'सबसे बड़ी खुशी तब हुई, जब नसीर साहब का फोन आया'
फिल्म को मिल रहे शुरुआती रिस्पॉन्स का जिक्र करते हुए कंवलजीत सिंह ने कहा, 'मैंने हर तरफ से पॉजिटिव रिस्पॉन्स सुना। मेरे लिए सबसे बड़ी बात तब थी, जब नसीर (नसीरुद्दीन शाह) का फोन आया। उन्होंने फिल्म की तारीफ की। एक इतने बड़े और सीनियर अभिनेता का फोन आना अपने आप में बहुत बड़ी बात होती है। उससे लगा कि हमने कुछ अच्छा काम किया है। मैं खुद भी अभी फिल्म नहीं देख पाया था और अब तो इसे हटा ही दिया गया है।'
'चार साल रिलीज का इंतजार कराया... अब हटाने की क्या जरूरत थी?'
फिल्म हटाए जाने पर उन्होंने हैरानी जताते हुए कहा, 'मुझे समझ नहीं आता कि आखिर डर किस बात का है? वैसे भी फिल्म को रिलीज होने में चार साल लग गए। जब आखिरकार लोगों तक पहुंच ही गई थी, तो फिर उसे हटाने की क्या जरूरत थी? अभी तो बहुत सारे लोगों ने फिल्म देखी भी नहीं थी। अब तो स्वाभाविक है कि लोगों की जिज्ञासा और बढ़ेगी कि आखिर इसमें ऐसा क्या है, जिसे लेकर इतना विवाद हो रहा है।'
'हनी कोर्ट जाएंगे... मुझे पूरा भरोसा है फिल्म फिर लौटेगी'
फिल्म के भविष्य को लेकर कंवलजीत सिंह पूरी तरह आश्वस्त नजर आए। उन्होंने कहा, 'हमारे डायरेक्टर हनी (त्रेहान) फिर कोर्ट जाएंगे। मुझे पूरा भरोसा है कि फिल्म दोबारा रिलीज होगी। वैसे भी कुछ लोगों ने इसे डाउनलोड कर लिया है। पंजाब से लगातार फोन आ रहे हैं कि अलग-अलग ग्रुप्स में फिल्म देखी जा रही है। लोग इसके बारे में बात कर रहे हैं। फिल्म अब और ज्यादा चर्चा में आ गई है।'
'इतना हंगामा क्यों? मुझे समझ नहीं आता'
जब उनसे पूछा गया कि कुछ लोगों का कहना है कि फिल्म 'एंटी इंडिया' साबित हो सकती है, इसलिए इसे हटाया गया, तो कंवलजीत सिंह ने कहा, 'मैं इतना ही कह सकता हूं कि मुझे समझ नहीं आता कि आखिर इतना हंगामा क्यों हो रहा है। फिल्म बने भी कई साल हो चुके हैं। इतने समय बाद भी अगर इसे लेकर इतनी बेचैनी है, तो इसकी वजह क्या है, यह वही लोग बेहतर बता सकते हैं जो इस पर आपत्ति जता रहे हैं। ये तो एक सच्ची कहानी है। अगर एक सच्ची कहानी लोगों तक पहुंच रही है, तो उससे दिक्कत क्या है?'
'फ्रीडम ऑफ स्पीच की बात करते हैं... फिर उसी का गला दबा देते हैं'
क्रिएटिव फ्रीडम के सवाल पर कंवलजीत ने बेबाकी से कहा, 'हम फ्रीडम ऑफ स्पीच की बात तो बहुत करते हैं, लेकिन जब कोई कहानी सामने आती है तो उसी का गला दबा देते हैं। फिर उस आजादी का मतलब क्या रह जाता है? मेरी जानकारी में डायरेक्टर की कोई गलत मंशा नहीं थी। उन्होंने एक कहानी कहने की कोशिश की। अब उसे लोगों तक पहुंचने ही नहीं दिया जाएगा, तो फिर फैसला कौन करेगा कि फिल्म में क्या है?'
'मैं खुद एयरफोर्स बैकग्राउंड से हूं...'
उन्होंने आगे कहा, 'मैं खुद एयरफोर्स बैकग्राउंड से हूं। मुझे अपने देश से उतना ही प्यार है, जितना किसी भी भारतीय को हो सकता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि कहानियां सुनाने की आजादी ही खत्म कर दी जाए। समाज के अलग-अलग पहलुओं पर फिल्में बनती हैं और लोगों को उन्हें देखने और अपनी राय बनाने का मौका मिलना चाहिए।'
'जहां जरूरत हो, वहीं रोक लगाइए... लेकिन हर चीज पर नहीं'
सेंसरशिप पर अपनी राय रखते हुए कंवलजीत सिंह ने कहा, 'मैं यह नहीं कहता कि कोई नियम नहीं होने चाहिए। जहां जरूरत हो, वहां जरूर रोक लगाइए। लेकिन जितना सच है, उसे उतना रहने भी दीजिए। अगर हर चीज में जरूरत से ज्यादा दखल होगा, अगर हर बात पर ओवरबोर्ड चले जाएंगे, तो उसका असर पूरी फिल्म इंडस्ट्री और क्रिएटिव माहौल पर पड़ेगा। मुझे उम्मीद है ये फिल्म अपनी लड़ाई लड़कर फिर से जीतेगी।'