आजकल गाना बनाते समय सिर्फ धुन और बोल पर बात नहीं होती। यह भी देखा जाता है कि गाने का कौन सा हिस्सा रील्स में इस्तेमाल हो सकता है। मगर कैलाश खेर ऐसा नहीं मानते। उनके गाने खुद सोशल मीडिया पर खूब वायरल होते हैं, फिर भी उनका मानना है कि गाना तभी मायने रखता है, जब वह लोगों के दिल तक पहुंचे।
गायक कैलाश खेर
- फोटो : अमर उजाला
संगीत की उम्र वायरल होने से तय नहीं होती
अमर उजाला डिजिटल से बातचीत में कैलाश ने कहा, ‘सोशल मीडिया को ध्यान में रखकर भी म्यूजिक बनाया जाता है, ताकि वह पॉपुलर हो जाए। हालांकि, ये सब चीजें मुझे ज्यादा प्रभावित नहीं करतीं। मेरे लिए संगीत की उम्र सिर्फ इस बात से तय नहीं होती कि वह कितनी जल्दी वायरल हुआ। सोशल मीडिया हो या बगैर सोशल मीडिया, जो चीज सिर्फ वायरल होने के लिए बनाई गई हो, वह लंबे समय तक नहीं टिक सकती। संगीत में जो भाव और इमोशन होता है, वो अपने आप आता है।’
कैलाश खेर
- फोटो : इंस्टाग्राम- @kailashkher
रील्स नहीं, सदियों पुरानी कहानियों का दिया उदाहरण
अपनी बात समझाने के लिए कैलाश आज के सोशल मीडिया से सीधे इतिहास के दौर में चले जाते हैं।वह कालिदास और विद्योत्तमा का उदाहरण देते हुए कहते हैं, ‘कालिदास और विद्योत्तमा कब हुए होंगे, लेकिन आज भी उनके ऊपर ग्रंथ लिखे जाते हैं। आज भी उनके ऊपर फिल्में बनती हैं। संयुक्ता और पृथ्वीराज चौहान कब हुए होंगे, इनके नाम के डंके बजते हैं। तो ये कोई सोशल मीडिया वाली रील तो नहीं थे।
इन कहानियों की खासियत सिर्फ यह नहीं है कि लोग उन्हें जानते हैं। इनमें ऐसी भावनाएं हैं, जो आज भी लोगों को अपने से जुड़ी लगती हैं। ये प्रेम करने वालों की कहानी है। इसमें एक राजा है, एक रानी है और उनके बीच का प्यार है। यही वजह है कि आज भी लोग इन कहानियों को याद करते हैं और इनके बारे में बातें करते हैं। ये ऐसी कहानियां हैं, जो सालों-साल चलती हैं।
कैलाश खेर
- फोटो : इंस्टाग्राम- @kailashkher
अपने गानों की रील्स पर क्या बोले कैलाश?
कैलाश की बात के बाद उनके अपने गानों का उदाहरण भी आता है। ‘तेरी दीवानी’ और ‘सैंया’ जैसे गाने आज भी रील्स पर खूब इस्तेमाल होते हैं। ऐसे में सवाल था कि सोशल मीडिया से प्रभावित न होने वाले कैलाश अपने गानों की रील्स पर लोकप्रियता को कैसे देखते हैं?
वह कहते हैं, ‘तेरी दीवानी पे बने, आज मेरे प्यार... हवा पे बने, दौलत-शोहरत क्या करनी, तेरे प्यार का सहारा काफी है। हमारे जो गाने हैं, उनमें गहरी बातें होती हैं। उनमें गहराई होती है और भावनाओं की सच्ची पीड़ा होती है।
इन गानों में प्यार के उस एहसास को जगह मिलती है, जिसे लोग महसूस कर सकते हैं और खुद से जोड़ सकते हैं। जब इंसान प्यार में होता है, तो वह कैसा महसूस करता है, ये गाने उसी एहसास को सामने लाते हैं और लोगों को छू जाते हैं। शायद यही वह फर्क है, जो किसी गाने को सिर्फ वायरल होने से आगे ले जाता है।’