इरफान खान और नवनीत बाज सैनी
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मुझे हीरो की तरह मत दिखाना
सेट पर पहले ही दिन इरफान साहब ने मुझसे साफ कहा कि उन्हें इस फिल्म में हीरो की तरह नहीं, एक नॉर्मल कैरेक्टर की तरह ट्रीट किया जाए। उनका मानना था कि यह आम आदमी की कहानी है और आम आदमी की तरह ही दिखनी चाहिए। वो कोई एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी चीज नहीं करना चाहते थे। उनका फोकस सिर्फ इस बात पर था कि दर्शक कुछ पल के लिए खुद को उस किरदार में देख सके। बाद में मुझे समझ में आया कि यही उनकी सबसे बड़ी खासियत थी।
जब तक स्क्रिप्ट अंदर नहीं उतरती, किरदार नहीं बनता
शूट शुरू होने से पहले उन्होंने बिना मेकअप मुझे कॉल किया और कहा कि हम पूरी स्क्रिप्ट को एक बार फिर से देख लेते हैं। उन्होंने कैरेक्टर की पूरी जर्नी पर चर्चा की और यह तय किया कि किरदार फिल्म के दौरान किस तरह बदलेगा।
वो डायरेक्टर के साथ खुलकर बात करते थे। शूट पर आने से पहले ही वो पूरी तरह क्लियर होते थे। अच्छी बात यह थी कि मुझे भी साफ पता होता था कि उन्हें क्या चाहिए। सेट पर कभी ऐसा नहीं हुआ कि हम एक-दूसरे को समझ न पा रहे हों। सेट पर भी वो हर सीन को लेकर पूरी तरह इन्वॉल्व रहते थे। ब्रेक के दौरान भी उसी सीन पर बात करते रहते थे। शायद यही वजह है कि उनकी हर फिल्म में किरदार इतने सच्चे लगते हैं।
रिलीज की देरी पर कभी नहीं की शिकायत
फिल्म की रिलीज में देरी हुई, लेकिन इरफान साहब कभी बेचैन नहीं हुए। वो जुड़े रहे। फोन करते रहे। उनका मानना था कि एक एक्टर के तौर पर हमारी जिम्मेदारी है कि जिस काम को हमने ईमानदारी से किया है, वह लोगों तक पहुंचे। जब 19 अगस्त की रिलीज डेट आगे बढ़ी, तब भी उन्होंने कभी शिकायत नहीं की। वो हमेशा यही कहते थे कि आगे बढ़ते रहना जरूरी है। हमने कई कोशिशें कीं, लेकिन कुछ चीजें वक्त पर नहीं हो पाईं।
जन्मदिन पर कही एक सादगी भरी बात
एक बार उनका जन्मदिन शूटिंग के दौरान ही आया था। सेट पर काम चल रहा था। मैं उन्हें विश करने गया। उन्होंने मुस्कराकर कहा कि अब 48 साल का हो गया हूं, अब क्या विश कर रहे हो। यह बात उन्होंने बिल्कुल सहज लहजे में कही, जैसे उम्र उनके लिए कोई मुद्दा ही न हो। फिर हल्के से हंसते हुए बोले कि असली मजा तो 29 के बाद आया। उसी दौर में काम मिलने लगा, पहचान बनी और लोगों ने उनके काम को नोटिस करना शुरू किया। उन्होंने कहा कि तभी उन्हें लगा कि उनका काम सही दिशा में जा रहा है।
इसके बाद उन्होंने बहुत सादगी से कहा कि आज लोग उन्हें जितना प्यार और अपनापन दे रहे हैं, अगर वह थोड़ा पहले मिला होता...तो शायद वो उसे और ज्यादा महसूस कर पाते। यह बात उन्होंने बिना किसी शिकायत के कही। जो मिला, उसे उन्होंने स्वीकार किया और जो देर से मिला, उसे लेकर कभी कोई शिकवा नहीं रखा।
जन्मदिन पर काम करना पसंद था
एक बात पर वो हमेशा जोर देते थे। वो अपना जन्मदिन भी काम करते हुए ही मनाना चाहते थे। उनके लिए काम ही उत्सव था। सेट पर मौजूद लोगों के साथ, उसी माहौल में वो अपने हर जन्मदिन को एंजॉय करते थे।
आखिरी मुलाकात
मेरी उनसे आखिरी मुलाकात एक फिल्म प्रीमियर पर हुई थी। उसके बाद उनकी तबीयत खराब हुई और वो इलाज के लिए लंदन चले गए। कुछ समय तक संपर्क रहा, फिर बातचीत कम होती चली गई। अफसोस यही है कि वही मुलाकात हमारी आखिरी मुलाकात बन गई।