहती हैं, 'हर कदम पर खुद को साबित करना पड़ता है। हमारे पास सबके सामने बार-बार असफल होने का मौका नहीं होता। दूसरे लोगों को कई मौके मिल जाते हैं... लेकिन बाहर से आने वालों के लिए ऐसा नहीं होता। इसलिए मैं हमेशा बहुत सजग रहती हूं। लेकिन मुझे खुद पर भरोसा है कि मैं कुछ न कुछ रास्ता निकाल ही लूंगी। मैंने पांच भाषाएं सीखी हैं, इसलिए कहीं न कहीं काम जरूर मिल जाएगा।'
'एक गाने में मैंने बोल दिया- डांस कर लूंगी... फिर फंस गई'
शूटिंग का सबसे मजेदार किस्सा याद करते हुए निहारिका हंसते हुए कहती हैं, 'एक गाना शूट हो रहा था। मैंने बड़े कॉन्फिडेंस से कह दिया कि हां, मैं डांस कर लूंगी। बाद में जब शूट शुरू हुआ तो समझ आया कि मैंने खुद ही अपने लिए मुश्किल खड़ी कर ली। जब लोग गाना देखेंगे, तब उन्हें समझ आएगा कि मुझसे कितना क्रेजी डांस कराया गया है।'
'साउथ और हिंदी इंडस्ट्री में बड़ा फर्क नहीं, बस भाषा और कल्चर बदलता है'
साउथ फिल्मों में काम करने के बाद हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखने को लेकर निहारिका का नजरिया काफी सहज है। वह कहती हैं, 'सच बताऊं तो मुझे कोई बहुत बड़ा फर्क महसूस नहीं हुआ। बस भाषा अलग है और थोड़ा-सा कल्चर बदल जाता है। अच्छी कहानियां और अच्छा काम अब भाषा और बॉर्डर नहीं देखते। मुझे जहां भी अच्छे लोगों के साथ काम करने का मौका मिला, वहां का अनुभव शानदार रहा। सबसे जरूरी बात यह है कि मैं आज भी अपने काम को उतना ही एंजॉय करती हूं।'